इंडियन आर्मी की नई वर्दी नियमावली: बंडी जैकेट को मंजूरी, परेड में तलवार और औपनिवेशिक निशानों को विदाईbihar
4 घंटे पहले· 0

इंडियन आर्मी की नई वर्दी नियमावली: बंडी जैकेट को मंजूरी, परेड में तलवार और औपनिवेशिक निशानों को विदाई

भारतीय सेना ने 'आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026' के तहत वर्दी और ग्रूमिंग के नियमों में बड़ा फेरबदल किया है — अधिकारी अब बंडी जैकेट पहन सकेंगे, परेड में तलवार लेकर चलना अनिवार्य नहीं रहा और 'रॉयल' जैसे ब्रिटिश दौर के कई प्रतीक हटा दिए गए हैं।

भारतीय सेना अपनी वर्दी और साज-सज्जा से जुड़ी परंपराओं को नए सिरे से गढ़ रही है। 'आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026' नाम से आई नई नियमावली में कई ऐसे प्रावधान बदल दिए गए या पूरी तरह हटा दिए गए हैं, जिन्हें बरसों से ब्रिटिश शासन की निशानी माना जाता रहा। सेना के मुताबिक इस कवायद का असल मकसद भारतीय सैन्य विरासत को कायम रखते हुए वर्दी और नियमों को देश की मौजूदा पहचान और आज की व्यावहारिक जरूरतों के साँचे में ढालना है।

पहली बार औपचारिक वर्दी का हिस्सा बनी बंडी जैकेट

TrendKia की रिपोर्ट के अनुसार, 174 पन्नों की इस नियमावली में सबसे चर्चित बदलाव यही है कि अधिकारी अब औपचारिक पोशाक के साथ बंद गले वाली बंडी जैकेट पहन सकेंगे। यह पहला मौका है जब किसी पारंपरिक भारतीय परिधान को सेना ने अपनी औपचारिक ड्रेस में जगह दी है। अधिकारियों को बंदगला, लाउंज सूट, कॉम्बिनेशन ड्रेस या टाई के साथ पहनी जाने वाली औपचारिक शर्ट-पैंट — इन सबके साथ बंडी पहनने की छूट है। हालाँकि इसका रंग और डिजाइन मनमाने नहीं होंगे; कुछ तय मानक रखे गए हैं ताकि वर्दी की गरिमा बरकरार रहे।

परेड में अब तलवार और पाउच बेल्ट जरूरी नहीं

समारोहों और परेड से जुड़ी कई पुरानी बंदिशें भी ढीली की गई हैं। परेड का निरीक्षण करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के लिए अब तलवार थामे चलना अनिवार्य नहीं रह गया है। इसी तरह, कई औपचारिक ड्रेस श्रेणियों में चलन वाली पारंपरिक पाउच बेल्ट को भी हटा दिया गया है। हाँ, कुछ खास रेजिमेंटल और कोर समारोहों में इसे पहले की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा।

सभी रैंकों के लिए नई जाड़े की वर्दी 'ड्रेस 3B'

सेना ने हर रैंक के लिए सर्दियों की एक नई वर्दी भी पेश की है, जिसे 'ड्रेस 3B' नाम दिया गया है। इसमें अंगोला शर्ट, बैटल जैकेट और बेरेट शामिल रहेंगे। माना जा रहा है कि यह पोशाक ज्यादा व्यावहारिक और आधुनिक मोर्चों की जरूरतों के हिसाब से तैयार की गई है।

सिर्फ कपड़े नहीं, शब्दावली भी बदली

बदलाव सिर्फ ड्रेस कोड तक सीमित नहीं हैं। सेना ने उन शब्दों और प्रतीकों को भी अलविदा कह दिया है जो औपनिवेशिक दौर की याद ताजा कराते थे — इनमें 'रॉयल' जैसा शब्द भी शुमार है। TrendKia की रिपोर्ट बताती है कि सेना के एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल वीपीएस कौशिक ने नियमावली की प्रस्तावना में लिखा है कि यह कदम भारतीय मूल्यों और राष्ट्रीय पहचान के अनुरूप सेना की परंपराओं को आगे ले जाने की दिशा में एक अहम पड़ाव है।

जवानों के लिए और कड़े हुए ग्रूमिंग नियम

निजी साज-सज्जा को लेकर भी नियमों को और साफ-सुथरा किया गया है। नई गाइडलाइन के तहत सैनिकों पर टैटू और बॉडी पियर्सिंग की रोक जारी रहेगी। वर्दी में ब्रेसलेट पहनने की इजाजत नहीं होगी, जबकि धार्मिक अनुष्ठान वाले दिन पवित्र धागा पहनने की सीमित छूट दी गई है। सिख सैनिकों को उनके धार्मिक प्रतीकों को लेकर पहले की तरह विशेष रियायत मिलती रहेगी। मूँछों की अधिकतम लंबाई 12 सेंटीमीटर तय की गई है। इसके साथ ही वर्दी में डियोडोरेंट और परफ्यूम लगाने पर पाबंदी रहेगी, हालाँकि आफ्टर-शेव लोशन का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

महिला अधिकारियों के लिए भी साफ निर्देश

महिला अधिकारियों का ड्रेस कोड भी अब और स्पष्ट कर दिया गया है। उन्हें सादे रंग की साड़ी या कुर्ता-सलवार पहनने की अनुमति होगी, लेकिन बिना बाजू वाले कुर्ते, पलाज़ो और सिगरेट पैंट पर रोक रहेगी। कॉस्मेटिक्स पर भी सख्ती बरती गई है — वर्दी में लिपस्टिक, रंगीन नेल पॉलिश, बड़ी बिंदी और नोज पिन की मनाही होगी। विवाहित महिला अधिकारी सिंदूर लगा सकती हैं, बशर्ते वह बेरेट या कैप के नीचे से दिखाई न दे।

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