बिहार में सड़क बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य के पहले एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेसवे, पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के निर्माण की दिशा में काम बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस समय इस परियोजना के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण से संबंधित सर्वेक्षण का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा हो जाने के बाद राजधानी पटना से पूर्णिया के बीच की दूरी घटकर महज 282 किलोमीटर रह जाएगी। इस दूरी को यात्री केवल 3 घंटे में आसानी से पूरा कर सकेंगे। इससे न केवल यात्रा का समय बचेगा, बल्कि पूरे इलाके में औद्योगिक गतिविधियों और व्यापारिक लेन-देन को भी एक नया पंख मिलेगा। भौगोलिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो नेपाल और बांग्लादेश की सीमाओं के बेहद करीब होने के कारण सामरिक और सुरक्षा के लिहाज से भी इस एक्सप्रेसवे का महत्व बहुत अधिक माना जा रहा है। हालांकि, इस बड़ी विकास परियोजना के बीच एक गंभीर समस्या भी उभरकर सामने आ रही है। परियोजना के लिए जिन किसानों और जमीन मालिकों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है, वे मुआवजे की कम दरों को लेकर काफी असंतुष्ट और चिंतित दिखाई दे रहे हैं।
मुआवजे की दरों पर किसानों का विरोध और उनकी चिंताएं
इस परियोजना को लेकर एक तरफ जहां सरकार और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) इसे बिहार के समग्र विकास का नया केंद्र बिंदु मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अपनी पैतृक भूमि गंवाने वाले किसानों के बीच भारी नाराजगी है। किसानों का सीधा आरोप है कि खुले बाजार में उनकी जमीनों की कीमतें कई गुना बढ़ चुकी हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा उन्हें जो मुआवजा दिया जा रहा है, वह अत्यंत पुराने मूल्यांकन के आधार पर तय किया जा रहा है। किसानों का मानना है कि इस तरह की तेज रफ्तार विकास यात्रा में उनके हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए और उन्हें उचित व न्यायसंगत मुआवजा मिलना चाहिए।
इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई पूर्णिया से पटना के बीच लगभग 245 किलोमीटर आंकी गई है, जिसे पूरा करने में महज 3 घंटे का समय लगेगा। यह एक पूरी तरह से एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेसवे होगा, जहां वाहनों को अधिकतम 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की अनुमति होगी। यात्रा को सुगम बनाने के लिए पूरे मार्ग में कुल 21 कनेक्टिविटी पॉइंट दिए जाएंगे, जिसमें से अकेले पूर्णिया जिले के भीतर ही 8 कनेक्टिविटी पॉइंट बनाए जाएंगे। इनमें बनमनखी और सुखसेना नामक दो महत्वपूर्ण स्थानों पर MDR कनेक्टिविटी की सुविधा दी जाएगी, जिससे आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों का भी तेज गति से विकास सुनिश्चित हो सकेगा।
लेकिन इन सबके बीच अपनी जमीन खोने वाले रैयतों के चेहरों पर मायूसी छाई हुई है। किसानों का कहना है कि बिहार में अब तक वर्ष 2014 के MVR के आधार पर ही जमीन का मूल्यांकन किया जा रहा था। अब जब सरकार ने नई दरें घोषित की हैं, तो उसमें ग्रामीण इलाकों की जमीन के रेट में केवल 1.6 प्रतिशत की मामूली वृद्धि की गई है। किसानों का तर्क है कि साल 2014 से लेकर अब तक के समय में जमीन की वास्तविक बाजार दरें 25 से लेकर 40 गुना तक बढ़ चुकी हैं। ऐसे में सरकार द्वारा तय की गई यह मुआवजा नीति उनके साथ एक बड़ा धोखा है।
NHAI द्वारा कार्य की गति और सरकारी तैयारियां
इस विशाल बुनियादी ढांचा परियोजना के तहत नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया बिहार को कई अन्य सौगातें भी दे रहा है। एक तरफ जहां खगड़िया से पूर्णिया के बीच स्थित नेशनल हाईवे 31 यानी NH 31 को फोरलेन में बदलने का काम जोर-शोर से चल रहा है, वहीं पूर्णिया-पटना एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेसवे 9 के निर्माण की प्रक्रिया भी समांतर रूप से आगे बढ़ रही है। NHAI के पूर्णिया प्रक्षेत्र के परियोजना निदेशक प्रवीण कुमार कटियार ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उनके अनुसार, इस नए एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण से संबंधित सर्वे का काम बहुत तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इसके लिए आवश्यक 3A कैपिटल गजट की प्रक्रिया पहले ही संपन्न हो चुकी है। वर्तमान में भूमि का भौतिक सर्वेक्षण करने और उसकी जांच करने के बाद मौके पर पीलिंग का काम भी शुरू कर दिया गया है। विभाग की योजना है कि बहुत जल्द ही इस परियोजना के लिए 3D गजट का प्रकाशन कर दिया जाएगा, जिसके तुरंत बाद प्रभावित रैयतों को उनके मुआवजे की राशि वितरित करने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
औद्योगिक विकास, विमान सेवा और एयरोसिटी का नया हब
इस बुनियादी ढांचा परियोजना पर अपने विचार साझा करते हुए बिहार सरकार के भू राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे का जमीनी काम अब धरातल पर दिखने लगा है। इस सड़क के निर्माण से इस पूरे क्षेत्र के आर्थिक परिदृश्य में एक अभूतपूर्व क्रांति आएगी। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि पूर्णिया में अब हवाई यात्रा की सेवाएं शुरू हो चुकी हैं और भविष्य में इस नवनिर्मित एक्सप्रेसवे को सीधे पूर्णिया एयरपोर्ट से जोड़ा जाएगा।
मंत्री ने बताया कि पूर्णिया एयरपोर्ट तक जाने वाली सड़क के किनारे एक आधुनिक एयरोसिटी का निर्माण किया जाएगा। इस एयरोसिटी के भीतर बड़े और भव्य मॉल, मनोरंजन के लिए पार्क और अन्य आधुनिक नागरिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जो पूरे बिहार के लिए एक बड़ा आकर्षण साबित होंगी। आने वाले समय में पूर्णिया को एक आधुनिक सैटलाइट टाउनशिप के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे इस सीमावर्ती क्षेत्र के निवासियों का जीवन स्तर काफी बेहतर होगा।
वर्तमान यात्रा मार्गों की तुलना और उचित मुआवजे का संतुलन
इस नए एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद पटना और पूर्णिया के बीच की दूरी और समय में भारी कटौती होने वाली है। वर्तमान समय में यदि कोई व्यक्ति पूर्णिया से खगड़िया होते हुए पटना जाता है, तो उसे लगभग 310 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है, जिसमें औसतन 7 घंटे का लंबा समय लग जाता है। इसके अलावा, यदि कोई दूसरा वैकल्पिक मार्ग चुना जाए, जैसे पूर्णिया से अररिया, दरभंगा होते हुए फोरलेन के रास्ते पटना जाना, तो कुल दूरी बढ़कर 360 किलोमीटर हो जाती है।
लेकिन इस नए और सीधे पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के चालू हो जाने के बाद यह पूरी यात्रा सिमटकर केवल 3 घंटे की रह जाएगी। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पास होने के कारण इस मार्ग का सैन्य और रणनीतिक उपयोग भी काफी बढ़ जाएगा। हालांकि, इस व्यापक क्षेत्रीय विकास की सफलता तभी पूर्ण मानी जाएगी जब अपनी बहुमूल्य जमीन देने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय किसानों को बाजार दरों के अनुरूप सही मुआवजा मिले, ताकि विकास की इस चमक में वे खुद को ठगा हुआ महसूस न करें।













