बारिश का दौर थमते ही वाहनों के लिए एक नए रखरखाव चक्र की शुरुआत हो जाती है। भारतीय सड़कों पर मानसून के दौरान जलभराव, गहरे गड्ढे, लगातार कीचड़ और भारी नमी का सामना गाड़ियों को करना पड़ता है। ये मौसमी परिस्थितियां वाहन के बाहरी पेंट से लेकर अंदरूनी केबिन, वायरिंग और अंडरबॉडी चेसिस तक पर गहरा असर डालती हैं। यदि बारिश का मौसम खत्म होते ही इन सूक्ष्म समस्याओं पर ध्यान न दिया जाए, तो भविष्य में मरम्मत का खर्च काफी बढ़ सकता है और गाड़ी की चलने की क्षमता पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।
बाहरी हिस्से की धुलाई और वैक्स सुरक्षा
सड़कों पर उड़ने वाले गंदे पानी और कीचड़ के कण वाहन के पहियों के मेहराबों, दरवाजों के निचले किनारों और अंडरबॉडी में चिपक कर जम जाते हैं। साधारण पानी की बौछार कई बार इस चिपचिपी गंदगी को पूरी तरह हटाने में नाकाफी साबित होती है। इसके लिए संतुलित पीएच मान वाले वाहन शैम्पू का प्रयोग करके गाड़ी के हर हिस्से को अच्छी तरह धोना चाहिए। धुलाई के उपरांत साफ माइक्रोफाइबर कपड़े से सुखाकर वाहन की बॉडी पर उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटेक्टिव वैक्स लगाना आवश्यक है। यह वैक्स कोटिंग पेंट की चमक लौटाने के साथ बाहरी परत पर सुरक्षा कवच तैयार करती है, जिससे धूप और हवा में मौजूद धूल के धब्बों से बचाव होता है।
जंग की पहचान और अंडरबॉडी सुरक्षा उपाय
लगातार पानी के संपर्क में रहने के कारण धातु से बने पैनलों और निचले हिस्सों में संक्षारण यानी जंग लगने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। चेसिस, सस्पेंशन कंपोनेंट्स और बॉडी पैनल्स के जोड़ों को बारीकी से देखना चाहिए कि कहीं लाल या भूरे रंग की जंग की परत तो नहीं उभर रही। यदि किसी स्थान पर जंग के निशान दिखाई दें, तो तुरंत जंग हटाने वाले घोल या एंटी-कोरोजन स्प्रे का छिड़काव करके उसे साफ करना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त पूरी अंडरबॉडी पर टिकाऊ एंटी-रस्ट कोटिंग लगवाना एक समझदारी भरा कदम है, जिससे धातु के पुर्जे अंदर से खोखले होने से बचते हैं और वाहन की मजबूती बरकरार रहती है।
पहियों की स्थिति, ट्रेड डेप्थ और दबाव का निरीक्षण
मानसून में जलमग्न सड़कों और नुकीले गड्ढों से गुजरने के कारण टायरों पर भारी दबाव पड़ता है। इस दौरान पहियों के घिसने की दर बढ़ जाती है या वे असमान रूप से कटने लगते हैं। गाड़ी चलाने से पहले ट्रेड की गहराई की पूरी जांच करें। यदि ग्रूव काफी घिस चुके हों या रबर में असमान दरारें दिखें, तो सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नए टायर लगवाने चाहिए। इसके साथ ही निर्धारित मानक के अनुसार हवा का दबाव बनाए रखना भी सड़क पर गाड़ी की पकड़ और ईंधन दक्षता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
केबिन की गहरी सफाई और नमी मुक्ति
बारिश के दिनों में भीगे जूतों और गीले कपड़ों के जरिए गाड़ी के अंदर पहुंचने वाली नमी फ्लोर कार्पेट और सीटों की गद्दियों में समा जाती है। यदि इसे नजरअंदाज किया जाए, तो केबिन में फफूंद और असहनीय सीलन भरी गंध पैदा हो जाती है, जो सांस की एलर्जी का कारण बन सकती है। वैक्यूम क्लीनर की मदद से सभी सीटों, फर्श और मैट की गहरी सफाई करें। डैशबोर्ड तथा दरवाजों के प्लास्टिक पैनल्स को उपयुक्त इंटीरियर क्लीनर से पोंछें। केबिन को सूखा और ताजा रखने के लिए नमी सोखने वाले डीह्यूमिडिफायर पैड का उपयोग करना बेहद असरदार रहता है।
इलेक्ट्रिकल वायरिंग और बैटरी टर्मिनल्स की पड़ताल
पानी के छींटों और लगातार नमी का सबसे संवेदनशील शिकार गाड़ी का इलेक्ट्रिकल सिस्टम होता है। हेडलाइट, टेललाइट, इंडिकेटर, फॉग लैंप और ब्रेक लाइट के काम करने की गति और रोशनी की तीव्रता को जांचें। इसके अलावा बोनट खोलकर बैटरी के खूंटों पर सफेद या हरे रंग के नमक जैसे जमाव की जांच करें। यदि टर्मिनल्स पर कोई संक्षारण जमा हो, तो उसे ब्रश की मदद से अच्छी तरह साफ करें। किसी भी खराब लाइट या ढीले तार को फौरन ठीक करवाने से अप्रत्याशित खराबी और शॉर्ट सर्किट के जोखिम को पूरी तरह टाला जा सकता है।



















