1990 के दशक के मध्य में हिंदी सिनेमा ने एक ऐसे संगीत युग की शुरुआत देखी जिसने बिछड़ने के दर्द को झेल रहे करोड़ों श्रोताओं के दिलों को गहराई से छुआ। उसी दौर का एक सदाबहार गीत 1996 की सुपरहिट फिल्म राजा हिंदुस्तानी का 'परदेसी परदेसी' है। आमिर खान और करिश्मा कपूर पर फिल्माया गया यह भावुक दृश्य दो प्रेमियों के अलग होने की पीड़ा को इतने जीवंत रूप में पेश करता है कि लगभग तीन दशक बीत जाने के बाद भी यह दर्शकों को भावुक कर देता है।
इस अमर गीत के रचनाकार और गायक
इस प्रतिष्ठित गीत को अमर बनाने में इसके गायकों और संगीतकारों की अहम भूमिका रही। मशहूर गायिका अलका याज्ञनिक, उदित नारायण और सपना अवस्थी की सुरीली आवाजों ने गाने के दर्द को और अधिक गहरा बना दिया। प्रख्यात संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण की धुनों और जाने-माने गीतकार समीर के संवेदनशील बोलों ने जुदाई के इस मंज़र को एक यादगार मोड़ दिया।
90 के दशक में दर्दभरे गानों का स्वर्ण काल
यह गाना उस दौर के बड़े संगीतमय रुझान का हिस्सा था, जब बेवफाई और जुदाई पर बने गीतों का दबदबा हर तरफ देखने को मिलता था। मुख्यधारा की फिल्मों के अलावा अताउल्लाह खान के 'अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का' जैसे गीतों ने भी हर गली और नुक्कड़ पर अपनी पहचान बनाई थी। इसी दौर में गायक कुमार सानू ने 24 घंटे में 28 गाने रिकॉर्ड करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया था, जो उस समय ऐसे भावनात्मक और रूहानी गानों की अपार लोकप्रियता को साबित करता है।



















