बिहार के नालंदा जिले में स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी राजगीर की पहचान उसके प्राकृतिक गर्म जल के कुंडों से है, जो अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। दुनिया भर से हर साल लाखों श्रद्धालु और सैलानी इन चमत्कारी कुंडों में डुबकी लगाने आते हैं। ऐसी गहरी मान्यता है कि भू-तापीय ऊर्जा से गर्म होने वाले इन कुंडों के जल में स्नान करने से त्वचा के पुराने रोग और जोड़ों के दर्द जैसी कई गंभीर बीमारियां ठीक हो जाती हैं। जमीन के भीतर मौजूद इन भूगर्भीय स्रोतों के कारण यहां का पानी साल के बारह महीने गर्म रहता है। मुख्य आकर्षण माने जाने वाले ब्रह्मकुंड का तापमान आमतौर पर 45 से 50 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जाता है, जो पर्यटकों के लिए हमेशा से कौतूहल का विषय रहा है। लेकिन, पिछले कुछ वक्त से इस अमूल्य प्राकृतिक धरोहर पर गहरा संकट मंडरा रहा है और राजगीर के कई प्रतिष्ठित कुंड पूरी तरह सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं।
गंगा और जमुना समेत कई प्रमुख कुंड सूखे
जल संकट की स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि गंगा कुंड, जमुना कुंड, मार्कंडेय कुंड और व्यास कुंड जैसे ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व वाले कई गर्म जल स्रोत लगभग पूरी तरह से सूख चुके हैं। वर्तमान में, विशाल ब्रह्मकुंड परिसर के भीतर केवल दो ही ऐसे कुंड बचे हैं जिनमें पानी आ रहा है। राजगीर पहुंचने वाले तमाम श्रद्धालु और विदेशी पर्यटक अब पूरी तरह से इन्हीं बचे हुए दो कुंडों पर निर्भर होकर रह गए हैं। इससे स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों में भारी निराशा और चिंता का माहौल है। यह जल स्रोत केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं है, बल्कि राजगीर की पूरी पर्यटन अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। मलमास मेला, मकर संक्रांति और अन्य विशेष धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां आस्था का भारी सैलाब उमड़ता है। ऐसे में कुंडों के जल का सूखना एक बहुत बड़े आर्थिक और सांस्कृतिक नुकसान का सीधा संकेत दे रहा है।
स्थानीय लोगों ने बुलाई महापंचायत, रखीं सात सूत्री मांगें
इस विकट परिस्थिति और प्राकृतिक धरोहर को हमेशा के लिए खत्म होने से बचाने के लिए स्थानीय निवासियों ने लामबंद होकर राजगीर में एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया। इस अहम बैठक में सरकार और जिला प्रशासन के सामने सात सूत्री गंभीर मांगें रखी गईं। लोगों की सबसे प्रमुख मांग यह है कि कुंड परिसर से एक किलोमीटर के दायरे में चल रहे सभी प्रकार की बोरिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। स्थानीय निवासियों का मानना है कि जमीन से अंधाधुंध पानी निकाले जाने के कारण ही कुंडों का जलस्तर गिरा है। इसके साथ ही, बेलभा डोभ तालाब की उड़ाई और सफाई कराने की भी विशेष मांग की गई है ताकि जल संचयन की प्रक्रिया बेहतर हो सके और जलस्तर में सुधार आए।
भूवैज्ञानिक जांच की मांग और आंदोलन की चेतावनी
महापंचायत में मौजूद लोगों ने पुरजोर तरीके से यह भी मांग की कि इस पूरे मामले की विशेषज्ञ भूगर्भीय वैज्ञानिकों की टीम से विस्तृत जांच कराई जाए। स्थानीय लोगों का स्पष्ट रूप से कहना है कि अगर समय रहते इस दिशा में ठोस और वैज्ञानिक कदम नहीं उठाए गए, तो राजगीर की यह गौरवशाली ऐतिहासिक धरोहर हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दफन हो जाएगी। उन्होंने प्रशासन को सख्त चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन कुंडों को बचाने का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले समय में इस मुद्दे पर बड़े स्तर पर उग्र आंदोलन किया जाएगा। जनता का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है और वे अपनी धरोहर को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।




















