देश भर में बिकने वाली नई पैसेंजर कारों के माइलेज को सुधारने और ऑटोमोबाइल उद्योग को कम कार्बन उत्सर्जन वाली तकनीकों की दिशा में मोड़ने के मकसद से केंद्र सरकार ने कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी (CAFE) मानकों में व्यापक फेरबदल की घोषणा की है। यह नया ढांचा 1 अप्रैल 2027 से औपचारिक रूप से प्रभावी होगा और 31 मार्च 2032 तक लागू रहेगा। इसके दायरे में आने वाले सभी वाहन निर्माताओं को अगले पांच वर्षों की निर्धारित मियाद के भीतर अपने पूरे यात्री वाहन बेड़े की औसत ईंधन दक्षता में तकरीबन 16.7 प्रतिशत का इजाफा करना अनिवार्य होगा। इस कदम का सीधा असर भारतीय बाजार में पेश होने वाले नए चार पहिया मॉडलों के डिजाइन, इंजन क्षमता और तकनीक पर पड़ेगा।
वर्षवार कड़े होंगे खपत के पैमाने
संशोधित रूपरेखा के अनुसार, वाहन कंपनियों के लिए निर्धारित औसत ईंधन खपत की सीमा को हर साल क्रमिक रूप से कठोर बनाया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2027-28 के दौरान कारों के लिए यह सीमा 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर तय की गई है। पांच साल की इस नियामक योजना के अंतिम चरण, यानी वित्तीय वर्ष 2031-32 तक, इस खपत सीमा को और घटाकर 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर पर लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, गणना में प्रयुक्त होने वाले मानक वाहन वजन को 1,082 किलोग्राम से बढ़ाकर 1,229 किलोग्राम कर दिया गया है। वजन के इस नए बेंचमार्क की वजह से हल्के वाहनों के निर्माताओं को मानक हासिल करने में कुछ सहूलियत होगी, जबकि भारी वजन वाले वाहनों को नियमों पर खरा उतरने के लिए अधिक सक्षम तकनीकी समाधान लागू करने होंगे।
हरित वाहनों और वैकल्पिक ईंधनों को विशेष प्रोत्साहन
नियमों का अनुपालन आसान बनाने के लिए ऑटो कंपनियों को कई तरह की आधुनिक तकनीकों के मिश्रण का उपयोग करने की स्वायत्तता दी गई है। बैटरी चालित इलेक्ट्रिक गाड़ियां (BEV), रेंज एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक वाहन, प्लग इन हाइब्रिड, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और फ्लेक्स फ्यूल मॉडल बेचने वाली कंपनियों को वॉल्यूम डेरोगेशन फैक्टर के तहत सुपर क्रेडिट की सुविधा मिलेगी। इस व्यवस्था के जरिए हरित और कम ईंधन खपत वाले मॉडलों की बिक्री से मिले क्रेडिट का इस्तेमाल निर्माता पारंपरिक पेट्रोल और डीजल मॉडलों के औसत उत्सर्जन अंतर को संतुलित करने में कर सकेंगे।
रिन्यूएबल ईंधनों और ईंधन बचत तकनीकों को मिली मान्यता
नए कैफे ढांचे में कार्बन न्यूट्रैलिटी फैक्टर को शामिल करके कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG), बायोफ्यूल और एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल जैसे कम कार्बन उत्सर्जक स्रोतों को भी महत्व दिया गया है। इसके साथ ही सरकार ने ईंधन बचाने वाली मान्यता प्राप्त तकनीकों की फेहरिस्त का दायरा 4 से बढ़ाकर 12 कर दिया है। प्रत्येक पात्र तकनीक के इस्तेमाल पर प्रति किलोमीटर 1 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड की राहत दी जा सकेगी, जिसकी कुल अधिकतम सीमा 9 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड प्रति किलोमीटर निर्धारित की गई है।
अनुपालन के लिए लचीली क्रेडिट व्यवस्था
ऑटोमोबाइल निर्माताओं को तय लक्ष्यों को पूरा करने में व्यावहारिक लचीलापन देने के लिए क्रेडिट प्रणाली को सुगम बनाया गया है। कंपनियां दो से तीन वर्षों के अंतराल में अपने समग्र लक्ष्यों का संतुलन बना सकती हैं। यदि कोई निर्माता तय सीमा से बेहतर प्रदर्शन करते हुए अतिरिक्त क्रेडिट हासिल करता है, तो वह उस क्रेडिट को आगामी वर्षों के लक्ष्यों में समायोजित करने के लिए आगे ले जा सकेगा।



















