त्योहारों और पारिवारिक जश्न के मौकों पर भारतीय घरों में मीठे का विशेष महत्व होता है। पारंपरिक मिठाइयों की बात करें तो बालूशाही हर किसी की पहली पसंद में शामिल रहती है। अपनी खास बनावट, बाहर की हल्की कुरकुरी परत और भीतर के रसीलेपन के कारण यह हर उत्सव में स्वाद का खास रंग भर देती है। रक्षाबंधन और जन्माष्टमी जैसे प्रमुख पर्वों पर बाजार से मिठाई खरीदने के बजाय इसे बेहद आसान तरीके से रसोई में ही तैयार किया जा सकता है।
स्वादिष्ट बालूशाही के लिए जरूरी चीजें और आटा तैयार करने का तरीका
बालूशाही बनाने की प्रक्रिया सही सामग्री के संतुलन से शुरू होती है। एक बड़े बर्तन में मैदा और बेकिंग पाउडर को एक साथ मिलाकर रख लें। इसके बाद इसमें मोयन के लिए देसी घी डालकर मिश्रण को हाथों से अच्छी तरह मिलाएं, ताकि आटे में सही मोयन लग सके। अब इसमें ताजा दही शामिल करें और हल्के हाथों से आटा गूंध लें। आटा तैयार करते समय इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि उसे बहुत ज्यादा जोर लगाकर न मलें। आटे की बनावट न तो बहुत सख्त होनी चाहिए और न ही अत्यधिक मुलायम। आटा तैयार होने के बाद उसे किसी कपड़े या बर्तन से ढककर 20 मिनट के लिए रख दें, ताकि वह अच्छी तरह सेट हो जाए।
सही आकार देना और धीमी आंच पर तलने की तकनीक
जब आटा 20 मिनट तक रेस्ट कर ले और अच्छी तरह सेट हो जाए, तो उससे छोटी-छोटी लोइयां तैयार करें। प्रत्येक लोई को गोल करके थोड़ा सा दबाएं और उसके ठीक बीच में अंगूठे से हल्का सा गड्ढा या छेद बना दें। यही पारंपरिक आकार इसे बाजार में मिलने वाली बालूशाही जैसा पेशेवर रूप देता है। इसके बाद एक कढ़ाई में पर्याप्त मात्रा में घी या तेल डालकर हल्का गर्म करें। ध्यान रखें कि तेल बहुत अधिक तेज गर्म न हो। अब धीमी आंच पर बालूशाही को फ्राई होने के लिए कढ़ाई में डालें। इसे तलते समय जल्दबाजी में आंच तेज न करें, क्योंकि तेज गर्मी से बाहर की परत तो तुरंत भूरी हो जाएगी, लेकिन अंदर का हिस्सा कच्चा रह जाएगा। धीमी आंच पर सुनहरी होने तक तलने से बालूशाही अंदर तक समान रूप से पकती है और खस्ता बनती है।
एक तार की चाशनी और गार्निशिंग की विधि
दूसरी तरफ एक अलग बर्तन या पैन में चीनी और पानी मिलाकर चाशनी बनाने के लिए रखें। इसे तब तक पकाएं जब तक कि एक तार की चाशनी तैयार न हो जाए। स्वाद और सुगंध को बेहतर बनाने के लिए इस चाशनी में थोड़ी इलायची पाउडर और केसर के धागे मिला दें। जब बालूशाही अच्छी तरह तलकर सुनहरी हो जाए, तो उसे कढ़ाई से निकालकर सीधे गुनगुनी चाशनी में डाल दें। बालूशाही को लगभग 4 से 5 मिनट तक चाशनी में ही डूबा रहने दें, ताकि वह अंदर तक मिठास को अच्छी तरह सोख ले। इसके बाद चाशनी से निकालकर प्लेट में रखें और बारीक कटे पिस्ता या बादाम से सजाकर परोसें।
स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां और संतुलित सेवन
स्वाद में लाजवाब होने के बावजूद बालूशाही में प्रचुर मात्रा में घी और चीनी का उपयोग किया जाता है। इसलिए इसका आनंद लेते समय सेवन की मात्रा पर ध्यान देना बेहद आवश्यक है। जिन लोगों को मधुमेह यानी डायबिटीज, मोटापा या हृदय संबंधी समस्याएं हैं, उन्हें इसके सेवन में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। त्योहार के मौके पर स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए संतुलित मात्रा में ही इसका स्वाद लेना समझदारी है।



















