अमेठी जिले में बेघर और जरूरतमंद लोगों को पक्की छत मुहैया कराने के मकसद से प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना का संचालन ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में तेजी से किया जा रहा है। जागरूकता की कमी के कारण अक्सर पात्र ग्रामीण आवेदन प्रक्रिया से वंचित रह जाते थे, लेकिन अब प्रशासन की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाकर पात्र परिवारों को इस योजना से जोड़ा जा रहा है।
चारों तहसीलों में सर्वे और लाभार्थियों की संख्या
अमेठी जिले की चारों प्रमुख तहसीलों मुसाफिरखाना, गौरीगंज, अमेठी और तिलोई में इस योजना का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। इन तहसीलों में अब तक 82 हजार से भी ज्यादा परिवारों को आवास योजना के तहत शामिल किया जा चुका है। जरूरतमंदों की पहचान के लिए जिला प्रशासन की ओर से नए सर्वे की प्रक्रिया लगातार जारी है।
परियोजना अधिकारी ऐश्वर्य यादव के मुताबिक वर्ष 2025 में पूरे जिले के भीतर 1 लाख 22 हजार लोगों का विस्तृत सर्वे कराया गया था। गहन पड़ताल के बाद इनमें से 99 हजार लोग योजना के लिए पूरी तरह पात्र पाए गए, जिन्हें सूची में शामिल कर लिया गया है। वहीं मानकों पर खरे न उतरने वाले 23 हजार अपात्र लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं ताकि केवल सही लाभार्थियों को ही इसका लाभ मिल सके।
आवास योजना के लिए तय की गई जरूरी पात्रता
सरकार ने योजना का लाभ पारदर्शी तरीके से वितरित करने के लिए कड़े नियम बनाए हैं। योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक के पास पहले से कोई पक्का मकान नहीं होना चाहिए। इसके अलावा आवेदक या उसके परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए। जिन लोगों ने पूर्व में किसी भी सरकारी आवास योजना का लाभ प्राप्त किया है, वे दोबारा इस योजना के तहत आवेदन नहीं कर सकते हैं।
आवेदन करने का तरीका और आवश्यक दस्तावेज
योजना में अपना नाम शामिल कराने के लिए जरूरतमंद ग्रामीण को अपने ग्राम प्रधान के माध्यम से आवेदन पत्र दाखिल करना होता है। आवेदन के समय आवेदक को अपने सभी जरूरी कागजात जमा कराने होते हैं। इसमें आधार कार्ड, राशन कार्ड, बैंक पासबुक की फोटोकॉपी, जमीन की खतौनी और एक चालू मोबाइल नंबर दर्ज कराना अनिवार्य है। इन दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही पात्र आवेदक का नाम आगे भेजा जाता है।
सत्यापन प्रक्रिया और पंचायत भवन में सूची का प्रदर्शन
लाभार्थियों के चयन में गड़बड़ी रोकने के लिए बहुस्तरीय जांच प्रक्रिया अपनाई जाती है। सबसे पहले सरकारी कर्मचारियों की टीम जमीनी स्तर पर जाकर उन लोगों की पहचान करती है जिनके पास रहने को घर नहीं है या जो दूसरी जगहों पर किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं। प्राथमिक सर्वे पूरा होने के बाद एक दूसरी टीम के जरिए दोबारा जांच कराई जाती है ताकि सर्वे की सटीकता सुनिश्चित की जा सके।
सत्यापन की यह दोहरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिन लोगों के नाम अंतिम सूची में जगह बनाते हैं, उनकी सूची संबंधित ग्राम पंचायत के पंचायत भवन में चस्पा कर दी जाती है। इस सार्वजनिक प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य गांव के सभी लोगों को पारदर्शी जानकारी देना है ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति छूट न पाए और अपात्र का नाम शामिल न हो।
कच्चे मकानों और मानसूनी दिक्कतों से मिली राहत
पक्के मकान का सपना पूरा होने से जिले के ग्रामीण इलाकों में खुशी का माहौल है। योजना का लाभ पाने वाले लाभार्थी रामधनी यादव ने बताया कि पहले उनके पास रहने के लिए पक्की छत नहीं थी और हर बरसात में घर के अंदर पानी भर जाने से पूरा परिवार बेहद परेशान रहता था। अब योजना से जुड़ने के बाद उनकी यह बड़ी समस्या हमेशा के लिए दूर हो गई है।
अमेठी जिले के बैसड़ा गांव की रहने वाली महिला लाभार्थी सीमा देवी ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने लगभग डेढ़ से दो साल पहले आवास योजना के लिए आवेदन दिया था। लंबी प्रक्रिया के बाद अब जाकर उन्हें पक्का मकान स्वीकृत हुआ है। उन्होंने कहा कि बारिश के दिनों में कच्चे घर में रहने से होने वाली तमाम तकलीफें अब खत्म हो जाएंगी और परिवार सुरक्षित छत के नीचे रह सकेगा।



















