बिहार की राजधानी पटना स्थित नालंदा मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के गंभीर आरोपों के बाद प्रशासन ने बेहद सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। परिसर के छात्रावास में रहने वाली छात्राओं पर रैगिंग के आरोप सामने आने के बाद अलग-अलग बैच की छात्राओं पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम की शिकायत राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी), केंद्रीय एंटी रैगिंग सेल और बिहार राज्य के लोक शिकायत अधिकारी तक पहुंचाई गई थी। उच्च स्तरीय स्तर पर मामला संज्ञान में आने के बाद संस्थान के प्राचार्य से जवाब तलब किया गया, जिसके तुरंत बाद कॉलेज प्रशासन ने परिसर में छात्राओं की हिफाजत और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं।
एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक में कड़ा फैसला
संस्थान में अनुशासन बनाए रखने और शिकायतों की पड़ताल के मकसद से 26 अक्टूबर को एंटी रैगिंग सेल कमेटी की एक अहम बैठक बुलाई गई। इस बैठक की अध्यक्षता कॉलेज की प्राचार्य डॉक्टर उषा कुमारी ने की। बैठक के दौरान छात्रावासों के माहौल, जूनियर छात्राओं की सुरक्षा और अनुशासनहीनता के मामलों पर बिंदुवार समीक्षा की गई। कमेटी ने परिसर के भीतर निगरानी तंत्र को तत्काल प्रभाव से कड़ा करने और सभी संबंधित विभागों को हर समय चौकन्ना रहने के निर्देश जारी किए, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को तुरंत रोका जा सके।
छात्राओं के हॉस्टल निष्कासन और कक्षाओं से निलंबन के आदेश
जांच समिति की सिफारिशों के आधार पर विभिन्न बैचों की छात्राओं के खिलाफ दंडात्मक निर्देश जारी किए गए हैं। कॉलेज परिसर स्थित छात्रावास में रहने वाली वर्ष 2023 और वर्ष 2024 बैच की छात्राओं को आगामी आदेश तक हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया है। इसके साथ ही, वर्ष 2025 बैच की सभी छात्राओं पर तीन महीने तक कक्षाओं में शामिल होने पर रोक लगा दी गई है। इस बैच की छात्राओं को हॉस्टल खाली करने के लिए 24 घंटे की समयसीमा दी गई है और उन्हें तत्काल अपने-अपने घरों को लौटने का आदेश दिया गया है।
नए बैच से शपथ पत्र और हॉस्टल वार्डन को सख्त निगरानी के निर्देश
प्रशासन ने परिसर में रैगिंग की संस्कृति को पूरी तरह समाप्त करने के लिए एहतियाती कदम भी उठाए हैं। वर्ष 2026 बैच के सभी छात्र-छात्राओं से औपचारिक रूप से रैगिंग न करने संबंधी स्वघोषणा पत्र भरवाया गया है। छात्रावास वार्डन को निर्देश दिए गए हैं कि वे हॉस्टल परिसर के हर हिस्से पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना फौरन उच्च अधिकारियों को दें।
सीनियर डॉक्टरों को हॉस्टल संचालन और सुरक्षा की विशेष कमान
छात्राओं की गतिविधियों की निगरानी और परिसर में नियमों का पालन कराने के लिए कई विभागों के वरिष्ठ प्रोफेसरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार, हॉस्टल वार्डन तथा पीआरएसएम विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अमित सिन्हा और माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार को हॉस्टल एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया गया है। कॉलेज की प्राचार्य डॉ. उषा कुमारी ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप रैगिंग के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। कॉलेज को पूरी तरह रैगिंग मुक्त रखने के लिए यह कड़ा रुख जारी रहेगा। इस पूरे प्रकरण में शिकायतों के ब्योरे और औपचारिक जांच की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद आगे की स्थिति और साफ होगी।






















