मुरादाबाद में पति के निधन के बाद आर्थिक रूप से कमजोर और बेसहारा महिलाओं को संबल देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक विशेष कल्याणकारी पहल संचालित की जा रही है। इस योजना को पति की मृत्यु उपरांत निराश्रित महिला पेंशन योजना के रूप में जाना जाता है, जिसे आम बोलचाल में विधवा पेंशन योजना भी कहते हैं। इस योजना के तहत पत्र महिलाओं को सरकार की तरफ से हर महीने 1000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह सहायता राशि सीधे लाभार्थी महिला के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है.
योजना के लाभ और वित्तीय सहायता की रूपरेखा
खाते में सीधे पैसे पहुंचने के कारण महिलाओं को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ती है। अगर यह सहायता राशि तीन महीने की एकमुश्त भेजी जाती है, तो यह 3000 रुपये की किस्त के रूप में सीधे बैंक खाते में जमा होती है। इस पूरी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य जीवनसाथी को खोने के बाद आर्थिक तंगी का सामना कर रही महिलाओं को एक नियमित सहारा देना है, ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकें और किसी अन्य व्यक्ति पर पूरी तरह निर्भर रहने को मजबूर न हों.
पात्रता और जरूरी दस्तावेज
महिला कल्याण विभाग में जिला परिवीक्षा अधिकारी के रूप में तैनात मोनिका राणा ने इस योजना के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि महिला कल्याण विभाग द्वारा चलाई जा रही इस विधवा पेंशन योजना का लाभ उन महिलाओं को मिलता है जिनके पति जीवित नहीं हैं। इस योजना का आवेदन करने के लिए महिला की आयु कम से कम 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। इसके साथ ही कुछ अहम दस्तावेजों का होना भी अनिवार्य है, जिनमें आधार कार्ड, बैंक पासबुक, पति का मृत्यु प्रमाण पत्र और 2 लाख रुपये से कम वार्षिक आय का आय प्रमाण पत्र शामिल है.
आवेदन और सत्यापन की पूरी प्रक्रिया
जरूरी दस्तावेजों को तैयार करने के बाद कोई भी योग्य महिला नजदीकी जन सुविधा केंद्र पर जाकर इस योजना के लिए आसानी से आवेदन कर सकती है। आवेदन प्रक्रिया के बारे में बताते हुए अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि आवेदक महिला ग्रामीण इलाके से ताल्लुक रखती है, तो उसका फॉर्म वीडीओ के पोर्टल पर भेजा जाता है। वहीं, यदि महिला तहसील क्षेत्र से है, तो आवेदन एसडीएम के पोर्टल पर अग्रसारित किया जाता है। इसके बाद संबंधित वीडीओ या एसडीएम स्तर पर दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कराया जाता है। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद फाइल महिला कल्याण विभाग के पास पहुंचती है, जहां से इसे सीधे लखनऊ भेजा जाता है। लखनऊ से मंजूरी मिलने के बाद हर महीने 1000 रुपये की राशि त्रैमासिक किस्तों यानी तीन-तीन महीने के अंतराल पर जारी की जाती है। इस प्रकार सालभर में कुल 12000 रुपये की आर्थिक सहायता उस महिला के खाते में पहुंचती है.



















