आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS आरक्षण के लिए तय 8 लाख रुपए सालाना आय सीमा को सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल जायज ठहराया है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने मंगलवार को यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जो 2021 से अदालत में लंबित है।
विवाद की जड़ में एनटीए का नोटिफिकेशन
यह मामला नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए के 2021 के एक नोटिफिकेशन से जुड़ा है। इस नोटिफिकेशन के जरिए मेडिकल कोर्स में अखिल भारतीय कोटे यानी AIQ के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27% और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10% सीटें आरक्षित की गई थीं। याचिकाकर्ताओं ने इसी नोटिफिकेशन को चुनौती दी थी, जिस पर मंगलवार को सुनवाई हुई।
103वें संविधान संशोधन से जुड़ी पृष्ठभूमि
EWS आरक्षण की नींव 103वें संविधान संशोधन से पड़ी थी, जिसने शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10% आरक्षण देने का रास्ता खोला। जनहित अभियान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में इस संशोधन को वैध ठहराते हुए बरकरार रखा था। अब उसी आरक्षण के लिए तय आय सीमा को अदालत में परखा जा रहा है।
आय सीमा को लेकर क्यों उठते रहे हैं सवाल
EWS कोटे की 8 लाख रुपए सालाना आय सीमा शुरू से ही चर्चा में रही है। खबरों के मुताबिक, अलग अलग राज्यों में समय समय पर इस सीमा में बदलाव होते रहे हैं, कहीं इसे बढ़ाया गया तो कहीं घटाया गया, जिससे लाभार्थियों की संख्या पर सीधा असर पड़ा है। वहीं केंद्र सरकार पहले ही नई कर व्यवस्था में 12 लाख रुपए तक की सालाना आय को टैक्स के दायरे से बाहर रख चुकी है, जिससे EWS की आय सीमा को लेकर बहस और गहरी हो गई है। इसी पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी अहम मानी जा रही है, हालांकि अदालत ने अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।


















