भारतीय वाहन बाजार में टोयोटा फॉर्च्यूनर अपनी खास मस्कुलर बनावट, मजबूत रीसेल वैल्यू और भरोसेमंद इंजन के दम पर एक अलग मुकाम रखती है। प्रीमियम एसयूवी सेगमेंट में यह गाड़ी चाहने वालों की सूची में सबसे ऊपर रहती है और कई लोग इसे अपने रसूख का प्रतीक मानते हैं। हालांकि, जब शोरूम से इस वाहन को निकालकर अपने घर लाने की बात आती है, तो इसकी अंतिम ऑन-रोड कीमत हर शहर में बदल जाती है। ऐसा अलग-अलग राज्यों में लगने वाले रोड टैक्स और स्थानीय रजिस्ट्रेशन शुल्क की वजह से होता है, जिसके कारण देश के विभिन्न हिस्सों में इस गाड़ी की कुल कीमत में लाखों रुपये का अंतर आ जाता है।
पुद्दुचेरी में सबसे किफायती दाम
देशभर में लग्जरी और प्रीमियम वाहनों पर सबसे कम रोड टैक्स वसूलने वाले क्षेत्रों में पुद्दुचेरी का नाम सबसे ऊपर आता है। इस केंद्र शासित प्रदेश में रियायती और फ्लैट टैक्स स्लैब होने के कारण खरीदारों को बड़ी राहत मिलती है। यहां बेस वेरिएंट की एक्स-शोरूम कीमत पर लगभग दो लाख पैंसठ हजार रुपये का आरटीओ टैक्स चुकाना पड़ता है। वाहन बीमा और टीसीएस शुल्क को जोड़ने के बाद भी यह एसयूवी चालीस लाख रुपये के दायरे में मिल जाती है, जो इसे पूरे देश में सबसे सस्ता विकल्प बनाती है। इस क्षेत्र में अनुमानित ऑन-रोड कीमत उनतालीस लाख पचासी हजार से उनतालीस लाख पचानवे हजार रुपये के बीच बैठती है।
अहमदाबाद और गुजरात का टैक्स गणित
गुजरात में निजी चार पहिया वाहनों पर रोड टैक्स की दर लगभग छह फीसदी तय की गई है, जो देश के अन्य बड़े राज्यों की तुलना में काफी कम है। अहमदाबाद शहर में बेस फॉर्च्यूनर खरीदने पर ग्राहकों को केवल दो लाख दस हजार से दो लाख पंद्रह हजार रुपये तक का टैक्स देना होता है। बीमा और अन्य स्थानीय शुल्कों को मिलाने के बाद यह शानदार गाड़ी लगभग उनतालीस लाख चालीस हजार रुपये में आसानी से घर आ जाती है। इस कम टैक्स ढांचे की वजह से यहां के स्थानीय खरीदारों को बड़ी वित्तीय बचत का लाभ मिलता है, और अनुमानित ऑन-रोड कीमत उनतालीस लाख तीस हजार से उनतालीस लाख चालीस हजार रुपये के बीच रहती है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की स्थिति
देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल चालित वाहनों पर रोड टैक्स करीब दस प्रतिशत है, जो मुंबई या बेंगलुरु जैसे महानगरों के मुकाबले काफी संतुलित और व्यावहारिक माना जाता है। यहां फॉर्च्यूनर के बेस मॉडल पर लगभग साढ़े तीन लाख रुपये आरटीओ के रूप में और दो लाख पंद्रह हजार रुपये बीमा तथा टीसीएस के मद में खर्च होते हैं। इन सभी शुल्कों को जोड़ने पर दिल्ली के अंदर इस गाड़ी की कुल ऑन-रोड कीमत चालीस लाख पचासी हजार रुपये के आसपास पहुंच जाती है। यहां अनुमानित ऑन-रोड कीमत चालीस लाख अस्सी हजार से चालीस लाख नब्बे हजार रुपये तक दर्ज की जाती है।
मुंबई और महाराष्ट्र का खर्च
महाराष्ट्र राज्य में पेट्रोल से चलने वाले वाहनों पर रोड टैक्स की दर ग्यारह से तेरह प्रतिशत तक जाती है, जो इसे थोड़ा महंगा बनाती है। मुंबई शहर में बेस फॉर्च्यूनर के खरीदार को लगभग चार लाख साठ हजार रुपये अकेले आरटीओ टैक्स के रूप में चुकाने पड़ते हैं। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन शुल्क, सड़क सुरक्षा सेस और बीमा का खर्च जुड़ने के बाद गाड़ी की अंतिम कीमत लगभग बयालीस लाख रुपये तक पहुंच जाती है। उत्तर भारत के कई शहरों की तुलना में यहाँ का खर्च थोड़ा अधिक है, जहाँ अनुमानित ऑन-रोड कीमत इकतालीस लाख पचासी हजार से बयालीस लाख रुपये के बीच होती है।
बेंगलुरु और कर्नाटक में सबसे ज्यादा कीमत
कर्नाटक में बीस लाख रुपये से अधिक कीमत वाली गाड़ियों पर देश का सबसे अधिक यानी करीब अठारह प्रतिशत रोड टैक्स वसूला जाता है। बेंगलुरु में बेस फॉर्च्यूनर खरीदने पर आरटीओ का भारी भरकम खर्च छह लाख तीस हजार रुपये से भी ऊपर निकल जाता है। इन ऊंचे करों के परिणामस्वरूप यहाँ यह एसयूवी लगभग तैंतालीस लाख पचहत्तर हजार रुपये में मिलती है, जो पुद्दुचेरी के मुकाबले सीधे तौर पर तीन लाख अस्सी हजार रुपये तक अधिक महंगी पड़ती है। यहाँ अनुमानित ऑन-रोड कीमत तैंतालीस लाख पैंसठ हजार से तैंतालीस लाख अस्सी हजार रुपये के दायरे में रहती है।


















