भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने सोमवार को अपनी तीन दिवसीय द्विमासिक समीक्षा बैठक की शुरुआत कर दी है। पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात में बढ़ते तनाव ने वैश्विक और घरेलू स्तर पर मुद्रास्फीति के जोखिमों को नए सिरे से भड़का दिया है। ऐसे नाजुक आर्थिक माहौल में वित्तीय विशेषज्ञों और बैंकरों के एक बड़े वर्ग का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि करने का कड़ा कदम उठा सकता है। विश्लेषकों का यह भी मानना है कि यदि इस बैठक में ब्याज दरों को बढ़ाया जाता है, तो यह केंद्रीय बैंक के समग्र नीतिगत रुख में एक अहम बदलाव का स्पष्ट संकेत होगा।
7 अक्टूबर को सुबह घोषित किए जाएंगे नीतिगत फैसले
केंद्रीय बैंक ने साल 2025 के दौरान दरों में कटौती की शुरुआत करने के बाद से एक लंबे अरसे तक अपने नीतिगत रुख में कोई बड़ा फेरबदल नहीं किया है। रिजर्व बैंक ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए बताया कि अर्थव्यवस्था से जुड़ी अंतर्दृष्टि, ताजा आकलन और आगे के नीतिगत दिशा-निर्देश जल्द ही जनता के समक्ष रखे जाएंगे। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि मौद्रिक नीति समिति की इस तीन दिवसीय गहन चर्चा के बाद लिए गए अंतिम फैसलों की घोषणा 7 अक्टूबर को सुबह 10 बजे सार्वजनिक रूप से की जाएगी।
फरवरी 2023 से लेकर अब तक की ब्याज दर यात्रा
ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछली बार फरवरी 2023 में रेपो दर को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 6.50 प्रतिशत पर पहुंचाया था। उस फैसले के बाद पूरे वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया और लंबे समय तक स्थिरता बनाए रखी। इसके उपरांत वर्ष 2025 में आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए दरों में कटौती का सिलसिला शुरू किया गया था, जिसके चलते वर्तमान समय में रेपो दर घटकर 5.25 प्रतिशत के स्तर पर मौजूद है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों और बैंकरों के बीच सामने आए रुझानों के अनुसार, अधिकांश विश्लेषकों को लगता है कि इस बार केंद्रीय बैंक रेपो दर में इजाफा कर सकता है, हालांकि नीतिगत रुख के औपचारिक बदलाव पर वित्तीय जानकारों के बीच अलग-अलग राय देखने को मिल रही है।
क्या मौजूदा स्तर पर ही थमी रहेगी नीतिगत दर
ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की चर्चाओं के बीच कुछ अर्थशास्त्री यथास्थिति बनाए रखने के पक्ष में भी तर्क दे रहे हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का मानना है कि रिजर्व बैंक फिलहाल रेपो रेट को उसके मौजूदा स्तर पर ही बरकरार रख सकता है। मदन सबनवीस ने कहा, "हम मानते हैं कि अगला ब्याज दर चक्र 0.50-0.75 प्रतिशत की बढ़ोतरी वाला होगा, लेकिन हमारा मानना है कि अक्टूबर की समीक्षा में रेपो रेट पर विराम ही रहेगा।" इस आकलन से स्पष्ट है कि केंद्रीय बैंक निकट भविष्य में दरों में इजाफा करने की तैयारी भले ही कर रहा हो, लेकिन मौजूदा बैठक में वह परिस्थितियों पर करीब से नजर बनाए रखने का विकल्प भी चुन सकता है।
अक्टूबर और दिसंबर दोनों महीनों में दरें बढ़ने का अनुमान
दूसरी तरफ, प्रमुख वैश्विक वित्तीय संस्थान गोल्डमैन सैक्स का आर्थिक परिप्रेक्ष्य कहीं अधिक आक्रामक रुख की ओर इशारा करता है। फर्म की एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में यह रेखांकित किया गया है कि अगस्त में हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक का विस्तृत ब्योरा आधिकारिक नीतिगत वक्तव्य की तुलना में काफी सख्त था। समिति के सदस्यों ने इस तथ्य को स्वीकार किया था कि खाद्य सामग्री और ईंधन की बढ़ती कीमतों से उत्पन्न होने वाली महंगाई अर्थव्यवस्था में दूसरे दौर के व्यापक असर छोड़ सकती है। यदि मूल्य वृद्धि का यह दबाव व्यापक और स्थायी रूप लेता है, तो केंद्रीय बैंक को सख्त नीतिगत कदम उठाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
गोल्डमैन सैक्स ने अपनी ताजा रिपोर्ट में निष्कर्ष निकालते हुए कहा, "इसलिए अब हमारा अनुमान है कि आरबीआई अक्टूबर और दिसंबर में रेपो रेट में 0.25-0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है। इसके साथ एमपीसी अपने रुख को 'तटस्थ' से बदलकर 'संतुलित सख्ती' या 'समायोजन वापस लेने' वाला कर सकती है।" ऐसे में यदि यह अनुमान सच साबित होता है, तो आने वाले महीनों में कर्जदारों के लिए वित्तीय चुनौतियां बढ़ सकती हैं।


















