बिहार के मुजफ्फरपुर जिले का ग्रामीण इलाका उस वक्त दहल उठा, जब रविवार की रात एक खौफनाक वारदात ने सबको झकझोर कर रख दिया। मोतीपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नरियारपुर नवादा गांव में एक ऐसा अप्रत्याशित वाकया पेश आया जिसने शादी की नवविवाहित खुशियों को चंद महीनों के भीतर ही भयानक मातम में तब्दील कर दिया। महज तीन महीने पहले जिस नवविवाहित जोड़े ने सात फेरे लेकर एक साथ पूरी जिंदगी बिताने की कसमें खाई थीं, उनकी बेहद रहस्यमय और दर्दनाक परिस्थितियों में मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके में एक अजीब सी खामोशी और सनसनी फैला दी है, खासकर इसलिए क्योंकि पति और पत्नी की लाशें घर के भीतर दो अलग-अलग कमरों में फंदे से लटकती पाई गईं। एक ही घर में दो-दो शव मिलने से मौके पर परिजनों की चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव के लोग इकट्ठा हो गए। स्थानीय पुलिस के लिए यह मामला एक पेचीदा पहेली बन गया है, जिसकी गुत्थी सुलझाने के लिए हर संभव एंगल से बारीकी से जांच की जा रही है।
महानगर का सफर और मायके में पहली वापसी
इस अभागे नवदंपती की वैवाहिक कहानी बहुत ही छोटी और दुखद साबित हुई। प्रशासन द्वारा मृतकों की आधिकारिक शिनाख्त अंजलि कुमारी और विजय कुमार के तौर पर की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अंजलि नरियार गांव के रहने वाले अनिल सहनी की बेटी थी, जबकि उसका जीवनसाथी विजय सिवाईपट्टी थाना इलाके के हरसेर गांव का मूल निवासी था। करीब नब्बे दिन पहले ही दोनों पूरे रीति-रिवाजों के साथ विवाह के पवित्र बंधन में बंधे थे। अपने परिवार के भरण-पोषण और रोजगार के सिलसिले में विजय महानगर मुंबई में काम करता था। इसी वजह से शादी के फौरन बाद वह अपनी नई नवेली दुल्हन को लेकर मुंबई चला गया था। वहां महानगर की भागदौड़ भरी जिंदगी में एक महीना साथ बिताने के बाद, यह जोड़ा 30 जून को वापस अपने गृह राज्य बिहार लौट आया था। शादी के बाद यह पहला मौका था जब अंजलि अपने मायके नरियारपुर नवादा आई थी। अपनी पत्नी और ससुराल वालों से खुशी-खुशी वक्त बिताने की चाहत में विजय भी शनिवार को वहां पहुंच गया, लेकिन किसी को इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि यह उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा।
रात के अंधेरे में हुआ जानलेवा झगड़ा
घरवालों और रिश्तेदारों द्वारा पुलिस को दी गई शुरुआती जानकारी के मुताबिक, रविवार की शाम तक सब कुछ बेहद सामान्य और खुशनुमा लग रहा था। रात का खाना खाने के बाद पति-पत्नी आराम करने के इरादे से अपने कमरे में चले गए थे। लेकिन रात के सन्नाटे में बंद दरवाजों के पीछे हालात अचानक बेकाबू हो गए। किसी अज्ञात पारिवारिक मुद्दे को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जिसने जल्द ही एक बड़े और हिंसक विवाद का रूप ले लिया। जांचकर्ताओं का प्रारंभिक अनुमान है कि इस अप्रत्याशित झगड़े से अंजलि इतनी ज्यादा मानसिक उथल-पुथल और तनाव का शिकार हो गई कि उसने अपनी ही साड़ी का फंदा बनाया और फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इसके बाद की कहानी और भी ज्यादा खौफनाक बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि जब विजय ने अपनी पत्नी को फंदे से बेजान झूलता हुआ देखा, तो वह गहरे मानसिक सदमे में चला गया। हताशा और खौफ में आकर उसने कथित तौर पर पहले कोई जहरीला पदार्थ निगला और फिर बदहवासी में दूसरे कमरे का रुख किया, जहां उसने भी फंदे से लटककर अपनी जान दे दी। अगली सुबह जब परिजनों ने यह खौफनाक मंजर देखा, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई और घर में कोहराम मच गया।
लड़के के परिवार ने लगाए कत्ल के गंभीर आरोप
दो अलग-अलग कमरों में नवविवाहित जोड़े के शव मिलने की इस असामान्य घटना ने जल्द ही संदेह और गंभीर आरोपों को जन्म दे दिया। लड़के पक्ष ने पुलिस की उस शुरुआती थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें इसे पति-पत्नी का दोहरा आत्महत्या का मामला बताया जा रहा है। विजय के परिवार वाले, विशेषकर उसके भाई ने, लड़की के मायके वालों पर एक सोची-समझी हत्या की साजिश रचने का संगीन इल्जाम मढ़ा है। मृतक के भाई का पुलिस के सामने स्पष्ट कहना है कि उसकी भाभी अंजलि ने आपसी विवाद के बाद खुदकुशी जरूर की, लेकिन उसके भाई ने अपनी जान नहीं ली। उनका सनसनीखेज आरोप है कि अंजलि की मौत के बाद उसके आक्रोशित परिजनों ने मिलकर विजय को बेदर्दी से मौत के घाट उतार दिया। उनका दावा है कि खुद को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए ससुराल वालों ने विजय के शव को दूसरे कमरे में फंदे से लटका दिया ताकि यह पूरी तरह से आत्महत्या जैसा लगे। इन गंभीर और संगीन आरोपों के बाद दोनों परिवारों के बीच भारी तनाव का माहौल पैदा हो गया है।
पुलिस और फोरेंसिक विशेषज्ञों की सघन जांच
मामले की संवेदनशीलता और हत्या के सनसनीखेज आरोपों को देखते हुए मोतीपुर थाना पुलिस ने बिना कोई वक्त गंवाए घटनास्थल पर मोर्चा संभाल लिया। पुलिस टीम ने तुरंत दोनों शवों को अपने कब्जे में लिया और अहम सबूतों से किसी भी तरह की छेड़छाड़ रोकने के लिए पूरे घर की घेराबंदी कर दी। घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए मुजफ्फरपुर से फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की एक विशेष टीम को भी मौके पर बुलाया गया, जिसने दोनों कमरों की बारीकी से पड़ताल की और फिंगरप्रिंट्स तथा अन्य सुराग जमा किए। इस पूरे आपराधिक प्रकरण पर पश्चिमी डीएसपी सुचित्रा कुमारी ने मीडिया को आधिकारिक बयान जारी किया है। उन्होंने पुष्टि की कि वार्ड नंबर 10 स्थित घर के दो अलग कमरों में पति-पत्नी के शव दुपट्टे के फंदे से लटके पाए गए हैं। उन्होंने जानकारी दी कि फोरेंसिक टीम ने अपना काम पूरा कर लिया है और मौत के असली कारणों का तकनीकी रूप से पता लगाने के लिए शवों को एसकेएमसीएच अस्पताल भेज दिया गया है, जहां मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम किया जाएगा। पुलिस फिलहाल दोनों पक्षों से लिखित शिकायत और पोस्टमार्टम की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिसके आधार पर आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
शादी के तुरंत बाद मौतों का बढ़ता खौफनाक सिलसिला
मुजफ्फरपुर की यह दिल दहला देने वाली वारदात कोई इकलौता मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे राज्य में सामने आ रहे एक बेहद चिंताजनक सामाजिक पैटर्न का हिस्सा बनती जा रही है। विवाह के कुछ ही समय बाद नवविवाहिताओं और जोड़ों की संदिग्ध परिस्थितियों में जान जाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जो समाज के लिए एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। गौरतलब है कि महज दस दिन पहले बिहार के बगहा इलाके से भी बिल्कुल ऐसी ही एक झकझोरने वाली खबर आई थी। वहां शादी के महज ढाई महीने बाद ही एक नवविवाहिता की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई थी और उस मामले में भी दहेज प्रताड़ना के आरोप लगे थे। एक के बाद एक हो रही ये घटनाएं पुलिस प्रशासन और समाजशास्त्रियों के सामने कई गंभीर सवाल खड़े करती हैं कि आखिर इन बंद कमरों के पीछे आत्महत्या की मजबूरियां हैं, या फिर पारिवारिक कलह और हिंसा का खौफनाक चेहरा, जिसका शिकार युवा जोड़े बन रहे हैं।




















