अमेरिकी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता टेस्ला ने अपनी बहुप्रतीक्षित रोडस्टर को लेकर एक नाटकीय प्रदर्शन वीडियो पेश किया है, जिसमें यह चार पहिया वाहन सड़क छोड़कर हवा में करतब दिखाता नजर आता है। फुटेज के अनुसार वाहन एक घुमावदार रैंप से उड़ान भरता है, हवा में पूरा चक्कर काटते हुए कलाबाजी दिखाता है और फिर संतुलित अंदाज में जमीन पर वापस उतर जाता है। इस प्रस्तुति को एक उड़ने वाली कार के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, मगर वाहन उद्योग से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञों ने इसके भौतिक विज्ञान और जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ऑटोमोबाइल जानकारों का स्पष्ट कहना है कि किसी विज्ञापन वीडियो में ऐसा दृश्य रच देना अलग बात है, लेकिन फैक्ट्री में तैयार होने वाले आम उत्पादन मॉडल में ऐसी क्षमताएं देना लगभग नामुमकिन है।
रॉकेट तकनीक और एक सेकंड में रफ्तार पकड़ने का दावा
टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क ने दावा किया है कि इस सुपरकार के भीतर रॉकेट जैसी प्रणाली वाले थ्रस्टर्स लगाए गए हैं। यह प्रणाली अत्यधिक दबाव वाली गैस को बाहर फेंककर गाड़ी को तीव्र धक्का प्रदान करती है। कंपनी के आधिकारिक दावों की मानें तो यह वाहन महज एक सेकंड से भी कम वक्त में शून्य से करीब 97 किलोमीटर प्रति घंटे की गति हासिल करने में सक्षम है। कंपनी का अनुमान है कि रोडस्टर का वास्तविक उत्पादन वर्ष 2028 तक आरंभ होगा। इसके बावजूद इंजीनियरिंग जगत में इस वाहन के हवा में कलाबाजी करने, हवा के बीच संतुलन साधने और फिर बिना किसी नुकसान के जमीन पर लैंड करने की वास्तविक क्षमता को लेकर गहरा संदेह बना हुआ है।
विशेषज्ञ की दो टूक राय, प्रचार स्टंट से हकीकत नहीं बदलती
वाहन विशेषज्ञ टूटू धवन ने इस प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए इसे मात्र दर्शकों को लुभाने वाला एक प्रचार स्टंट करार दिया है। उनका तर्क है कि डिजिटल तकनीकों या नियंत्रित स्टंट के माध्यम से किसी कार को हवा में उड़ता हुआ दिखा देने से यह सिद्ध नहीं हो जाता कि वाहन सामान्य परिस्थितियों में ऐसा कर सकता है। वाहनों का ढांचा और उनकी गतिकी सड़क पर चलने के लिए तैयार की जाती है, न कि हवा में कलाबाजियां दिखाने के लिए।
गाड़ियों का काम सड़क पर चलना होता है, वे कोई सर्कस के करतब दिखाने वाले कलाकार नहीं हैं जिन्हें हवा में घुमाकर सीधा खड़ा कर दिया जाए।
धवन के अनुसार जिस प्रकार वीडियो के भीतर वाहन को एक बड़े ट्रक के ऊपर से छलांग लगाकर बिना असंतुलित हुए सीधा उतरते दिखाया गया है, वह असल जीवन में होना संभव नहीं दिखता। उन्होंने जोर दिया कि ऐसे दृश्य केवल प्रचार और चर्चा बटोरने के उद्देश्य से रचे जाते हैं, जिन्हें वास्तविक ड्राइविंग तकनीक मान लेना भारी भूल होगी।
स्टारलिंक विवाद और मस्क के कारोबारी साम्राज्य पर उठती निगाहें
टेस्ला के इस प्रचार वीडियो पर खड़े होते विवादों के साथ ही एलन मस्क की सैटेलाइट संचार कंपनी स्टारलिंक की भूमिका पर भी पुनर्विचार शुरू हो गया है। यूक्रेन संघर्ष के दौरान स्टारलिंक के इंटरनेट नेटवर्क की कार्यप्रणाली को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठे थे। वहां आलोचकों ने चिंता जताई थी कि सैन्य संचालन के बीच उपग्रह संचार की गति अथवा उसकी उपलब्धता में आने वाला बदलाव सीधे तौर पर मोर्चे की सामरिक क्षमताओं को प्रभावित कर सकता है। इस विषय पर सफाई देते हुए मस्क ने स्पष्ट किया था कि इस नेटवर्क पर उनका निजी नियंत्रण नहीं है, बल्कि इसका संचालन पेंटागन के हाथ में है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य में तकनीकी निर्भरता और सुरक्षा के पहलू
वैश्विक स्तर पर सामने आए इन घटनाक्रमों के बीच भारत में भी मस्क के स्वामित्व वाली कंपनियों को व्यावसायिक प्रवेश देने से जुड़े पहलुओं पर सतर्कता बरती जा रही है। तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि कोई विदेशी तकनीक कितनी भी प्रभावशाली अथवा आधुनिक क्यों न प्रतीत होती हो, किसी बाहरी बुनियादी ढांचे पर अति-निर्भरता रणनीतिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील होती है। भविष्य में जब भी मस्क की कंपनियों के नेटवर्क और वाहनों का विस्तार भारतीय बाजार में होगा, तब सरकारी जवाबदेही, स्थानीय डेटा सुरक्षा और संचालन नियंत्रण से जुड़े नियम सबसे महत्वपूर्ण कारक साबित होंगे।




















