हवा में मौत से जूझते हुए 174 यात्रियों की जान बचाने वाले साहसी भारतीय पायलट स्मित मच्छार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अबू धाबी के अस्पताल में लाइव वीडियो बातचीत कर उनकी सेहत की जानकारी ली। जीवन और मौत के बीच झूल रहे विमान को सुरक्षित बचाने के इस अभूतपूर्व पराक्रम को देखकर समूचा देश गर्व से भर उठा। इस विशेष संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने कैप्टन स्मित से गुजराती में भी चर्चा की। गंभीर चोटों के बीच अस्पताल के बिस्तर पर लेटे स्मित मच्छार ने साझा किया कि वे हर बड़े संकट के दौरान हनुमान चालीसा का स्मरण करते हैं। जिस भयानक सुबह कॉकपिट में उनकी जान पर बन आई थी और उनका पूरा शरीर लहूलुहान हो चुका था, उस समय भी वे लगातार मन ही मन हनुमान चालीसा का पाठ कर अपनी मानसिक शक्ति बनाए हुए थे।
प्रधानमंत्री ने परिवार के संस्कारों और गीता के मूल्यों को सराहा
संवाद के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पायलट के परिवार से हुई बातचीत का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बीते दिन उनकी बातचीत स्मित के पिता भूपेंद्रभाई, माता गीताबेन और पत्नी सोनाली बेन से हुई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने गीताबेन से कहा था कि उनका नाम गीता है और उन्होंने न केवल अपने पुत्र को भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों का सार समझाया, बल्कि उन दिव्य मूल्यों को उसके आचरण में भी उतारा है। प्रधानमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि स्मित ने जीवन में इतना असाधारण कार्य किया है कि आज देश और दुनिया भर के लोग उनसे जुड़ने और उन्हें देखने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि यह अदम्य साहस केवल इसलिए संभव हो सका क्योंकि स्मित के भीतर श्रीमद्भगवद्गीता के मूल्य रचे-बसे हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी जोड़ा कि इस जांबाजी ने पूरे देश का मस्तक गर्व से ऊंचा किया है और आज आम जनमानस में उनके प्रति गहरा स्नेह उमड़ रहा है।
डोनल्ड ट्रंप ने बताया दुनिया का सुपर हीरो
इस अद्भुत पराक्रम की गूंज वैश्विक स्तर पर भी सुनाई दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भारतीय पायलट के सूझबूझ भरे कदम की सराहना करते हुए कहा कि यदि कैप्टन स्मित ने समय रहते असाधारण समझदारी न दिखाई होती और कॉकपिट का दरवाजा न खोला होता, तो हवा में एक बेहद खौफनाक आतंकवादी घटना घट सकती थी। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कैप्टन स्मित पूरी दुनिया के लिए एक सुपर हीरो बनकर उभरे हैं। आज पूरी दुनिया जिस वीरता की मुक्तकंठ से प्रशंसा कर रही है, उसने अपनी त्वरित निर्णय क्षमता और अद्भुत साहस के बल पर फ्लाईदुबई के एक यात्री विमान को जमीन पर ध्वस्त होने से बचा लिया। शरीर से लगातार बहते खून और गंभीर जख्मों के बावजूद उन्होंने आतंकवादी सह-पायलट का डटकर सामना किया और विमान में मौजूद सभी 174 यात्रियों को जीवनदान दिया।
कॉकपिट में मौत का तांडव और दूसरा 9/11 टलने की दास्तान
यदि कैप्टन स्मित मच्छार ने उस अंतिम क्षण में अप्रतिम वीरता न दिखाई होती, तो संभवतः आसमान में 9/11 जैसा दूसरा भयानक मंजर देखने को मिलता और समूची दुनिया में गहरा मातम फैल जाता। लेकिन उनके अद्वितीय साहस की बदौलत आज हर कोई इस जांबाज पायलट को सलाम कर रहा है। जब यह घटना घटी, तब विमान तीव्र गति से नीचे गिर रहा था और मुख्य पायलट बुरी तरह घायल हो चुके थे। विमान चंद पलों में ही धरती से टकराने वाला था। उसी नाजुक मोड़ पर यात्रियों के बीच बैठे यानिव नाम के एक इजरायली प्लम्बर ने गजब की दिलेरी दिखाई और किसी तरह कॉकपिट के भीतर कदम रखा। उस वक्त विमान का अगला हिस्सा यानी नोज पूरी तरह नीचे की ओर झुक चुका था और कुछ ही सेकंड में विमान जमीन से टकराकर चकनाचूर हो सकता था।
एक प्लम्बर की सूझबूझ और टीवी सीरीज का सबक
कॉकपिट में दाखिल होते ही यानिव ने गजब की सूझबूझ का परिचय दिया। उसने सबसे पहले हमलावर सह-पायलट को जोरदार धक्का देकर नियंत्रण से दूर दूसरी तरफ गिरा दिया। इसके तुरंत बाद उसने फ्लाइट के कंट्रोलर को पूरी ताकत से ऊपर की दिशा में खींचा। उसे पहले से यह पक्का भरोसा नहीं था कि यह कदम काम करेगा या नहीं, लेकिन उसने विमान हादसों पर आधारित एक सीरीज देखी थी। उस सीरीज में दिखाया गया था कि नीचे गिरते हुए विमान को ऊपर की तरफ कैसे उठाया जाता है। उसने उसी दृश्य को याद करते हुए कंट्रोलर को खींचा और संयोग से यह तरकीब पूरी तरह सटीक साबित हुई। तेजी से गोता लगाता हुआ विमान दोबारा ऊपर की ओर उठने लगा और उसकी उड़ान धीरे-धीरे स्थिर होने लगी।
यात्री पायलटों का प्रवेश और सऊदी अरब में सुरक्षित लैंडिंग
विमान के थोड़ा संभलते ही दो अन्य पायलट, जो उस वक्त बतौर सामान्य यात्री सफर कर रहे थे, तुरंत मदद के लिए कॉकपिट के अंदर पहुंचे। हालांकि कॉकपिट के भीतर चारों ओर फैले खून और हिंसक मंजर को देखकर उनमें से एक अतिरिक्त पायलट बेहोश हो गया। लेकिन दूसरे पायलट ने असाधारण संयम और धैर्य बनाए रखा। उन्होंने तुरंत फ्लाइट के मुख्य नियंत्रण अपने हाथों में लिए, नजदीकी हवाई यातायात नियंत्रण से तत्काल संपर्क साधा और पूरे कौशल के साथ सऊदी अरब में विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराने में सफलता हासिल की। इस तरह एक भयानक हवाई त्रासदी जमीन को छूने से पहले ही नाकाम कर दी गई।
छह चमत्कार जिन्होंने असंभव को संभव बना दिया
फ्लाईदुबई के इस विमान में सवार सभी 174 यात्रियों का सकुशल बच निकलना किसी अचंभे और ईश्वरीय कृपा से कम नहीं है। इस पूरी घटना में छह ऐसे दुर्लभ चमत्कार हुए जिन्होंने मौत के मुंह से जिंदगियों को खींच निकाला। पहला चमत्कार यह था कि गंभीर रूप से लहूलुहान होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने होश संभालते हुए इमरजेंसी कोड भेजा, क्योंकि कोड भेजना केवल कोई साधारण बटन दबाना नहीं होता बल्कि पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। दूसरा चमत्कार यह रहा कि अत्यधिक घायल होने पर भी उन्होंने अंदर से कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिसके बिना बाहर से सहायता पहुंचना और विमान का बचना नामुमकिन था। तीसरा चमत्कार यह था कि अंदर घुसे यात्रियों ने पलक झपकते ही यह पहचान लिया कि हमलावर कौन है और रक्षक कौन है। चौथा चमत्कार इजरायली प्लम्बर द्वारा फ्लाइट कंट्रोलर को सही समय पर ऊपर खींचना था, जिसने विमान का गिरना रोका। पांचवां चमत्कार विमान में मौजूद एक डेंटिस्ट का सामने आना था, जिन्होंने घायल कैप्टन का तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू किया। छठा और अंतिम चमत्कार यह था कि यात्री के रूप में सफर कर रहे पायलट ने, जो इस विशेष विमान के मॉडल से पूरी तरह परिचित नहीं था, अत्यंत संयम से सऊदी अरब में सुरक्षित लैंडिंग करा दी। अनुभवी एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि इतने सारे अनुकूल संयोग एक साथ घटित होना बिना ईश्वरीय कृपा के संभव नहीं था। इस घटना ने दुनिया भर में यह गहरा संदेश दिया है कि एक भारतीय अपने कर्तव्य और मानवीय जान की रक्षा के लिए किस हद तक खुद को समर्पित कर सकता है।


















