बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में बगहा स्थित तिरुपति शुगर्स मिल के मुख्य सर्वर और SAP सिस्टम को अज्ञात साइबर हैकरों ने निशाना बनाया है। मिल प्रबंधन ने इस मामले में बगहा साइबर थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
18 से 20 अगस्त के बीच सर्वर में हुई सेंधमारी
मिल प्रबंधन की शिकायत के मुताबिक यह साइबर हमला 18 से 20 अगस्त के बीच हुआ। इन तीन दिनों में हैकरों ने मिल के मुख्य सर्वर और उसके SAP सिस्टम में सेंध लगाकर कारोबार से जुड़ा अहम डाटा नुकसान पहुंचाया। प्रबंधन का दावा है कि इस हमले की वजह से मिल को करीब 100 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है। इसके अलावा शिकायत में यह आशंका भी जताई गई है कि करीब एक करोड़ रुपये कीमत का गोपनीय डाटा चोरी हो सकता है।
भुगतान से लेकर चीनी की बिक्री तक हर काम अटका
सर्वर और सॉफ्टवेयर सिस्टम ठप होने का असर मिल के रोजमर्रा के कामकाज पर सीधे तौर पर दिख रहा है। चीनी की बिक्री, बिलिंग, स्टॉक की गिनती और डिस्पैच जैसे जरूरी काम इस वजह से प्रभावित हुए हैं। दरअसल इसी सर्वर में गन्ना किसानों के भुगतान का पूरा हिसाब, मिल का लेखा-जोखा और बाकी कारोबारी जानकारी भी सुरक्षित रखी गई थी, जो मिल के रोजाना के कामकाज की नींव मानी जाती है। सिस्टम खराब होने से यह पूरा डाटा भी खतरे में आ गया है, जिसे लेकर मिल प्रबंधन चिंतित है।
रैनसमवेयर हमले का शक, अभी पुष्टि नहीं
सूत्रों के हवाले से यह आशंका भी जताई जा रही है कि मिल के सर्वर पर रैनसमवेयर के जरिए हमला किया गया हो सकता है। रैनसमवेयर हमलों में आमतौर पर हैकर सिस्टम या डाटा को लॉक कर देते हैं और उसे वापस खोलने के बदले फिरौती मांगते हैं। हालांकि तिरुपति शुगर्स मिल के मामले में अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। साइबर जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि हमला असल में किस तरीके से किया गया और कितना डाटा चोरी या खराब हुआ है।
पुलिस जांच में जुटी, अधिकारियों ने दी जानकारी
केन महाप्रबंधक बीएन त्रिपाठी ने बताया कि सॉफ्टवेयर हैक होने की जानकारी मिलते ही साइबर थाने में इसकी एफआईआर दर्ज कराई गई। साइबर डीएसपी ज्योति कुमारी ने बताया कि पुलिस को इस बारे में आवेदन मिल चुका है और जांच-पड़ताल शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा, "जांच पूरी होने के बाद ही साइबर हमले की असली प्रकृति और नुकसान की सही जानकारी सामने आएगी।" फिलहाल पुलिस सर्वर के लॉग और डिजिटल सबूतों की पड़ताल कर यह पता लगाने में जुटी है कि हमला कहां से और किस तरीके से किया गया।



















