सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों को चुनने वाली समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी सीजेआई की गैरमौजूदगी पर केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि चुनाव आयोग जैसी संस्था के लिए सिर्फ निष्पक्ष होना काफी नहीं, निष्पक्ष दिखना भी उतना ही जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को न सिर्फ स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए, बल्कि उसका काम करने का तरीका भी स्वतंत्र दिखना चाहिए। अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि जब संसद ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा कानून बनाया, तो उस वक्त चयन पैनल में भारत के मुख्य न्यायाधीश को क्यों नहीं रखा गया। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता का दिखना जरूरी नहीं समझा गया। सुप्रीम कोर्ट के इस सवाल को चुनाव आयोग की साख और उसकी स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जा रहा है।
चयन समिति में फिलहाल कौन शामिल है
अभी जो समिति मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को चुनती है, उसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। सुप्रीम कोर्ट का सवाल यही था कि जब समिति की अगुवाई प्रधानमंत्री कर रहे हैं, तो उसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश को जगह क्यों नहीं दी गई। अदालत के मुताबिक, चुनाव जैसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निगरानी करने वाली संस्था के प्रमुख पदों पर नियुक्ति करने वाली समिति में एक निष्पक्ष और स्वतंत्र नजरिया शामिल होना चाहिए।
केंद्र सरकार का पक्ष और अदालत में बहस
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलील रखते हुए मौजूदा चयन प्रक्रिया का बचाव किया। सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच इस मुद्दे पर अदालत में तीखी बहस हुई। सरकार की दलील थी कि सिर्फ इस आधार पर मौजूदा व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। हालांकि सुप्रीम कोर्ट संतुष्ट नहीं दिखा और उसने केंद्र सरकार से इस बारे में जवाब मांगा है कि चयन समिति से मुख्य न्यायाधीश को बाहर क्यों रखा गया।
यह मामला अहम क्यों है
चुनाव आयोग जैसी संस्था पर किसका नियंत्रण होना चाहिए, यह सवाल लंबे समय से बहस का विषय रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया सीधे तौर पर तय करती है कि यह संस्था कितनी स्वतंत्र रूप से काम कर पाएगी। मौजूदा समय में ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब चयन प्रक्रिया को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अब यह देखना अहम होगा कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के सवालों का किस तरह जवाब देती है और क्या इसके बाद चयन प्रक्रिया में कोई बदलाव आता है।



















