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ऑपरेशन सिंदूर के बाद रुकी थीं शादियां, अब भारत पहुंचीं 150 पाकिस्तानी दुल्हनेंभारत
24 अग॰ 2026, 11:26 am (1 घंटे पहले)· 2

ऑपरेशन सिंदूर के बाद रुकी थीं शादियां, अब भारत पहुंचीं 150 पाकिस्तानी दुल्हनें

ऑपरेशन सिंदूर के चलते वीजा और रास्ते बंद होने से अटकी 150 पाकिस्तानी दुल्हनों की शादियां अब संभव हो पा रही हैं। केंद्र सरकार की अनुमति और मस्कट व दुबई जैसे देशों के रास्ते ये युवतियां भारत पहुंच चुकी हैं।

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा कदमों के बीच कड़े प्रतिबंधों के कारण लंबे समय से अधर में लटकी पाकिस्तानी दुल्हनों की भारत यात्रा आखिरकार सफल हो गई है। ऑपरेशन सिंदूर के प्रभाव से यात्रा मार्ग और वीजा बंद होने के कारण इन युवतियों की सगाई होने के बावजूद विवाह समारोह रुक गए थे। अब तमाम औपचारिकताओं के बीच लगभग 150 पाकिस्तानी दुल्हनें विभिन्न देशों के रास्ते भारत पहुंचने में कामयाब रही हैं, जिससे उनके वैवाहिक जीवन की शुरुआत का रास्ता साफ हो गया है।

भारत और पाकिस्तान के बीच अटकी थीं रिश्तेदारियां

लंबे समय से सिंध प्रांत के परिवार वाघा-अटारी सीमा के जरिए आसानी से भारत आकर रिश्ते तय करते आए थे और विवाह संपन्न होते थे। इस परंपरा के तहत दोनों देशों के बीच पारिवारिक संबंध सहजता से जुड़े हुए थे। लेकिन सुरक्षा कारणों से उठाए गए कदमों और सीमा सील होने के बाद यह आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई। नतीजतन, वे युवतियां जिनकी सगाई भारत के विभिन्न परिवारों में हो चुकी थी, अपने ससुराल पहुंचने के इंतजार में पाकिस्तान में ही फंस कर रह गईं।

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तीसरे देशों के रास्तों से तय किया सफर

नागपुर के एक सामुदायिक कार्यकर्ता राजेश झांबिया ने इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि कड़े प्रयासों के बाद केंद्र सरकार ने विवाह के उद्देश्य से आने वाली महिलाओं और उनके परिजनों के वास्ते वीजा की मंजूरी दी। इन दुल्हनों ने सीधे सीमा पार करने के बजाय मस्कट, दुबई, श्रीलंका और ओमान जैसे अन्य देशों के रास्तों का उपयोग किया और हवाई मार्ग से देश में प्रवेश किया। नागपुर, रायपुर, जोधपुर और पुणे जैसे शहरों में इन रिश्तों को अब मुकाम मिल रहा है।

शदानी दरबार की पहल और गृह मंत्रालय की मंजूरी

सीमा बंद होने के बाद प्रभावित परिवारों ने रायपुर स्थित संत युधिष्ठिरलाल शदानी से संपर्क साधा, जो सिंध के घोटकी स्थित प्रमुख धार्मिक स्थल शदानी दरबार के आध्यात्मिक प्रमुख हैं। इसके बाद मंदिर परिसर की ओर से ऐसी तमाम युवतियों की सूची तैयार की गई जिनकी शादियां देश के अलग-अलग हिस्सों में तय थीं। इस फेहरिस्त को केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेजा गया ताकि विशेष अनुमति के तहत वीजा जारी किया जा सके।

मंत्रालय ने यह स्पष्ट शर्त रखी कि पाकिस्तान से आने वाले लोगों को केवल हवाई मार्ग का ही इस्तेमाल करना होगा। इसी के तहत इस साल अप्रैल से अब तक 150 दुल्हनें और उनके परिजन वैकल्पिक हवाई मार्गों से भारत आ चुके हैं। अकेले नागपुर में ऐसे 15 मामले सामने आए हैं। हालांकि अभी भी लगभग 300 युवतियां ऐसी हैं जो इस प्रक्रिया के तहत भारत आने की प्रतीक्षा कर रही हैं और उनके लिए भी अनुमति का अनुरोध किया गया है।

ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि

यह पूरा घटनाक्रम वर्ष 2025 में पहलगाम में हुए उस घातक आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ जिसमें 26 भारतीय नागरिकों की जान चली गई थी। इस बड़ी त्रासदी के जवाब में सैन्य कार्रवाई के रूप में ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया गया था, जिसके बाद भारत ने पड़ोसी देश के साथ सीमा आवाजाही और वीजा सेवाओं पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। इसी सुरक्षात्मक फैसले के दायरे में सीमाई मार्ग बंद होने से वैवाहिक यात्राएं भी प्रभावित हुई थीं। इसके अलावा, जांच एजेंसियों की रिपोर्टों में यह तथ्य भी सामने आया है कि यदि स्थानीय स्तर पर समय रहते सहयोग मिला होता तो उस हमले में कई जानें बचाई जा सकती थीं।

सवाल-जवाब

कितनी पाकिस्तानी दुल्हनें भारत पहुंची हैं?
लगभग 150 पाकिस्तानी दुल्हनें कड़े नियमों के बीच भारत पहुंच चुकी हैं।
इनकी शादियां क्यों रुकी हुई थीं?
ऑपरेशन सिंदूर के बाद वीजा और सड़क मार्ग बंद होने के कारण इन युवतियों की यात्रा रुक गई थी।
ये दुल्हनें किस रास्ते से भारत आईं?
ये दुल्हनें मस्कट, दुबई, श्रीलंका और ओमान जैसे देशों के रास्ते हवाई मार्ग से भारत पहुंची हैं।
कितनी दुल्हनें अभी भी आने का इंतजार कर रही हैं?
पाकिस्तान में लगभग 300 और युवतियां भारत आने का इंतजार कर रही हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 मिनट पहले

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सीमा और वीजा पर लगे कड़े प्रतिबंधों के बीच, गृह मंत्रालय की विशेष अनुमति से 150 पाकिस्तानी दुल्हनों का तीसरे देशों के रास्ते भारत पहुंचना एक संवेदनशील कानूनी और प्रशासनिक मामला है। हालांकि शदानी दरबार की पहल और मानवीय आधार पर इन परिवारों को राहत मिली है, लेकिन सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के लिए यह सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती होगी कि इस हवाई मार्ग और विशेष वीजा प्रक्रिया का कोई दुरुपयोग न हो। अभी भी लगभग 300 युवतियों की फाइलें लंबित हैं, जिन पर कानून और सुरक्षा के तमाम पहलुओं को परखने के बाद ही अगला निर्णय लिया जाएगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 मिनट पहले

यह घटनाक्रम कूटनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच के महीन संतुलन को रेखांकित करता है। यद्यपि मानवीय दृष्टिकोण से केंद्र सरकार की यह विशेष अनुमति सराहनीय है, लेकिन खुफिया एजेंसियों को शेष 300 लंबित मामलों की पृष्ठभूमि और तीसरे देशों के जरिए होने वाली आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखनी होगी ताकि सुरक्षा तंत्र से कोई समझौता न हो।

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