त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही भारतीय घरों में मिठाइयों, मावा, दूध और पनीर की मांग में अचानक भारी उछाल आता है। मांग और आपूर्ति के इसी अंतर का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्व बड़े पैमाने पर सिंथेटिक पनीर, मिलावटी मावा और जहरीला दूध तैयार कर बाजार में खपाने लगते हैं। हाल के दिनों में देश के विभिन्न राज्यों में खाद्य सुरक्षा विभागों की छापेमारी के दौरान सैकड़ों टन मिलावटी डेयरी उत्पाद जब्त कर नष्ट किए गए हैं। इसके बावजूद चोरी-छुपे बाजार में मिलावटी सामान धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। ऐसे में मिलावटी और नकली खाद्य पदार्थों का सेवन आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
दूध और मावा में मिलावट के स्वास्थ्य पर दुष्परिणाम
सर गंगाराम अस्पताल के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ मोहसिन वली का कहना है कि आज के दौर में पनीर, दूध, मावा और लाल मिर्च जैसे दैनिक मसालों में जिस पैमाने पर मिलावट हो रही है, वह बेहद डरावनी और चिंताजनक है। इन मिलावटी चीजों का नियमित या अत्यधिक सेवन शरीर को गंभीर रूप से बीमार बना सकता है। डॉ मोहसिन वली के अनुसार, व्यापारी दूध की मात्रा यानी वॉल्यूम बढ़ाने के लिए उसमें स्टार्च, डिटर्जेंट और मैदा जैसी खतरनाक चीजें मिलाते हैं। जब यह रसायन और अनुपयुक्त सामग्री पेट में पहुंचती है, तो इसका सीधा असर पाचन तंत्र और महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है।
डॉ मोहसिन वली ने चेतावनी दी है कि मिलावटी दूध या इससे बने उत्पादों का सेवन करने से पेट दर्द, डिहाइड्रेशन, त्वचा और पेट की गंभीर एलर्जी, टाइफाइड और तेज बुखार जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं। इतना ही नहीं, लंबे समय तक ऐसे सिंथेटिक और रसायनयुक्त पदार्थों के सेवन से लिवर और किडनी को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने मिलावटखोरी को समाज के प्रति एक बड़ा अपराध और पाप करार दिया, जिसे आज के समय में लोग खुलेआम अंजाम दे रहे हैं।
पैक्ड फूड पर बढ़ती निर्भरता और छिपे खतरे
आजकल आधुनिक जीवनशैली के कारण अधिकांश घरों में पारंपरिक शुद्ध खाद्य पदार्थों की जगह पैकेट बंद चीजों का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। डॉ मोहसिन वली के अनुसार, बाजारों में मिलने वाले पैक्ड प्रोडक्ट्स पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि उपभोक्ताओं को अक्सर यह पता ही नहीं होता कि पैकेट के अंदर असली सामग्री है या फिर मिलावटी तत्व। पुराने समय में घरों में दूध और मावा की शुद्धता को लेकर जो सतर्कता बरती जाती थी, वह अब धीरे-धीरे गायब होती जा रही है। पैकेट बंद खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले मिलावटी तत्व चुपचाप इंसान की सेहत को भीतर से खोखला कर रहे हैं।
घर पर असली और नकली पनीर-दूध की आसान पहचान
बाजार से लाए जा रहे डेयरी प्रोडक्ट्स शुद्ध हैं या मिलावटी, इसकी जांच घर पर ही की जा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि खाने-पीने की चीजों का सेवन करने से पहले उनकी शुद्धता की पुष्टि करना अत्यंत आवश्यक है। डॉ बीपी त्यागी ने नकली पनीर और दूध की जांच के लिए बेहद सरल और असरदार तरीके साझा किए हैं। त्यौहारों के समय मिलावट की बढ़ती शिकायतों के बीच उपभोक्ता महज दो आसान स्टेप्स अपनाकर मिलावटी सामान की पहचान कर सकते हैं।
डॉ बीपी त्यागी के अनुसार, दूध या पनीर की शुद्धता जांचने के लिए उस पर आयोडीन की कुछ बूंदें डालें। यदि आयोडीन डालते ही दूध या पनीर का रंग बदलकर काला या गहरा नीला हो जाता है, तो इसका सीधा अर्थ है कि उसमें स्टार्च या मैदा मिलाया गया है। शुद्ध डेयरी उत्पाद में आयोडीन का रंग नहीं बदलता है।
भुने चने और अन्य खाद्य पदार्थों की शुद्धता कैसे परखें
पनीर और दूध के अलावा त्यौहारों में इस्तेमाल होने वाले भुने चने और अन्य सामग्रियों की शुद्धता भी आसानी से जांची जा सकती है। डॉ बीपी त्यागी के अनुसार, भुने चने को हाथ से मसलकर देखें। यदि चना मसलने पर भुरभरा होकर बिखर जाता है या पूरी तरह टूट जाता है, तो समझ लें कि उसमें मिलावट की गई है।
इसके विपरीत, असली और शुद्ध चने की पहचान करने के लिए उसे पानी से भरे बर्तन में डाल दें। शुद्ध और असली चना वजन के कारण तुरंत पानी में नीचे बैठ जाता है। वहीं अगर चना पानी की सतह पर तैरता रहे, तो समझ लें कि वह पूरी तरह नकली या मिलावटी है। इन आसान और घरेलू नुस्खों को अपनाकर परिवार को मिलावटी खाद्य पदार्थों के गंभीर खतरों से सुरक्षित रखा जा सकता है।



















