ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में फ्लावियो बोल्सोनारो की बढ़त से रियाल और बॉन्ड बाजार में मजबूतीघर पर बनाएं शादी और ढाबे जैसी गाढ़ी मिक्स वेज, दही और काजू की ग्रेवी से आएगा असली जायकाशारदीय नवरात्रि से पहले घर से बाहर करें नकारात्मक चीजें, वास्तु नियमों से बढ़ेगी सुख-समृद्धिबिहार एमएलसी चुनाव: मोकामा विधायक अनंत सिंह जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार के लिए नहीं मांगेंगे वोट, सुलह कराने पहुंचे ललन सिंह ने मानी पुरानी चूकअकबरपुर में नीम करौरी बाबा की जन्मस्थली जाने का आसान मार्ग, ट्रेन और बस से ऐसे पहुंचे फिरोजाबादबत्तखों के पैरों में सूजन बन सकती है बंबल फुट का खतरा, पोल्ट्री किसानों के मांस और अंडा उत्पादन पर पड़ेगा असरअक्टूबर के दूसरे हफ्ते में डिजिटल स्क्रीन्स पर सस्पेंस और एक्शन का रोमांच, सामने आई 8 नई रिलीजयूरोपीय बॉन्ड बाजार में बिखराव का डर बढ़ा, यूरो पर गहराया दबावपश्चिम एशिया संकट के बीच शुरू हुई आरबीआई की समीक्षा, क्या महंगा होने वाला है कर्जछतरपुर के किसान ने समझाई गुलाब की खेती, 1 बीघा जमीन से हर दिन कमा रहे 1 से 2 हजार रुपये
अक्षय कुमार से छोटी उम्र में बनी थीं उनकी ऑनस्क्रीन मां, शेफाली शाह ने खोला फिल्म वक्त से जुड़ा दिलचस्प किस्साबॉलीवुड
5 अक्तू॰ 2026, 5:21 pm (1 घंटे पहले)· 0

अक्षय कुमार से छोटी उम्र में बनी थीं उनकी ऑनस्क्रीन मां, शेफाली शाह ने खोला फिल्म वक्त से जुड़ा दिलचस्प किस्सा

फिल्म वक्त में अक्षय कुमार की मां का किरदार निभाने वाली शेफाली शाह ने खुलासा किया है कि उनके नाम की सिफारिश अमिताभ बच्चन ने की थी, जबकि मेकर्स पहले किसी अन्य दिग्गज अभिनेत्री को लेना चाहते थे।

सिनेमा जगत में कई बार ऐसे दिलचस्प संयोग बनते हैं जो किसी फिल्म की पूरी दिशा बदल देते हैं। वर्ष 2005 में रिलीज हुई पारिवारिक ड्रामा फिल्म 'वक्त: द रेस अगेंस्ट टाइम' की कास्टिंग को लेकर भी ऐसा ही एक बेहद रोचक वाकया सामने आया है। इस फिल्म में अभिनेत्री शेफाली शाह ने एक ऐसी मां का किरदार निभाया था, जो उम्र में अपने ऑनस्क्रीन बेटे अक्षय कुमार से असल जिंदगी में काफी छोटी थीं। उस दौरान शेफाली महज 30 से 32 वर्ष की थीं। अब अपनी नई पुस्तक 'द ओडेसिटी ऑफ बीइंग: ए सॉर्ट-ऑफ मेमॉयर' के जरिए अभिनेत्री ने इस फिल्म में अपने चयन और पर्दे के पीछे की पूरी कहानी साझा की है।

जया बच्चन और हेमा मालिनी के नामों पर हुआ था विचार

फिल्म में सुमित्रा यानी सुमी का किरदार पूरी पटकथा की रीढ़ माना गया था, जो पिता और पुत्र के जटिल रिश्तों के बीच एक शांत मगर मजबूत कड़ी बनकर मौजूद रहती है। निर्देशक विपुल शाह शुरुआत में इस महत्वपूर्ण भूमिका के लिए जया बच्चन को कास्ट करने की योजना बना रहे थे, लेकिन किसी वजह से यह बात सिरे नहीं चढ़ सकी। इसके उपरांत दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी के नाम पर भी गंभीरता से विचार किया गया। हालांकि, वर्ष 2003 में आई फिल्म 'बागबान' में अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी की जोड़ी पहले ही दर्शकों के सामने आ चुकी थी। फिल्म निर्माता इस जोड़ी को तुरंत दोहराने के बजाय पर्दे पर कुछ नया और ताजगी भरा संयोजन प्रस्तुत करना चाहते थे।

ये भी पढ़ें

गुजराती नाटक से प्रेरित थी कहानी और किरदार का चुनाव

यह पारिवारिक फिल्म दरअसल आतिश कपाड़िया के मशहूर गुजराती नाटक 'आवजो व्हाला, फरी मलीशु' पर आधारित थी। इस फिल्म में प्रियंका चोपड़ा ने भी मुख्य भूमिका निभाई थी। जब शेफाली शाह ने यह मूल नाटक देखा था, तो वह सुमी के सशक्त चरित्र से बेहद प्रभावित हुई थीं। उन्होंने स्वयं विपुल शाह से इस किरदार को निभाने की इच्छा जताई थी। मगर उस वक्त विपुल शाह ने उन्हें साफ तौर पर मना कर दिया था। उनका मानना था कि महज 30 वर्ष की उम्र में पर्दे पर एक युवा अभिनेता की मां बनने से शेफाली के करियर पर टाइपकास्ट होने का जोखिम बढ़ जाएगा और उन्हें भविष्य में केवल मां के रोल मिलने लगेंगे।

अमिताभ बच्चन के एक सुझाव से बदला पूरा फैसला

कास्टिंग को लेकर चल रही उलझन के बीच असली मोड़ तब आया जब फिल्म में पिता का किरदार निभा रहे अमिताभ बच्चन ने खुद पहल की। पिता की भूमिका के लिए अमिताभ बच्चन ही पहली और एकमात्र पसंद थे। जब मां के रोल के लिए अन्य विकल्पों पर बात नहीं बन पा रही थी, तो अमिताभ बच्चन ने निर्देशक विपुल शाह को शेफाली शाह का नाम सुझाया। सदी के महानायक की इस सिफारिश को निर्देशक टाल नहीं सके और आखिरकार यह किरदार शेफाली की झोली में आ गया। अभिनेत्री के लिए यह निर्णय किसी सपने के सच होने जैसा साबित हुआ, क्योंकि इसके जरिए उन्हें अपने पसंदीदा सह-कलाकार अमिताभ बच्चन और निर्देशक विपुल शाह के साथ एक साथ काम करने का शानदार अवसर प्राप्त हुआ।

सवाल-जवाब

फिल्म वक्त किस साल रिलीज हुई थी?
यह फिल्म वर्ष 2005 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी।
फिल्म में मां के किरदार के लिए पहली पसंद कौन थीं?
निर्देशक विपुल शाह शुरुआत में इस रोल के लिए जया बच्चन को कास्ट करना चाहते थे।
हेमा मालिनी को इस किरदार में क्यों नहीं लिया गया?
अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी की जोड़ी वर्ष 2003 की फिल्म बागबान में आ चुकी थी, इसलिए मेकर्स कुछ नया संयोजन चाहते थे।
शेफाली शाह के नाम की सिफारिश किसने की थी?
फिल्म में पिता का रोल निभा रहे अमिताभ बच्चन ने निर्देशक विपुल शाह को शेफाली शाह का नाम सुझाया था।
फिल्म वक्त की कहानी किस पर आधारित थी?
यह फिल्म आतिश कपाड़िया के गुजराती नाटक 'आवजो व्हाला, फरी मलीशु' पर आधारित थी।
शेफाली शाह ने इस पूरे किस्से का खुलासा कहां किया है?
उन्होंने अपनी नई किताब 'द ओडेसिटी ऑफ बीइंग: ए सॉर्ट-ऑफ मेमॉयर' में इस बात की जानकारी दी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp