केरल स्थित कालिकट यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद परिसर की राजनीति बेहद उग्र और हिंसक रूप में तब्दील हो गई. छात्रसंघ चुनाव में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने जीत हासिल की, लेकिन इस जीत के तुरंत बाद दोनों प्रमुख छात्र संगठनों के बीच गंभीर तनाव पैदा हो गया. विवाद केवल शैक्षणिक परिसर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अस्पताल के भीतर तक पहुंच गया. आरोप है कि मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (एमएसएफ) के कार्यकर्ताओं ने अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में जबरन घुसकर वहां पहले से इलाज करवा रहे एसएफआई कार्यकर्ताओं पर लोहे की रॉड, लाठी-डंडों और अग्निशामक यंत्र से जानलेवा हमला कर दिया. इस हिंसक वारदात में कई छात्र गंभीर रूप से जख्मी हो गए हैं.
मतगणना के समय शुरू हुआ दोनों पक्षों में विवाद
इस पूरे खूनी संघर्ष की शुरुआत कालिकट यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव की मतगणना के दौरान हुई थी. वोटों की गिनती शुरू होते ही दोनों छात्र गुटों के बीच पहले तीखी बहसबाजी हुई. देखते ही देखते यह मौखिक विवाद हाथापाई और हिंसक झड़प में बदल गया. दोनों पक्षों के अज्ञात कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर हमला बोल दिया. कुछ देर बाद जब चुनाव परिणाम सामने आए, तो उसमें एसएफआई ने आधिकारिक जीत दर्ज की. इस परिणाम के बाद दोनों संगठनों के बीच तनाव कम होने के बजाय और ज्यादा भड़क गया. परिसर में हुई इस शुरुआती मारपीट के बाद घायल छात्रों को उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया था.
अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में रॉड और डंडों से हमला
परिसर की झड़प के बाद घायल एसएफआई कार्यकर्ता जब अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती होकर इलाज करा रहे थे, तभी वहां विरोधी गुट के हमलावर आ धमके. आरोप के मुताबिक एमएसएफ कार्यकर्ता सीधे इमरजेंसी वार्ड में घुस गए और उन्होंने भर्ती छात्रों पर रॉड तथा डंडों से ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए. इतना ही नहीं, हमलावरों ने वार्ड में रखे अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंगुइशर) को भी हथियार की तरह इस्तेमाल करते हुए छात्रों पर प्रहार किया. इस हमले में कई एसएफआई कार्यकर्ताओं के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं. एसएफआई के राज्य अध्यक्ष शिवप्रसाद के अनुसार, संगठन के एक कार्यकर्ता की नाक की हड्डी में गंभीर फ्रैक्चर हुआ है, जिसके इलाज के लिए उसे सर्जरी करानी पड़ेगी, जबकि एक अन्य कार्यकर्ता पर सीधे अग्निशामक यंत्र से हमला किया गया.
डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने सुरक्षा पर जताई चिंता
अस्पताल जैसे संवेदनशील और सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर हुए इस हमले से ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों में भारी भय का माहौल है. घटना के बाद सामने आए वीडियो में डॉक्टरों और कर्मचारियों ने अपनी व्यथा व्यक्त की है. मेडिकल स्टाफ ने बताया कि इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों पर अचानक इस तरह हमला होते देखकर वे पूरी तरह स्तब्ध रह गए. हालात इतने अनियंत्रित और हिंसक थे कि अस्पताल के कर्मचारियों के लिए हमलावरों को रोकना बिल्कुल नामुमकिन हो गया था. इस खौफनाक वारदात ने चिकित्सा संस्थानों में मरीजों और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
छात्र संगठनों की पृष्ठभूमि और सख्त कार्रवाई की मांग
इस टकराव में शामिल दोनों संगठनों की मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि है. एमएसएफ यानी मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) की छात्र शाखा है, जबकि एसएफआई वामपंथी विचारधारा से जुड़ा छात्र संगठन है. एसएफआई नेतृत्व ने अस्पताल में घुसकर किए गए इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है और पुलिस प्रशासन से सभी दोषियों को तुरंत चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है. चुनावी मतभेदों के चलते अस्पताल परिसर के भीतर मरीजों पर हुए इस हमले के बाद पुलिस जांच पर सबकी निगाहें टिकी हैं.



















