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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किराना हिल्स पर हुए अनपेक्षित प्रहार से बदला घटनाक्रम, पूर्व सीडीएस अनिल चौहान की टिप्पणी के बाद सामने आए रणनीतिक पहलूबिहार
27 अग॰ 2026, 12:39 pm (1 घंटे पहले)· 3

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किराना हिल्स पर हुए अनपेक्षित प्रहार से बदला घटनाक्रम, पूर्व सीडीएस अनिल चौहान की टिप्पणी के बाद सामने आए रणनीतिक पहलू

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के किराना हिल्स में लोइटरिंग म्यूनिशन गिरने की घटना पर पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान के बयान के बाद रक्षा विशेषज्ञ रिटायर्ड मेजर जनरल ध्रुव कटोच ने इसके रणनीतिक प्रभावों का विश्लेषण किया है।

सैन्य अभियानों के दौरान कभी-कभी अनपेक्षित घटनाएं भी युद्ध के रुख और रणनीतिक संतुलन को पूरी तरह बदल देती हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के अत्यंत संवेदनशील किराना हिल्स क्षेत्र में हुए प्रहार को लेकर पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान की हालिया टिप्पणी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रक्षा विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया है। एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान पूर्व सीडीएस ने स्पष्ट किया था कि भारत का किराना हिल्स पर हमला करने का कोई पूर्व निर्धारित इरादा नहीं था। इस बयान के बाद रक्षा विशेषज्ञ और रिटायर्ड मेजर जनरल ध्रुव कटोच ने घटनाक्रम के गहरे प्रभावों, अमेरिकी हस्तक्षेप और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर इसके असर की विस्तृत व्याख्या की है।

अनपेक्षित प्रहार की तकनीकी वजह और हथियार की सटीकता

अभियान के दौरान किराना हिल्स पर हुए इस हमले के संबंध में पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान से पहले एयर मार्शल भारती ने भी यह बात कही थी। उन्होंने सैन्य कार्रवाई के तुरंत बाद स्पष्ट किया था कि किराना हिल्स को निशाना बनाना भारतीय अभियान की मूल मंशा में शामिल नहीं था। हालांकि निशाना तय न होने के बावजूद जिस सटीकता के साथ यह प्रहार हुआ, उसने पड़ोसी देश के सैन्य नेतृत्व को हिलाकर रख दिया।

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तकनीकी विवरण साझा करते हुए रिटायर्ड मेजर जनरल ध्रुव कटोच ने बताया कि किराना हिल्स की ओर भेजी गई लोइटरिंग म्यूनिशन का प्राथमिक लक्ष्य वहां मौजूद कोई रडार या एयर डिफेंस प्रणाली थी। निशाना साधने के दौरान जब इस हथियार का ईंधन समाप्त हो गया, तब यह किराना हिल्स के इलाके में जा गिरा। आशंका व्यक्त की गई है कि यह हथियार पहाड़ियों में बने किसी एयर वेंट के रास्ते ढांचे के अंदर गहराई तक पहुंच गया, जिसके कारण वहां व्यापक नुकसान हुआ। भले ही यह कदम योजनाबद्ध न रहा हो, लेकिन इसकी अचूक सटीकता ने पाकिस्तान के रणनीतिक ठिकानों पर गंभीर असर डाला।

वॉशिंगटन की सक्रियता और परमाणु कमान की हलचल

किराना हिल्स में हुए नुकसान के तुरंत बाद वैश्विक कूटनीति में तेजी से बदलाव देखा गया। 10 मई के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जारी संघर्ष को लेकर अमेरिका की चिंताएं अचानक बढ़ गईं। वाशिंगटन जो पहले इस टकराव में अधिक रुचि नहीं दिखा रहा था, वह अचानक सक्रिय हुआ और दोनों देशों के बीच मध्यस्थता तथा युद्धविराम की कोशिशों में जुट गया। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका की इस अचानक बढ़ी सक्रियता के पीछे किराना हिल्स में हुआ भारी नुकसान ही सबसे प्रमुख कारण था।

घटना के समय ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि पाकिस्तान ने अपनी परमाणु कमान संरचना को अलर्ट पर रख दिया था, हालांकि बाद में इस्लामाबाद ने आधिकारिक तौर पर इन दावों को खारिज कर दिया था। किराना हिल्स में पाकिस्तान के संवेदनशील केंद्रों को लेकर विभिन्न अटकलें लगाई जाती रही हैं। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि वहां मौजूद कुछ सुविधाओं के अमेरिकी तार भी जुड़े हो सकते हैं, लेकिन बेहद संवेदनशील होने के कारण ऐसे तथ्यों की सार्वजनिक रूप से आधिकारिक पुष्टि होना कठिन है। विश्लेषकों के आकलन के अनुसार किराना हिल्स पर हुए सटीक नुकसान के बाद पाकिस्तान प्रभावी रूप से पीछे हटने पर मजबूर हुआ, जिसके बाद अमेरिका ने हस्तक्षेप कर संघर्ष को शांत कराया।

चीन और तुर्की का रणनीतिक गठजोड़

दक्षिण एशियाई रक्षा परिदृश्य में चीन और पाकिस्तान के बीच पिछले 40-50 वर्षों से गहरा सैन्य और रणनीतिक सहयोग चला आ रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी यह देखा गया कि बीजिंग ने इस्लामाबाद को लगातार खुफिया जानकारियां और सैटेलाइट डेटा उपलब्ध कराया। चीन लंबे समय से पड़ोसी देश को सैन्य और परमाणु दोनों क्षेत्रों में सहायता प्रदान करता रहा है।

चीन से मिले खुफिया इनपुट के आधार पर पाकिस्तान ने भारत के अंदरूनी क्षेत्रों में स्थित सैन्य ठिकानों पर हमले करने का प्रयास किया था, लेकिन भारतीय वायु रक्षा प्रणाली ने इन सभी कोशिशों को पूरी तरह से विफल कर दिया। भविष्य में यदि दोनों देशों के बीच दोबारा सैन्य टकराव की स्थिति बनती है, तो भारत को इस बात के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा कि पाकिस्तान को चीनी सैटेलाइट तंत्र के साथ-साथ तुर्की से भी सैन्य व खुफिया मदद मिल सकती है।

वैश्विक परिस्थितियां और भारतीय युवाओं का भविष्य

अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों के साथ-साथ अमेरिका द्वारा B-1 और B-2 बिजनेस तथा टूरिस्ट वीजा बड़ी संख्या में रद्द किए जाने की रिपोर्टों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इस प्रशासनिक कदम का प्रभाव भारतीय नागरिकों के एक वर्ग पर पड़ सकता है। इस स्थिति को देखते हुए भारतीय युवाओं को सलाह दी गई है कि वे विदेशों में अनिश्चितता के बजाय अपने देश लौटकर भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था और तेजी से उभरते स्टार्टअप क्षेत्र में अपना योगदान दें।

भारत में वर्तमान समय में युवाओं के लिए नए और बेहतर अवसर तेजी से तैयार हो रहे हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच देश के भीतर रहकर काम करना अधिक सुरक्षित और प्रगतिशील विकल्प साबित हो सकता है। इसके अलावा अमेरिका और यूरोप में रह रहे भारतीय समुदायों के समक्ष संभावित कट्टरपंथी खतरों को लेकर भी व्यक्तिगत आकलन के आधार पर सतर्कता बरतने की बात कही गई है।

सवाल-जवाब

क्या भारत ने किराना हिल्स को जानबूझकर निशाना बनाया था?
नहीं, पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान और एयर मार्शल भारती के अनुसार किराना हिल्स भारत का पूर्व निर्धारित या जानबूझकर चुना गया लक्ष्य नहीं था।
किराना हिल्स में हथियार कैसे गिरा?
रडार या एयर डिफेंस प्रणाली को निशाना बनाने गई लोइटरिंग म्यूनिशन का ईंधन समाप्त होने पर वह किराना हिल्स में गिरा और एयर वेंट के रास्ते अंदर तक पहुंच गया।
इस घटना के बाद अमेरिका का क्या रुख रहा?
10 मई के बाद अमेरिका की चिंता अचानक बढ़ गई और उसने दोनों देशों के बीच संघर्ष रोकने के लिए सक्रिय रूप से मध्यस्थता की।
ऑपरेशन सिंदूर में चीन की क्या भूमिका थी?
चीन ने अपने 40-50 साल पुराने रक्षा संबंधों के तहत पाकिस्तान को लगातार खुफिया जानकारी और सैटेलाइट सहयोग प्रदान किया था।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·23 मिनट पहले

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किराना हिल्स पर हुए अनपेक्षित प्रहार के सामरिक और कूटनीतिक आयाम बेहद गंभीर हैं। एक क्राइम और राष्ट्रीय सुरक्षा संवाददाता के तौर पर, यह घटना दिखाती है कि कैसे तकनीकी भूल या ईंधन समाप्ति जैसी अनियोजित सैन्य स्थितियां भी परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों के बीच रणनीतिक संतुलन को रातों-रात बदल सकती हैं। पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान के इस खुलासे के बाद कि यह हमला पूर्व-नियोजित नहीं था, अमेरिकी कूटनीति का तुरंत सक्रिय होना और पाकिस्तान की परमाणु कमान में हलचल की आशंका इस बात का प्रमाण है कि सीमा पर एक छोटी सी तकनीकी चूक भी वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा संकट पैदा कर सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·22 मिनट पहले

वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर मेरा मानना है कि यह घटना इस बात का सटीक उदाहरण है कि आधुनिक युद्धक प्रणालियों में तकनीकी और अप्रत्याशित कारक किस प्रकार पारंपरिक रणनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से उलट सकते हैं। जिस प्रकार एक अनियोजित लोइटरिंग म्यूनिशन के ईंधन समाप्ति के बाद किराना हिल्स के भीतर प्रवेश करने से वाशिंगटन की कूटनीति हरकत में आई और परमाणु कमान की सुरक्षा को लेकर अटकलें तेज हुईं, वह भविष्य के संघर्षों में सैन्य आकस्मिकताओं के बेहद दूरगामी और गंभीर भू-राजनीतिक परिणामों की चेतावनी देता है।

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