त्योहारी सीजन के दस्तक देते ही बाजारों में नए परिधानों की खरीदारी को लेकर रौनक बढ़ गई है। इस बार बिहार के जमुई जिले में स्थानीय खरीदारों के लिए पारंपरिक और आधुनिक पहनावे का एक विशेष बाजार सजाया गया है। जमुई जिला मुख्यालय में स्थित झाझा बस स्टैंड के निकट लगे इस विशेष खादी स्टॉल पर आम लोगों के बजट को ध्यान में रखते हुए परिधानों की विस्तृत श्रृंखला प्रस्तुत की गई है। इस केंद्र पर युवतियों के लिए रंग-बिरंगे सूट मात्र 300 रुपये की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि पुरुषों के लिए विभिन्न शैलियों के शर्ट 350 रुपये में मिल रहे हैं। इसके अतिरिक्त इस बिक्री केंद्र पर 300 रुपये से लेकर 30 हजार रुपये मूल्य तक के कई पारंपरिक और प्रीमियम वस्त्र रखे गए हैं, जिनमें प्रसिद्ध कटिया और तसर सिल्क से बने कपड़े मुख्य आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
रांची से जमुई पहुंचा स्वदेशी परिधानों का भंडार
झाझा बस स्टैंड के पास सजे इस खादी बिक्री केंद्र को झारखंड की राजधानी रांची से आए दल द्वारा संचालित किया जा रहा है। स्टॉल के संचालक भीम सिंह के अनुसार, वे और उनकी टीम बीते एक माह से लगातार जमुई के विभिन्न इलाकों में ऐसे बिक्री केंद्र लगा रहे हैं। जिले के अलग-अलग प्रमुख स्थानों पर बारी-बारी से स्टॉल लगाकर वे स्थानीय नागरिकों तक सीधे बुनकरों के तैयार कपड़े पहुंचा रहे हैं। इस केंद्र की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहाँ बाजार के सामान्य दामों की तुलना में बेहद किफायती दरों पर स्वदेशी वस्त्र बेचे जा रहे हैं। पुरुषों के पहनावे की बात करें तो यहाँ लड़कों के लिए हाफ शर्ट मात्र 300 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि पूरी आस्तीन वाली फुल शर्ट की कीमत 350 रुपये तय की गई है।
सूट पीस से लेकर पारंपरिक शॉल और कंबलों की विशाल श्रृंखला
महिलाओं और युवतियों के लिए भी इस खादी केंद्र पर कई आकर्षक विकल्प तैयार किए गए हैं। स्टॉल पर 350 रुपये में सूट का कपड़ा मिल रहा है, जिसे लोग अपनी पसंद के अनुसार सिलवा सकते हैं। भीम सिंह ने स्पष्ट किया कि ये सभी उत्पाद पूरी तरह स्वदेशी कारीगरी से तैयार किए गए हैं। आमतौर पर खुले बाजार में इन प्राकृतिक रेशों और प्रामाणिक खादी के कपड़ों की कीमतें काफी अधिक होती हैं, परंतु वर्तमान त्योहारी रियायतों के कारण ग्राहकों को यह सामान सीधे कम कीमत पर मुहैया कराया जा रहा है। प्रीमियम कपड़ों के शौकीनों के लिए यहाँ विशेष रूप से तैयार कटिया सिल्क और तसर सिल्क की समृद्ध किस्में रखी गई हैं। इसके अलावा दैनिक और पारंपरिक उपयोग में आने वाली वस्तुएं जैसे गमछा, धोती, पगड़ी, शॉल तथा आने वाली सर्दियों की तैयारी के लिए कंबल भी यहाँ उचित दामों पर बिक्री के लिए रखे गए हैं।
दशहरा बाद तक शहर के विभिन्न चौराहों पर लगेगा स्टॉल
संचालक भीम सिंह ने बताया कि वे करीब 1 महीने से जमुई में लगातार सक्रिय हैं और शहर के अलग-अलग प्रमुख चौराहों पर घूम-घूम कर स्टॉल लगा रहे हैं। आने वाले प्रमुख पर्व-त्योहारों को देखते हुए ग्राहकों को 10 से 15 प्रतिशत तक की विशेष छूट भी दी जा रही है। उन्होंने जानकारी दी कि त्योहारों का यह दौर चलने तक और विशेष रूप से दशहरा के बाद तक उनका यह बिक्री अभियान जमुई में निरंतर जारी रहेगा। वर्तमान में मुख्य केंद्र झाझा बस स्टैंड के पास संचालित हो रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में इसे शहर के अन्य महत्वपूर्ण चौक-चौराहों पर भी स्थानांतरित किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक लोग स्वदेशी, फैशनेबल और किफायती कपड़ों की खरीदारी कर सकें।



















