मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार नजदीक आते ही मिष्ठान बाजारों में अभूतपूर्व रौनक देखने को मिल रही है। इस खास अवसर पर बुरहानपुर की प्रसिद्ध पारंपरिक मिठाइयों, मुख्य रूप से खाजा और फैनी, की मांग अत्यधिक बढ़ गई है। स्थानीय बाजारों में हलवाइयों ने इन पारंपरिक व्यंजनों को तैयार करने का कार्य जोर-शोर से शुरू कर दिया है। दुकानों पर खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ रही है, क्योंकि रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने के बाद उन्हें मुख्य रूप से खाजा और फैनी भेंट करती हैं। यह खास परंपरा यहां कई पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी पूरी श्रद्धा तथा मिठास के साथ निभाई जाती है।
हफ्ते भर तक खराब नहीं होता खाजा: जानिए इसकी खासियत
बुरहानपुर के खाजा की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्वादिष्ट होना और इसकी लंबी शेल्फ लाइफ है। खाजा न केवल खाने में बेहद लज़ीज़ और कुरकुरा होता है, बल्कि इसे सही तरीके से रखने पर यह लगभग एक सप्ताह तक बिल्कुल तरोताजा और सुरक्षित रहता है। यही वजह है कि लोग त्योहार के दौरान इसे दूर-दराज रहने वाले अपने रिश्तेदारों और भाइयों के लिए आसानी से खरीदकर ले जाते हैं। परिवहन के दौरान भी इसके खराब होने या स्वाद बिगड़ने का कोई डर नहीं रहता, जिससे यह बुरहानपुर के निवासियों के लिए रक्षाबंधन का सबसे पसंदीदा उपहार बन चुका है।
रवा, मैदा और घी से बनती है यह लज़ीज़ मिठाई: रेसिपी और प्रक्रिया
खाजा तैयार करने की पारंपरिक और प्रामाणिक विधि के बारे में विस्तार से बताते हुए एक्सपर्ट हलवाई निलेश राजपूत ने बताया कि इस मिठाई को बनाने के लिए मुख्य रूप से चार सामग्रियों रवा, मैदा, शुद्ध घी और शक्कर का उपयोग किया जाता है।
हलवाई निलेश राजपूत के अनुसार, खाजा बनाने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाती है
- आटा तैयार करना: सबसे पहले रवा और मैदा को सही अनुपात में मिलाकर आटा गूंथा जाता है। इस दौरान आटे में पर्याप्त मात्रा में घी मिलाया जाता है, जो मिठाई को सही कुरकुरापन प्रदान करता है।
- परतें और आकार देना: तैयार आटे की पतली-पतली परतें बनाई जाती हैं और फिर उन्हें लपेटकर खाजा का पारंपरिक आकार दिया जाता है।
- घी में तलना: आकार देने के बाद इन परतों को धीमी और मध्यम आंच पर घी में अच्छी तरह से सेका और तला जाता है, जिससे यह अंदर तक पूरी तरह से पक जाए।
- चाशनी में डुबोना: अंत में, तले हुए गरम खाजा को शक्कर से तैयार चाशनी में डुबोया जाता है। चाशनी की परत चढ़ते ही खाजा बाहर से एकदम कुरकुरा और अंदर से स्वादिष्ट बन जाता है।
फैनी और घर पर खाजा बनाने की पुरानी परंपरा
खाजा के साथ-साथ बुरहानपुर में फैनी की भी रक्षाबंधन पर भारी खपत होती है। बहनें पूजा की थाली में रक्षा सूत्र के साथ फैनी और खाजा रखकर अपने भाइयों का मुंह मीठा कराती हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पीढ़ियों पुरानी यह परंपरा बुरहानपुर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुकी है।
यदि आप इस रक्षाबंधन पर बाजार की तैयार मिठाइयों के बजाय घर पर ही कुछ पारंपरिक और शुद्ध व्यंजन बनाना चाहते हैं, तो खाजा एक बेहतरीन विकल्प है। रसोई में आसानी से उपलब्ध रवा, मैदा, शक्कर और घी की मदद से इसे घर पर सरलता से तैयार किया जा सकता है। घर का बना खाजा न केवल त्योहार के आनंद को बढ़ाएगा, बल्कि भाई-बहन के इस अटूट रिश्ते में मिठास भी घोलेगा।



















