सीकर और पूरे शेखावाटी अंचल में सर्दी के मौसम में तापमान का शून्य के करीब पहुंच जाना, पाला पड़ना और सिंचाई के लिए भूमिगत जल की कमी होना किसानों के लिए सबसे बड़ा संकट रहा है. मौसम के अनपेक्षित बदलावों और सूखे के बीच फसलों के खराब होने का डर हमेशा बना रहता है. इसी गंभीर समस्या का व्यावहारिक समाधान निकालते हुए फतेहपुर कृषि अनुसंधान केंद्र ने रबी सीजन के लिए विशेष रूप से विकसित उन्नत किस्मों के बीज उपलब्ध कराने की शुरुआत की है. यह पहल उन काश्तकारों के लिए बेहद मददगार साबित हो सकती है जो प्रतिकूल मौसम में भी सुरक्षित और बेहतर पैदावार हासिल करना चाहते हैं.
शेखावाटी की कठोर जलवायु के अनुकूल तैयार की गई किस्में
भौगोलिक दृष्टि से शेखावाटी की मिट्टी और जलवायु परिस्थितियां राज्य के बाकी हिस्सों से काफी भिन्न हैं. सर्दियों के दौरान यहां रात का तापमान सामान्य से काफी नीचे गिर जाता है, जिससे पाले का सीधा असर खड़ी फसलों पर पड़ता है. इसके अलावा भूजल स्तर में भारी गिरावट के कारण कई इलाकों में सिंचाई के लिए सीमित पानी ही उपलब्ध रहता है. इन दोहरी चुनौतियों को ध्यान में रखकर फतेहपुर कृषि अनुसंधान केंद्र ने चना, जौ, तारामीरा और मेथी की ऐसी खास किस्में किसानों को मुहैया कराई हैं, जो कड़ाके की सर्दी, पाले और कम पानी की स्थिति में भी सूखने के बजाय मजबूत खड़ी रहती हैं.
कृषि अनुसंधान केंद्र के फार्म प्रभारी एवं सहायक प्रोफेसर झूमरलाल ने बताया कि यहां तैयार और उपलब्ध कराई जा रही किस्मों का चयन इस अंचल की जलवायु और मौसम की वास्तविक चुनौतियों को परखने के बाद किया गया है. फार्म प्रभारी सहायक प्रोफेसर झूमरलाल के अनुसार, इन किस्मों का मूल उद्देश्य सीमित पानी और शुष्क माहौल में भी उत्पादन की संभावनाओं को टिकाऊ बनाना है ताकि किसानों को अप्रत्याशित मौसमी उतार-चढ़ाव से भारी आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े.
ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग के नियम
अक्सर किसानों को उन्नत बीजों की तलाश में निजी दुकानों और बाजारों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जहां उन्हें महंगे दामों पर बीज खरीदने को मजबूर होना पड़ता है. अनुसंधान केंद्र पर यह पूरी प्रक्रिया सरकारी नियंत्रण में और निर्धारित रियायती दरों पर संचालित की जा रही है. बीजों का वितरण 'पहले आओ, पहले पाओ' के सिद्धांत पर किया जा रहा है ताकि पारदर्शी तरीके से जरूरतमंद किसानों तक सामग्री पहुंच सके.
बीज प्राप्त करने के लिए किसानों को दोनों तरह की सहूलियत दी गई है. ऑनलाइन पंजीकरण कराने के इच्छुक काश्तकार श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के आधिकारिक सीड पोर्टल का इस्तेमाल कर सकते हैं. वहीं, जो किसान सीधे केंद्र पहुंचकर ऑफलाइन प्रक्रिया के जरिए बीज लेना चाहते हैं, उन्हें अपने आधार कार्ड और मोबाइल नंबर के विवरण जमा कराने होंगे.
तीन दिन की उठाव मियाद और बीजों की आधिकारिक दरें
पंजीकरण या बुकिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसानों को केंद्र से बीज उठाने के लिए निश्चित समय सीमा का ध्यान रखना जरूरी है. नियमों के अनुसार, बुकिंग कराने के तीन दिन के भीतर केंद्र पहुंचकर बीजों का भौतिक उठाव करना अनिवार्य है. ऐसा न करने पर आवंटन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, इसलिए बुवाई की योजना के मुताबिक ही काश्तकारों को समय पर अपना पंजीकरण कराने की सलाह दी गई है.
अनुसंधान केंद्र पर फसल और किस्म के आधार पर दरें निर्धारित की गई हैं. जौ की उन्नत किस्म ज्योति आरडी 2786 का बीज 40 रुपए की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है. इसी तरह तारामीरा की आरटीएम 1624 किस्म 90 रुपए और चने की जीएनजी 1581 किस्म भी 90 रुपए में मिल रही है. सुगंधित और मसाला फसल मेथी की आरएमपी 354 किस्म के बीज की कीमत 110 रुपए तय की गई है. किसान अपनी जोत और आवश्यकता के अनुसार केंद्र से ये प्रमाणित बीज खरीद सकते हैं.



















