अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में 3,870 डॉलर प्रति औंस के नए वार्षिक निचले स्तर तक फिसलने के बाद सोमवार को अमेरिकी कारोबारी सत्र के दौरान मामूली बढ़त देखी गई। पीली धातु ने अक्टूबर के महीने को 6.87% की भारी गिरावट के साथ समाप्त किया था, जिसमें एक ही दिन में 146 डॉलर की ऐतिहासिक गिरावट भी शामिल थी। हालांकि इस ताजा सुधार के बावजूद बाजार में टिकाऊ रिकवरी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि व्यापक आर्थिक परिस्थितियां और मुद्रा बाजार के उतार-चढ़ाव निवेशकों को सतर्क रहने पर मजबूर कर रहे हैं।
विश्लेषकों का तकनीकी रुख और समर्थन स्तर
बाजार के जानकार 3,900 डॉलर के स्तर के आसपास सोने के रुख को लेकर काफी सतर्क बने हुए हैं, लेकिन इस गिरावट के संभावित दायरे पर उनकी राय बिल्कुल अलग है। तकनीकी विश्लेषक जिदान का मानना है कि सोने पर मंदी का दबाव अब भी हावी है और कीमतों में और कमजोरी आ सकती है। जिदान ने नीचे की ओर 3,600 डॉलर से 3,400 डॉलर के बीच एक गहरा ढांचागत समर्थन क्षेत्र चिह्नित किया है। उनके आकलन के अनुसार, यदि बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ता है, तो 3,820 डॉलर से 3,600 डॉलर का दायरा आसानी से खुल सकता है।
इसके विपरीत, बाजार विश्लेषक बटलर ने हालिया 146 डॉलर की एकदिनी तेज गिरावट का उल्लेख करते हुए एक अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। बटलर का तर्क है कि अमेरिकी डॉलर इस समय जरूरत से ज्यादा खरीदे गए स्तर पर पहुंच चुका है और वह एक बड़ी गिरावट के कगार पर खड़ा है। बटलर का कहना है कि ओवरबॉट अमेरिकी डॉलर और गिरती 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड वे दो मुख्य उत्प्रेरक हैं, जो दिशा बदलते ही सोने की गिरावट को थामकर एक तेज उछाल ला सकते हैं। यदि डॉलर कमजोर होता है और यील्ड 4.90% की ओर नीचे आती है, तो सोने की कीमतें दोबारा 4,000 डॉलर के स्तर की ओर लौट सकती हैं।
अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड की भूमिका
सोने के आगामी रुझान को समझने के लिए वैश्विक निवेशक अमेरिकी मुद्रा और सरकारी ऋण प्रतिभूतियों के रिटर्न पर पैनी नजर रखे हुए हैं। जब अमेरिकी डॉलर में नई तेजी देखने को मिलती है, तो यह जिदान के बताए 3,820 डॉलर से 3,600 डॉलर के निचले रास्तों को मजबूती देता है। वहीं दूसरी ओर, यदि डॉलर में बिकवाली शुरू होती है और ट्रेजरी प्रतिभूतियों पर यील्ड गिरती है, तो गैर-ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने की मांग में जोरदार सुधार दर्ज किया जा सकता है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था हाल ही में 3.4% की वार्षिक दर से बढ़ी है, लेकिन इसके बावजूद ट्रेजरी यील्ड में नरमी देखी गई। इस आर्थिक परिदृश्य के बीच नैस्डैक ने अक्टूबर को मार्च 2025 के बाद के अपने सबसे कमजोर मासिक प्रदर्शन के साथ बंद किया। वित्तीय बाजारों में अब महज विकास को सहारा देने के लिए किए जाने वाले पूंजीगत व्यय को प्रीमियम नहीं मिल रहा है, बल्कि निवेशक यह परख रहे हैं कि यह खर्च पूंजी की लागत से अधिक रिटर्न और वास्तविक नकदी प्रवाह उत्पन्न कर पा रहा है या नहीं।
भू-राजनीतिक घटनाक्रम और तेल बाजार की नरमी
सोमवार को कीमती धातु को तेल की गिरती कीमतों से भी कुछ सहारा मिला, जिसका कारण अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों को लेकर उपजी नई उम्मीदें रहीं। ऊर्जा कीमतों में नरमी ने मुद्रास्फीति के तात्कालिक दबाव को कुछ कम किया है। हालांकि, कूटनीतिक प्रगति के चलते सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग पर भी थोड़ा अंकुश लगा, जिससे सोने को निचले स्तरों पर टिकने में मदद मिली। इसके बावजूद, बुनियादी आर्थिक पृष्ठभूमि अभी भी ऐसी है जो धातु की किसी भी टिकाऊ तेजी पर संदेह पैदा करती है।
मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन
वैश्विक मुद्रा बाजारों में भी सप्ताह की शुरुआत में उल्लेखनीय हलचल दर्ज की गई। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) ने सोमवार को एशियाई सत्र की अपनी गिरावट को पूरी तरह पलट दिया। ईरान से जुड़े कूटनीतिक घटनाक्रमों से निवेशकों के विश्वास को बल मिला, जिसने सुरक्षित पनाहगाह माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर पर दबाव बनाया और जोखिम से जुड़ी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को सहारा दिया। हालांकि, गुरुवार को छुए गए एक महीने के उच्च स्तर से यह जोड़ी अभी नीचे बनी हुई है, क्योंकि खरीदार रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के आगामी महत्वपूर्ण निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) ने नए सप्ताह की मजबूत शुरुआत की और शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान (BoJ) की बैठक के बाद बने 157.00 से नीचे के निचले स्तर से उबरते हुए एशियाई सत्र के दौरान 158.00 के करीब पहुंच गया। जापानी मुद्रा में यह कमजोरी जापान के वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा की ओर से मुद्रा हस्तक्षेप की ताजा चेतावनी दिए जाने के बावजूद जारी रही, जिससे यह संकेत मिलता है कि डॉलर का अंतर्निहित रुख कई प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अब भी मजबूत बना हुआ है।
















