त्योहारों के मौके पर नई कार खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए सही ईंधन विकल्प का चुनाव करना एक बड़ा फैसला होता है। आगरा के ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट धर्मवीर कुशवाहा का कहना है कि इन दिनों बाजार में सीएनजी कारों को खरीदार काफी प्राथमिकता दे रहे हैं। जो लोग रोजाना लंबी दूरी का सफर तय करते हैं, उनके लिए सीएनजी वाहन ईंधन के खर्च को काफी हद तक नियंत्रित रखने में मददगार साबित होते हैं। हालांकि ग्राहकों को यह भी ध्यान में रखना होता है कि शोरूम में सीएनजी मॉडल की शुरुआती खरीदारी कीमत सामान्य पेट्रोल मॉडल की तुलना में थोड़ी ज्यादा रहती है।
सीमित आवाजाही वालों के लिए पेट्रोल कारें क्यों हैं बेहतर
ऐसे नौकरीपेशा लोग जिनकी दैनिक आवाजाही बहुत अधिक नहीं होती, उनके लिए पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियां एक व्यावहारिक विकल्प बनकर उभरती हैं। जब रोजाना की रनिंग सीमित हो, तो सीएनजी या डीजल मॉडल पर लगने वाले अतिरिक्त शुरुआती बजट के मुकाबले पेट्रोल कार की कम शुरुआती कीमत और नियमित इस्तेमाल की प्राथमिकताओं को तौलकर निर्णय लेना फायदेमंद रहता है। कम दूरी तय करने की स्थिति में पेट्रोल मॉडल का समग्र बजट संतुलन बेहतर बना रहता है।
टैक्सी संचालन और कमर्शियल इस्तेमाल में सीएनजी की मांग
धर्मवीर कुशवाहा के मुताबिक, व्यावसायिक रूप से टैक्सी चलाने वाले चालक और ऑपरेटर सीएनजी से चलने वाली गाड़ियों को सबसे ज्यादा तवज्जो देते हैं। इस श्रेणी में मारुति स्विफ्ट और अर्टिगा की मांग सबसे ज्यादा देखी जाती है। कम संचालन लागत और बेहतर माइलेज के संयोजन की वजह से इन दोनों मॉडलों को कमर्शियल इस्तेमाल के लिए बेहतरीन माना जाता है। इसके अलावा सीएनजी गाड़ियों में एक बड़ा फायदा यह भी होता है कि इनमें पेट्रोल टैंक की इनबिल्ट सुविधा मौजूद रहती है। यदि सफर के दौरान सीएनजी समाप्त हो जाए या रास्ते में गैस स्टेशन न मिले, तो बिना किसी परेशानी के पेट्रोल पर यात्रा जारी रखी जा सकती है, जिससे लंबी दूरी के मुसाफिरों को काफी सहूलियत मिलती है।
ग्रामीण इलाकों में डीजल का दबदबा और इलेक्ट्रिक का गणित
ग्रामीण और देहात के क्षेत्रों में आज भी खरीदार डीजल से चलने वाले वाहनों पर सबसे ज्यादा भरोसा जताते हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, बोलेरो और स्कॉर्पियो जैसी मजबूत गाड़ियां ऊबड़-खाबड़ रास्तों, लंबी यात्राओं और भारी चढ़ाई वाले इलाकों के लिए बेहद मुफीद मानी जाती हैं। यही वजह है कि पहाड़ी क्षेत्रों में भी डीजल वाहनों को प्राथमिकता दी जाती है। दूसरी तरफ, इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर कुछ ग्राहकों के मन में अब भी हिचकिचाहट बनी हुई है। इसका प्रमुख कारण कई इलाकों में पर्याप्त चार्जिंग स्टेशनों की कमी होना है। इसलिए इलेक्ट्रिक कार की योजना बनाने से पहले खरीदारों को अपने शहर की स्थिति, रोजाना के रूट पर चार्जिंग की उपलब्धता, ड्राइविंग की आवश्यकता और बजट का बारीकी से आकलन कर लेना चाहिए।



















