कबाड़ बेचकर सरकार ने कमाए 6000 करोड़ रुपये, दिल्ली एयरपोर्ट के 21 टर्मिनल-3 जितनी जगह खालीभोजपुरी बवाल में मल्लिका शेरावत से फ्लर्ट करते दिखे तेज प्रताप यादव, भविष्य बताते ही शर्मा गईं एक्ट्रेसदिल्ली की जिला अदालतों में खाली पड़े हैं हजारों पद, आखिर क्यों लग रही हैं मुकदमों में तारीखेंअलवर के होटल में नाबालिग के मिलने पर हंगामा, महिला संगठनों के पहुंचने से मचा बवालनीट पीजी 2026 एडमिट कार्ड आज होंगे जारी, परीक्षा हॉल में तकनीकी खराबी आने पर लागू हैं खास नियमतुरई और मूंग दाल की यह नई रेसिपी बदल देगी खाने का स्वाद, जानिए बनाने का आसान तरीकापलामू के चेड़ाबार गांव में जैविक विधि और ग्राफ्टिंग से टमाटर उगा रही हैं कुंती देवी, कम लागत में बेहतर पैदावार की जगी आसमौलाना फजलुर रहमान का आसिम मुनीर पर बड़ा हमला, कहा- 1971 के सरेंडर जैसा दोहराया जा रहा इतिहासफूलगोभी की अगेती खेती से किसानों की होगी तगड़ी कमाई, जानिए उन्नत किस्मों और सही तकनीक की पूरी जानकारीमूलांक 3 राशिफल 24 अगस्त 2026: रिश्तों में बढ़ेगी मिठास और सूझबूझ से सुलझेंगे सभी उलझे मामले
बिहार में बाढ़ का मंडराया खतरा, सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री से फरक्का बैराज के गेट खोलने की लगाई गुहारबिहार
24 अग॰ 2026, 7:49 am (2 घंटे पहले)· 2

बिहार में बाढ़ का मंडराया खतरा, सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री से फरक्का बैराज के गेट खोलने की लगाई गुहार

उत्तर भारत में भारी बारिश के कारण गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे बिहार के निचले इलाकों में बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इसी स्थिति से निपटने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से फोन पर बात कर फरक्का बैराज के सभी गेट खोलने का आग्रह किया है।

उत्तर भारत के कई हिस्सों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते गंगा नदी का जलस्तर काफी ऊपर पहुंच गया है। नदी के बढ़ते जलस्तर ने बिहार के कई निचले और संवेदनशील इलाकों में बाढ़ का बड़ा खतरा खड़ा कर दिया है। इस आपदा से निपटने और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इसी सिलसिले में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से रविवार को फोन पर विशेष बातचीत की। बातचीत के दौरान उन्होंने अनुरोध किया कि फरक्का बैराज के सभी द्वारों को तुरंत खोला जाए ताकि पानी का बहाव सुगम हो सके और बिहार को बाढ़ की विभीषिका से बचाया जा सके।

एक्स पर साझा की जानकारी

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से इस टेलीफोनिक बातचीत की पूरी जानकारी साझा की। उन्होंने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि गंगा नदी का जलस्तर जिस तेजी से ऊपर आ रहा है, उससे बिहार के निवासियों पर संकट गहराता जा रहा है। इसी गंभीर परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री से यह आपातकालीन अनुरोध किया गया है। बैराज के फाटकों को खोलने से नदी के पानी का बहाव आगे की तरफ सुगम हो जाएगा, जिससे बिहार के प्रभावित क्षेत्रों में जलस्तर को नियंत्रित करने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी।

पश्चिम बंगाल की तरफ से मिला त्वरित कार्रवाई का भरोसा

सम्राट चौधरी ने मीडिया को जानकारी दी कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उनके अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस पूरे मामले पर फौरन एक्शन लेने और त्वरित कार्रवाई करने का पूरा आश्वासन दिया है। बिहार के मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य के नागरिकों की सुरक्षा करना और समय पर राहत कार्य चलाना उनकी सरकार की सबसे पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों को भी लगातार स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी अनहोनी से समय रहते निपटा जा सके।

फरक्का बैराज संधि पर जेडीयू सांसद की आपत्ति

इस बीच, जनता दल यूनाइटेड के सांसद संजय झा ने भारत और बांग्लादेश के बीच साल 1996 में हुई फरक्का बैराज संधि को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि इस संधि के नवीनीकरण को लेकर जब भी कोई नया निर्णय लिया जाए, तो उससे पहले बिहार राज्य के हितों को प्राथमिकता के साथ ध्यान में रखा जाना चाहिए। संजय झा ने पुरानी परिस्थितियों को याद करते हुए कहा कि जब 1996 में इस समझौते पर मुहर लगी थी, तब बिहार के हितों की अनदेखी कर दी गई थी और उस समय के घटनाक्रम में बिहार के अधिकारों के साथ समझौता किया गया था।

दिसंबर में पूरे हो रहे हैं संधि के तीस साल

सांसद संजय झा ने आगे बताया कि यह ऐतिहासिक संधि इसी साल दिसंबर के महीने में अपने तीस साल पूरे करने जा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार के सामने यह पुरजोर मांग रखी है कि इस संधि को आगे रिन्यू करने से पहले बिहार के तमाम हितों और चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि बिना राज्य की सहमति और भलाई को परखे इस पर कोई चर्चा या फैसला आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर बिहार की जनता और यहां के भौगोलिक हालातों पर पड़ता है।

गंगा जल संधि और तीस्ता नदी के अनसुलझे मुद्दे

गौर करने वाली बात यह है कि भारत और बांग्लादेश कुल 54 नदियों का साझा इस्तेमाल करते हैं, और साल 1996 की गंगा जल संधि मुख्य रूप से फरक्का बैराज पर शुष्क मौसम के दौरान पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है। दोनों देशों के बीच कई दौर की उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बातचीत हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद तीस्ता नदी के जल बंटवारे का पेंच आज भी पूरी तरह अनसुलझा है। साल 1911 में एक समझौते का प्रस्ताव सामने आया था जिसके तहत तीस्ता नदी के कुल पानी का 42.5 प्रतिशत हिस्सा भारत को और 37.5 प्रतिशत हिस्सा बांग्लादेश को आवंटित किया जाना था, जबकि बाकी बचे हिस्से को अन्य जरूरी बातों के तहत तय किया जाना था। हालांकि, पश्चिम बंगाल सरकार के कड़े विरोध के चलते वह प्रस्ताव धरातल पर लागू नहीं हो सका था।

ये भी पढ़ें

सवाल-जवाब

सम्राट चौधरी ने किस से बात की है?
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से फोन पर बातचीत की है।
फरक्का बैराज के गेट खोलने की मांग क्यों की गई है?
उत्तर भारत में भारी बारिश के चलते गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने और बिहार में बाढ़ का खतरा पैदा होने के कारण गेट खोलने की मांग की गई है।
फरक्का बैराज संधि कब हुई थी?
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल संधि साल 1996 में हुई थी और इस दिसंबर में इसके 30 साल पूरे होने वाले हैं।
संजय झा ने संधि को लेकर क्या चिंता जताई है?
जेडीयू सांसद संजय झा ने मांग की है कि इस संधि का नवीनीकरण करने से पहले बिहार के हितों को प्राथमिकता से ध्यान में रखा जाना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

यह संकट केवल एक तात्कालिक जल प्रबंधन का मुद्दा नहीं है, बल्कि अंतर-राज्यीय समन्वय और दीर्घकालिक नीतिगत सुधारों की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। फरक्का बैराज के फाटकों को तुरंत खोलने से निचले इलाकों में पानी का दबाव तो कम होगा, लेकिन आने वाले दिसंबर में 1996 की गंगा जल संधि के तीस साल पूरे होने से पहले बिहार के हितों को प्राथमिकता देना अनिवार्य हो गया है। केंद्र, बिहार और पश्चिम बंगाल को मिलकर एक ऐसा स्थायी तंत्र विकसित करना होगा जिससे हर मानसूनी सीजन में बाढ़ की विभीषिका से बचा जा सके और क्षेत्रीय राजनीति से ऊपर उठकर जनसुरक्षा को सर्वोपरि रखा जाए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

यह प्रशासनिक और अंतर-राज्यीय समन्वय का सीधा मामला है जहाँ जनसुरक्षा सबसे ऊपर है। हालांकि बैराज के गेट खोलने से तात्कालिक राहत मिल सकती है, लेकिन दिसंबर में समाप्त हो रही 1996 की फरक्का संधि के नवीनीकरण से पहले नीतिगत स्तर पर पुख्ता कानूनी और तकनीकी सुरक्षा कवच तैयार करना होगा ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR