उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बेटियों की बेहतर परवरिश और उनकी शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए महिला कल्याण विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का संचालन किया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाना और जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक उनके वित्तीय बोझ को कम करना है। मुरादाबाद जिले में भी इस योजना के तहत पात्र परिवारों को लाभान्वित किया जा रहा है, जिससे बेटियों का शैक्षणिक और सामाजिक भविष्य उज्ज्वल बन सके।
पात्रता के नियम और परिवारों के लिए जरूरी शर्तें
योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कुछ स्पष्ट मानक तय किए हैं। जिला परिवीक्षा अधिकारी मोनिका राणा के अनुसार, यह महिला कल्याण विभाग की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना है। योजना के अंतर्गत एक परिवार में अधिकतम दो बच्चों (बेटियों) को ही आर्थिक सहायता दी जा सकती है। हालांकि, यदि किसी परिवार में दूसरी डिलीवरी के दौरान जुड़वां बेटियां पैदा होती हैं, तो ऐसी स्थिति में उस परिवार की तीनों बेटियों को योजना का पूरा लाभ प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, लाभार्थी परिवार की कुल वार्षिक आय 3 लाख रुपये से कम होनी अनिवार्य है।
6 चरणों में मिलने वाली 25,000 रुपये की वित्तीय सहायता
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत कुल 25,000 रुपये की धनराशि निर्धारित की गई है। यह राशि लाभार्थी बालिका को एकमुश्त देने के बजाय छह अलग-अलग चरणों में प्रदान की जाती है
- प्रथम चरण: बालिका के जन्म के समय 5,000 रुपये दिए जाते हैं।
- द्वितीय चरण: बालिका का संपूर्ण टीकाकरण पूरा होने पर 2,000 रुपये की राशि मिलती है।
- तृतीय चरण: कक्षा 1 में प्रवेश लेने पर बालिका को 3,000 रुपये दिए जाते हैं।
- चतुर्थ चरण: कक्षा 6 में दाखिला लेने पर 3,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है।
- पंचम चरण: कक्षा 9 में प्रवेश पाने पर 5,000 रुपये की राशि प्रदान की जाती है।
- षष्ठम चरण: कक्षा 10 पास करने के बाद इंटरमीडिएट या किसी मान्यता प्राप्त डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लेने पर 7,000 रुपये दिए जाते हैं।
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज
यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन मोड पर आधारित है। योजना में आवेदन करने के लिए कुछ प्रमुख दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। यदि बालिका कक्षा 1, 6, 9 या डिप्लोमा पाठ्यक्रम में अध्ययनरत है, तो उसके स्कूल का अध्ययन प्रमाण पत्र, बालिका का आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण तथा माता-पिता का वैध आय प्रमाण पत्र संलग्न करना होता है।
सत्यापन और डीबीटी से बैंक खाते में भुगतान
आवेदन प्राप्त होने के बाद उसकी गहन जांच की जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले आवेदनों का सत्यापन ब्लॉक स्तर पर किया जाता है, जबकि शहरी क्षेत्रों से प्राप्त आवेदनों को एसडीएम पोर्टल के माध्यम से सत्यापित किया जाता है। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवेदन पत्र जिला परिवीक्षा अधिकारी के कार्यालय में आते हैं। वहां से अंतिम सत्यापन के बाद इन्हें मुख्य कार्यालय में अग्रसारित कर दिया जाता है। इसके बाद स्वीकृत धनराशि सीधे डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए लाभार्थी बालिका के बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी जाती है।



















