भारत में बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय जनगणना की औपचारिक समयसारिणी सामने आ गई है। केंद्र सरकार की योजना के मुताबिक देश भर में जनसंख्या की गिनती का मुख्य चरण 25 जनवरी 2027 से शुरू होकर 28 फरवरी 2027 तक चलेगा। प्रशासनिक प्राथमिकताओं, मौसम संबंधी बाधाओं और आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए कुछ विशेष क्षेत्रों, विशेषकर भारी बर्फबारी वाले इलाकों और चुनावी राज्यों को इस चरण की तय तिथियों से छूट दी गई है।
कानूनी ढांचा और संचालन व्यवस्था
देश में हर दस वर्ष में होने वाली इस वृहद कवायद का संचालन वैधानिक नियमों के तहत किया जाता है। भारत में पूरी जनगणना प्रक्रिया ‘जनगणना अधिनियम, 1948’ तथा ‘जनगणना नियम, 1990’ में तय किए गए कानूनी प्रावधानों और दिशानिर्देशों के अनुसार ही पूरी की जाती है। इन नियमों के तहत देश के प्रत्येक नागरिक का आधिकारिक रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है और पूरी प्रशासनिक मशीनरी को इस कार्य में लगाया जाता है।
2011 के बाद महामारी के चलते हुआ था विलंब
भारत में पिछला व्यापक जनसंख्या सर्वेक्षण वर्ष 2011 में दो चरणों के भीतर पूरा किया गया था। इसके बाद वर्ष 2021 की जनगणना को भी उसी तर्ज पर दो हिस्सों में पूरा करने का खाका तैयार हुआ था। मूल योजना के तहत पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2020 के बीच और दूसरा चरण फरवरी 2021 में संपन्न होना था। 1 अप्रैल 2020 से मैदानी स्तर पर काम शुरू करने की सभी तैयारियां भी मुकम्मल कर ली गई थीं। उसी दौरान देश भर में फैली कोविड-19 महामारी की वजह से इस अभियान को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा था।
2027 के नए रोडमैप पर अमल
लंबे अंतराल और कई तकनीकी बदलावों के बाद अब सरकार ने जनगणना 2027 का औपचारिक रोडमैप जमीन पर उतारने का फैसला किया है। नई रूपरेखा के तहत मैदानी तैयारियों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा ताकि 2027 की शुरुआत में देश के नागरिकों का सटीक और प्रामाणिक आंकड़ा दर्ज किया जा सके।
























