शहरी जीवन में ताजी और पौष्टिक हरी पत्तेदार सब्जियों की मांग लगातार बनी रहती है, मगर खुले खेत या बागवानी योग्य जमीन के अभाव में अधिकांश परिवारों को पूरी तरह बाजार पर ही निर्भर रहना पड़ता है। इस समस्या का एक व्यावहारिक विकल्प हाइड्रोपोनिक बागवानी के रूप में सामने आया है, जिसकी मदद से मकान की खुली छत या बालकनी के छोटे हिस्से में भी हरी सब्जियां उगाई जा सकती हैं। इस आधुनिक कृषि पद्धति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पौधों की परवरिश के लिए मिट्टी की बिल्कुल आवश्यकता नहीं पड़ती, बल्कि पानी और पोषक तत्वों के संतुलित प्रवाह से फसल तैयार होती है। सीमित क्षेत्र में सघन पौधे लगाने की सुविधा और पानी का नियंत्रित उपभोग इसे शहरी घरों के लिए काफी उपयोगी बनाते हैं।
सीमित दायरे में तकनीक का ढांचा
पूसा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. रामू कुमार साहू ने इस तकनीक को उन लोगों के लिए बेहद मददगार बताया है जिनके पास खेती के लिए जमीन का कोई टुकड़ा उपलब्ध नहीं है। उनका कहना है कि योजनाबद्ध तरीके से छत पर एक साधारण मॉडल स्थापित करके परिवार के उपभोग लायक ताजी सब्जियों का नियमित उत्पादन किया जा सकता है। इसके लिए किसी विशाल भूभाग की दरकार नहीं होती, बल्कि सही आकार का ढांचा खड़ा करके और उसमें जल आपूर्ति की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करके बेहतरीन परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
मिट्टी के बिना पौधों को सहारा और पाइप की बनावट
डॉ. रामू कुमार साहू के विवरण के मुताबिक इस समूची प्रणाली में मिट्टी का प्रयोग पूरी तरह बाहर रखा जाता है। पौधों को सीधा खड़ा रखने और उनकी जड़ों को प्राथमिक सहारा प्रदान करने के लिए कोकोपीट जैसी सहायक सामग्रियों का उपयोग किया जाता है। पौधों को स्थापित करने हेतु बाजार में आसानी से मिलने वाले छोटे जालीदार गमले या विशेष कंटेनर काम में लिए जाते हैं। इन गमलों को लगभग चार इंच चौड़े पीवीसी पाइपों में एक तय दूरी पर तराशे गए गोल छेदों के भीतर व्यवस्थित ढंग से फिट किया जाता है। पाइपों के पूरे वजन और संरचना को सुरक्षित रखने के लिए लोहे अथवा किसी अन्य टिकाऊ सामग्री से बना मजबूत स्टैंड तैयार किया जाता है।
बहुस्तरीय संरचना और पुनर्चक्रण का सिद्धांत
उपलब्ध स्थान का अधिकतम लाभ उठाने के लिए इस ढांचे को जरूरत के मुताबिक तीन से चार स्तरों या मंजिलों में खड़ा किया जा सकता है। ऊर्ध्वाधर रूप से तैयार इस बहुस्तरीय व्यवस्था की वजह से बेहद कम फर्श क्षेत्र में भी अधिक संख्या में पौधे रोपे जा सकते हैं। पाइप संरचना के निचले हिस्से में एक पानी की टंकी रखी जाती है, जिसमें पर्याप्त मात्रा में जल भरा रहता है। इस स्टोरेज टैंक को पाइप तंत्र के साथ जोड़कर एक बंद लूप में जल का संचरण कराया जाता है। जालीदार गमलों से बाहर निकलने वाली पौधों की जड़ें पाइप के आंतरिक वातावरण में प्रवाहित हो रही नमी और घुले हुए आवश्यक पोषक तत्वों को सीधे सोखकर विकसित होती हैं। इस निरंतर चक्र के कारण मिट्टी की अनुपस्थिति में भी पौधों को बढ़ने का एक आदर्श परिवेश हासिल होता रहता है।
जल प्रवाह का संचालन और आवश्यक देखभाल
हाइड्रोपोनिक खेती के संचालन में जल संचरण को सबसे अहम कड़ी माना गया है। भंडारण टैंक को पीवीसी पाइपों से जोड़ने के बाद आवश्यकता अनुसार समय-समय पर पानी का प्रवाह चालू किया जाता है। वैज्ञानिक के अनुसार दिनभर में कुछ मिनटों के लिए भी अगर पानी का बहाव सक्रिय रखा जाए, तो पाइप के भीतर पौधों के लिए पर्याप्त नमी बरकरार रहती है। पाइपों से गुजरने के उपरांत अतिरिक्त पानी वापस नीचे रखे टैंक में लौट आता है, जिसे बार-बार दोबारा इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इस प्रकार पानी की बर्बादी लगभग शून्य हो जाती है। एक सुदृढ़ लौह फ्रेम बनाकर उसमें चार इंच के पीवीसी पाइप लगाना और उचित दूरी पर जालीदार बास्केट के छेद तैयार करना इसकी बुनियादी जरूरत है। हालांकि अच्छी पैदावार सुनिश्चित करने के लिए नियमित पानी के साथ-साथ सही मात्रा में पोषक तत्वों का मिश्रण और पर्याप्त प्राकृतिक धूप का ध्यान रखना भी अनिवार्य है।



















