सिनेमा जगत में कई बार ऐसे दिलचस्प संयोग बनते हैं जो किसी फिल्म की पूरी दिशा बदल देते हैं। वर्ष 2005 में रिलीज हुई पारिवारिक ड्रामा फिल्म 'वक्त: द रेस अगेंस्ट टाइम' की कास्टिंग को लेकर भी ऐसा ही एक बेहद रोचक वाकया सामने आया है। इस फिल्म में अभिनेत्री शेफाली शाह ने एक ऐसी मां का किरदार निभाया था, जो उम्र में अपने ऑनस्क्रीन बेटे अक्षय कुमार से असल जिंदगी में काफी छोटी थीं। उस दौरान शेफाली महज 30 से 32 वर्ष की थीं। अब अपनी नई पुस्तक 'द ओडेसिटी ऑफ बीइंग: ए सॉर्ट-ऑफ मेमॉयर' के जरिए अभिनेत्री ने इस फिल्म में अपने चयन और पर्दे के पीछे की पूरी कहानी साझा की है।
जया बच्चन और हेमा मालिनी के नामों पर हुआ था विचार
फिल्म में सुमित्रा यानी सुमी का किरदार पूरी पटकथा की रीढ़ माना गया था, जो पिता और पुत्र के जटिल रिश्तों के बीच एक शांत मगर मजबूत कड़ी बनकर मौजूद रहती है। निर्देशक विपुल शाह शुरुआत में इस महत्वपूर्ण भूमिका के लिए जया बच्चन को कास्ट करने की योजना बना रहे थे, लेकिन किसी वजह से यह बात सिरे नहीं चढ़ सकी। इसके उपरांत दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी के नाम पर भी गंभीरता से विचार किया गया। हालांकि, वर्ष 2003 में आई फिल्म 'बागबान' में अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी की जोड़ी पहले ही दर्शकों के सामने आ चुकी थी। फिल्म निर्माता इस जोड़ी को तुरंत दोहराने के बजाय पर्दे पर कुछ नया और ताजगी भरा संयोजन प्रस्तुत करना चाहते थे।
गुजराती नाटक से प्रेरित थी कहानी और किरदार का चुनाव
यह पारिवारिक फिल्म दरअसल आतिश कपाड़िया के मशहूर गुजराती नाटक 'आवजो व्हाला, फरी मलीशु' पर आधारित थी। इस फिल्म में प्रियंका चोपड़ा ने भी मुख्य भूमिका निभाई थी। जब शेफाली शाह ने यह मूल नाटक देखा था, तो वह सुमी के सशक्त चरित्र से बेहद प्रभावित हुई थीं। उन्होंने स्वयं विपुल शाह से इस किरदार को निभाने की इच्छा जताई थी। मगर उस वक्त विपुल शाह ने उन्हें साफ तौर पर मना कर दिया था। उनका मानना था कि महज 30 वर्ष की उम्र में पर्दे पर एक युवा अभिनेता की मां बनने से शेफाली के करियर पर टाइपकास्ट होने का जोखिम बढ़ जाएगा और उन्हें भविष्य में केवल मां के रोल मिलने लगेंगे।
अमिताभ बच्चन के एक सुझाव से बदला पूरा फैसला
कास्टिंग को लेकर चल रही उलझन के बीच असली मोड़ तब आया जब फिल्म में पिता का किरदार निभा रहे अमिताभ बच्चन ने खुद पहल की। पिता की भूमिका के लिए अमिताभ बच्चन ही पहली और एकमात्र पसंद थे। जब मां के रोल के लिए अन्य विकल्पों पर बात नहीं बन पा रही थी, तो अमिताभ बच्चन ने निर्देशक विपुल शाह को शेफाली शाह का नाम सुझाया। सदी के महानायक की इस सिफारिश को निर्देशक टाल नहीं सके और आखिरकार यह किरदार शेफाली की झोली में आ गया। अभिनेत्री के लिए यह निर्णय किसी सपने के सच होने जैसा साबित हुआ, क्योंकि इसके जरिए उन्हें अपने पसंदीदा सह-कलाकार अमिताभ बच्चन और निर्देशक विपुल शाह के साथ एक साथ काम करने का शानदार अवसर प्राप्त हुआ।



















