बिहार में अश्लील, द्विअर्थी और जातिसूचक गानों पर कसेगा शिकंजा, सम्राट सरकार ने तैयार किया रोक का खाकाbihar
3 घंटे पहले· 0

बिहार में अश्लील, द्विअर्थी और जातिसूचक गानों पर कसेगा शिकंजा, सम्राट सरकार ने तैयार किया रोक का खाका

बिहार की सम्राट सरकार सार्वजनिक आयोजनों में बजने वाले अश्लील, द्विअर्थी और जातिसूचक गानों पर रोक लगाने जा रही है। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग ने गृह विभाग को पत्र लिखकर ऐसे गीतों के प्रसारण पर नियंत्रण और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

बिहार में अब शादी-ब्याह से लेकर जुलूस और मेलों तक, जहाँ-तहाँ बजने वाले अश्लील और द्विअर्थी गीतों के दिन लदने वाले हैं। राज्य की सम्राट सरकार ऐसे गानों के साथ-साथ जातिसूचक गीतों पर भी सख्ती बरतने की तैयारी कर रही है। इसी कड़ी में कला, संस्कृति एवं युवा विभाग ने गृह विभाग को एक पत्र भेजकर ठोस कदम उठाने का अनुरोध किया है।

विभाग ने गृह विभाग से क्या माँगा

पत्र में साफ कहा गया है कि ऐसे गीतों के सार्वजनिक प्रसारण और कार्यक्रमों में बजाए जाने पर रोक लगे। इतना ही नहीं, जो लोग नियम तोड़ें उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाए। विभाग का कहना है कि गृह विभाग सार्वजनिक स्थलों, आयोजनों और दूसरे माध्यमों से इन गीतों के प्रसारण को नियंत्रित करने के लिए जरूरी इंतजाम करे, ताकि समाज में सकारात्मक और स्वस्थ माहौल बना रहे।

क्यों उठी यह बात

विभाग का आकलन है कि बीते कुछ बरसों में अश्लील और द्विअर्थी गानों का चलन तेजी से बढ़ा है। शादी-समारोह, जुलूस, मेले और दूसरे सार्वजनिक आयोजन ऐसे ही गीतों से गूँजते रहते हैं। विभाग मानता है कि इनका समाज पर अच्छा असर नहीं पड़ रहा। इन गानों के बोल और शब्द कई बार लोगों की भावनाओं को चोट पहुँचाते हैं और इससे सामाजिक माहौल बिगड़ता है।

सबसे बड़ी चिंता जातिसूचक गीतों को लेकर है। सरकार का मानना है कि ऐसे गीत समाज में आपसी तनाव और वैमनस्य की आग भड़का सकते हैं, जिससे सौहार्द और भाईचारे की भावना को सीधा नुकसान पहुँचता है। पत्र में यह भी रेखांकित किया गया है कि अश्लील और द्विअर्थी गीतों का महिलाओं और बच्चों पर नकारात्मक असर पड़ता है। सार्वजनिक जगहों पर जब ऐसे गाने बजते हैं तो कई लोग असहज महसूस करते हैं और इससे पूरा सामाजिक एवं सांस्कृतिक वातावरण प्रभावित होता है।

लोक संस्कृति की गरिमा का सवाल

विभाग ने अपने पत्र में बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं को भी याद दिलाया है। उसका कहना है कि राज्य की लोक कलाएँ, लोक गीत और क्षेत्रीय भाषाएँ ही बिहार की असली पहचान हैं। ऐसे में अश्लील और आपत्तिजनक गीतों के बढ़ते चलन से इस विरासत की गरिमा पर आँच आ सकती है।

सिर्फ संस्कृति नहीं, गंभीर सामाजिक मुद्दा

सरकार इसे महज सांस्कृतिक मामला नहीं मानती। उसका कहना है कि यह एक गंभीर सामाजिक मुद्दा भी है, इसलिए इस पर प्रभावी रोक लगाना जरूरी हो गया है। समाज में स्वस्थ माहौल बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी बताते हुए विभाग ने जोर दिया है कि इस दिशा में अभी से जरूरी कदम उठाने की आवश्यकता है। यही वजह है कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात भी पत्र में दर्ज है।

सवाल-जवाब

बिहार सरकार किन गानों पर रोक लगाना चाहती है?
सरकार अश्लील, द्विअर्थी और जातिसूचक गानों के सार्वजनिक प्रसारण और कार्यक्रमों में बजाए जाने पर रोक लगाना चाहती है।
यह प्रस्ताव किस विभाग ने भेजा है?
कला, संस्कृति एवं युवा विभाग ने गृह विभाग को पत्र भेजकर ऐसे गीतों पर नियंत्रण और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
सरकार को ऐसे गानों से क्या आपत्ति है?
सरकार का मानना है कि ये गीत सामाजिक माहौल बिगाड़ते हैं, महिलाओं और बच्चों पर नकारात्मक असर डालते हैं और जातिसूचक गीत आपसी तनाव व वैमनस्य बढ़ा सकते हैं।
नियम तोड़ने वालों के साथ क्या होगा?
पत्र में नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
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