बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर जनता दल यूनाइटेड के भीतर सियासी घमासान तेज हो गया है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ मोकामा विधायक अनंत सिंह के खुले विरोध के बाद पार्टी नेतृत्व हरकत में आ गया है। इस आंतरिक टकराव को शांत करने के लिए जदयू ने वरिष्ठ नेता ललन सिंह को अधिकृत किया, जिन्होंने मोकामा विधायक से सीधे बातचीत की। हालांकि लंबी चर्चा के बाद भी अनंत सिंह अपने रुख पर कायम रहे और उन्होंने दो टूक शब्दों में कह दिया कि वे पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में किसी भी हाल में चुनाव प्रचार नहीं करेंगे।
ललन सिंह ने स्वीकारी नेतृत्व की चूक, सार्वजनिक बयानबाजी रोकने पर बनी सहमति
विधायक अनंत सिंह के साथ बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब हुए ललन सिंह ने माना कि विवाद की जड़ें काफी पुरानी हैं। उन्होंने कहा कि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है और ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती। ललन सिंह के अनुसार विधानसभा चुनाव के दौरान अनंत सिंह का विरोध हुआ था, लेकिन उस समय पार्टी नेतृत्व ने इस मामले को सुलझाने पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि यह पार्टी नेतृत्व की ओर से हुई एक बड़ी चूक थी।
ललन सिंह ने बातचीत का ब्योरा साझा करते हुए बताया कि अनंत सिंह का साफ कहना था कि जिसने पूर्व में उनका राजनीतिक विरोध किया, वे उसके लिए समर्थन मांगने नहीं जाएंगे। इसके बाद ललन सिंह ने विधायक से अनुरोध किया कि वे इस मुद्दे पर कोई भी सार्वजनिक बयान न दें। इस आग्रह पर अनंत सिंह सहमत हो गए हैं, जिससे कम से कम खुली बयानबाजी पर फिलहाल विराम लग गया है।
जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी के समर्थन में उतरे थे अनंत सिंह
यह पूरा विवाद तब खुलकर सामने आया जब बीते गुरुवार को अनंत सिंह ने बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह के नामांकन कार्यक्रम में शिरकत की। नामांकन पत्र दाखिल करने के दौरान अनंत सिंह न केवल अनुज सिंह के साथ मौजूद रहे, बल्कि उन्होंने खुलकर अपना समर्थन भी जताया। इस दौरान उनके साथ भारी संख्या में समर्थक मौजूद थे और उन्होंने एक बड़ा जुलूस भी निकाला था। पार्टी लाइन से अलग जाकर उठाए गए इस कदम ने जदयू के सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी थी।
नीरज कुमार के खिलाफ बगावत और पुरानी राजनीतिक अदावत
अनंत सिंह ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में नीरज कुमार की चुनावी हार देखना चाहते हैं। पार्टी के आधिकारिक रुख के सवाल पर उन्होंने कड़े शब्दों में कहा था कि उन्हें इस बात की परवाह नहीं है कि पार्टी क्या सोचती है, क्योंकि नीरज कुमार ने कई मौकों पर उनका विरोध किया है और वे उन्हें उसी भाषा में जवाब देना चाहते हैं।
दोनों नेताओं के बीच यह तल्खी साल 2015 के विधानसभा चुनाव से चली आ रही है। उस समय अनंत सिंह ने जदयू से अलग होकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोकी थी। तब पार्टी ने नीरज कुमार को उस सीट से अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया था। हालांकि उस कड़े चुनावी मुकाबले में अनंत सिंह ने बड़े अंतर से जीत दर्ज करते हुए अपनी सीट बरकरार रखी थी, लेकिन दोनों नेताओं के बीच शुरू हुई वह अदावत आज भी बरकरार है।



















