अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले स्विस फ्रैंक लगातार दबाव के दौर से गुजर रहा है। स्विस फेडरल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस की तरफ से जारी रोजगार के मजबूत आंकड़ों के बावजूद स्विस फ्रैंक को कोई खास सहारा नहीं मिल सका। विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में USD/CHF करेंसी जोड़ी 0.8063 के स्तर पर कारोबार करती देखी गई, जो इसके साप्ताहिक उच्च स्तर के बेहद करीब है। कारोबारी सत्र के दौरान निचले स्तरों पर 0.8050 का मजबूत सपोर्ट बना रहा, जिससे गिरावट सीमित रही। इस समय वैश्विक वित्तीय बाजारों का पूरा ध्यान अमेरिका के पर्सनल कंजप्शन एक्सपेंडिचर (पीसीई) मुद्रास्फीति आंकड़ों पर टिका हुआ है, जिसने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को हवा दे दी है।
स्विस रोजगार बाजार में मजबूती के बावजूद नहीं दिखा फ्रैंक पर असर
स्विस फेडरल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, चालू वर्ष की दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र को छोड़कर कुल रोजगार 2 प्रतिशत बढ़कर 5.968 मिलियन के स्तर पर पहुंच गया। इससे पिछली तिमाही यानी वर्ष की पहली तिमाही में यह आंकड़ा 5.537 मिलियन दर्ज किया गया था। रोजगार के इस आंकड़े में आई बढ़ोतरी से स्पष्ट संकेत मिलता है कि स्विट्जरलैंड की अर्थव्यवस्था में श्रम मांग मजबूत बनी हुई है। इसके साथ ही, जून तक समाप्त हुई तीन महीनों की अवधि में नौकरियों के खाली पदों की संख्या में भी 2,600 की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे कुल खाली पदों की संख्या बढ़कर 98,700 हो गई।
श्रम बाजार की इस स्थिति का विश्लेषण करते हुए आंकड़ों में यह भी खुलासा किया गया कि लगभग 33.9 प्रतिशत कंपनियों को कुशल कर्मचारियों की भर्ती करने में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सामान्य आर्थिक सिद्धांतों के अनुसार, जब किसी देश का लेबर मार्केट इतना सख्त होता है और कंपनियों को खाली पद भरने के लिए संघर्ष करना पड़ता है, तो वहां वेतन वृद्धि का दबाव बढ़ता है। कंपनियाँ कुशल पेशेवरों को आकर्षित करने के लिए अधिक वेतन की पेशकश करती हैं, जिससे मजदूरी में मुद्रास्फीति बढ़ती है। हालांकि, इतने मजबूत श्रम बाजार आंकड़ों के बावजूद विदेशी मुद्रा बाजार में स्विस फ्रैंक की विनिमय दर पर इसका असर पूरी तरह से बेअसर और सीमित नजर आया।
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेजी और फेडरल रिजर्व की दर नीति
स्विस आंकड़ों के फीके रहने के पीछे मुख्य कारण अमेरिका से आने वाले आर्थिक संकेत और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति से जुड़ी उम्मीदें हैं। डॉयचे बैंक के वित्तीय विश्लेषकों ने इस बाजार स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हालांकि सितंबर महीने में फेड द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना में बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ है और यह 36 प्रतिशत से मामूली बढ़कर 37 प्रतिशत हुई है, लेकिन भविष्य की दर चक्र वक्र (रेट कर्व) में उल्लेखनीय बदलाव देखा गया है। बाजार अब अगले वर्ष जून तक ब्याज दरों में 42 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की उम्मीद लगा रहा है, जो एक ही दिन में 3.7 बेसिस पॉइंट्स का उछाल दर्शाता है।
दरों की इस नई उम्मीद का सीधा असर अमेरिकी बांड बाजार पर पड़ा है। बेंचमार्क 2 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 3.6 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 4.21 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई। बांड यील्ड में हुई इस बढ़ोतरी ने अमेरिकी डॉलर को अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले काफी मजबूती प्रदान की है। इसी वजह से निवेशकों का रुझान स्विस फ्रैंक जैसे सुरक्षित निवेश समझे जाने वाले संपत्तियों से हटकर उच्च प्रतिफल देने वाले अमेरिकी डॉलर की ओर बना हुआ है।
जैक्सन होल सम्मेलन में केविन वॉश के भाषण पर टिकी निगाहें
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार के कारोबारी अब शुक्रवार को होने वाले जैक्सन होल आर्थिक सम्मेलन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष के रूप में केविन वॉश अपना पहला जैक्सन होल भाषण देने की तैयारी कर रहे हैं। बाजार सहभागियों की उम्मीदें सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं हैं कि सितंबर में ब्याज दरें बढ़ेंगी या स्थिर रहेंगी, बल्कि वे आने वाले महीनों में अमेरिकी केंद्रीय बैंक के दीर्घकालिक मौद्रिक नीति रुख को लेकर स्पष्ट दिशा संकेत की तलाश में हैं। वॉश के वक्तव्य से यह स्पष्ट हो सकता है कि फेड मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक नीति को कितना सख्त बनाए रखेगा।
यूरोपीय सत्र में GBP/USD और EUR/USD की चाल
डॉलर की सर्वव्यापी मजबूती के बीच अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ों में भी सुस्ती और समेकन (कंसोलिडेशन) देखा जा रहा है। गुरुवार को यूरोपीय कारोबारी घंटों के दौरान GBP/USD करेंसी जोड़ी 1.3600 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे अपने साप्ताहिक दायरे के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रही थी। हालांकि, फेड अध्यक्ष केविन वॉश के शुक्रवार के भाषण से पहले व्यापारी कोई नया दिशात्मक दांव लगाने से बच रहे हैं, जिससे पाउंड में और अधिक गिरावट थमी हुई है।
दूसरी ओर, EUR/USD करेंसी जोड़ी यूरोपीय सत्र में 1.1650 के स्तर के आसपास अपनी सीमा बनाए रखने में सफल रही है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) द्वारा दरों को सख्त बनाए रखने की हॉकिश उम्मीदों ने यूरो को समर्थन दिया है। इस समर्थन के कारण अमेरिकी पीसीई आंकड़ों के बाद मजबूत हुए डॉलर के दबाव के बावजूद यूरो ज्यादा नीचे नहीं गिरा। वर्तमान में मुद्रा बाजारों का ध्यान मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और जल्द जारी होने वाले अमेरिकी शुरुआती बेरोजगारी दावों (जॉबलेस क्लेम्स) के आंकड़ों पर केंद्रित है।



















