सोशल मीडिया पर ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप की मुश्किलें बढ़ गई हैं. गुजरात के सूरत की एक ट्रायल कोर्ट ने बार-बार बुलाए जाने के बावजूद अदालत में पेश न होने पर कश्यप के खिलाफ वारंट जारी करने का कड़ा निर्देश दिया है. न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत ने उन्हें पहले समन भेजे थे और बाद में सार्वजनिक नोटिस भी जारी किया था, लेकिन उनकी ओर से कोई हाजिरी दर्ज नहीं कराई गई.
विवाद की शुरुआत और सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी
यह पूरा कानूनी मामला फिल्म ‘फुले’ से जुड़े जातिगत विवाद पर चल रही ऑनलाइन बहस से जुड़ा हुआ है. इस बहस के दौरान अनुराग कश्यप ने सोशल मीडिया पर एक यूजर के सवाल या टिप्पणी का जवाब देते हुए कथित तौर पर गुस्से में ब्राह्मण समाज के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था. इस बयान के सार्वजनिक होते ही समाज में व्यापक आक्रोश फैल गया. देश के विभिन्न हिस्सों में इस टिप्पणी के विरोध में प्रदर्शन हुए और लोगों ने उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई.
माफी मांगने और सूरत में आपराधिक शिकायत का घटनाक्रम
बयान पर भारी नाराजगी और विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए अनुराग कश्यप ने पहले यह सफाई पेश की थी कि उनकी बात को गलत संदर्भ में लिया गया है. हालांकि चौतरफा दबाव के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी अभद्र भाषा के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी मांग ली. इसके बावजूद सूरत में धार्मिक और सामाजिक भावनाएं आहत करने के आरोप में उनके खिलाफ एक औपचारिक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई गई. समाज के प्रतिनिधियों का कहना था कि शुरुआत में उनसे सार्वजनिक माफी की मांग की गई थी, लेकिन समय पर उचित कदम न उठाने और आहत भावनाओं के कारण अदालत की शरण लेनी पड़ी.
अदालती कार्रवाई और वारंट जारी होने की वजह
सूरत की ट्रायल कोर्ट ने दायर आपराधिक शिकायत का संज्ञान लेते हुए अनुराग कश्यप को पेशी के लिए समन जारी किए थे. जब समन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो अदालत ने सार्वजनिक नोटिस भी निकाला. इसके बाद भी अदालत में उनकी अनुपस्थिति लगातार बनी रही. न्यायिक आदेशों और प्रक्रियाओं की निरंतर अनदेखी किए जाने के बाद अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिया. अब इस कानूनी मामले की अगली सुनवाई 24 दिसंबर को तय की गई है.



















