भारतीय शेयर बाजार में सक्रिय घरेलू निवेशकों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की टैक्स ढांचे से जुड़ी चिंताओं पर केंद्र सरकार विचार करने के लिए तैयार है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इक्विटी टैक्सेशन को लेकर स्पष्ट किया है कि निवेशकों की तरफ से जो भी प्रतिक्रियाएं और सुझाव सरकार तक पहुंचे हैं, उनका आकलन किया जाएगा। हालांकि, मौजूदा टैक्स व्यवस्था वही है जो साल 2023 में लागू थी, जिस दौरान देश में रिकॉर्ड विदेशी पूंजी का प्रवाह देखने को मिला था। वित्त मंत्री के अनुसार अब बाजार की परिस्थितियां बदल चुकी हैं और विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली का दबाव बढ़ गया है।
बजट में रियायतों पर कोई पक्का आश्वासन नहीं
आगामी बजट के दौरान विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए ज्यादा अनुकूल नियम लाने या विशेष टैक्स छूट देने के सवाल पर वित्त मंत्री ने कोई ठोस आश्वासन देने से परहेज किया। उन्होंने साफ तौर पर माना कि मौजूदा समय में निवेशकों के सामने चुनौतियां और परिस्थितियां पहले जैसी नहीं रहीं और उनकी मांगें अब अधिक मुखर होकर सामने आ रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतिगत स्तर पर सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता देश की आर्थिक विकास दर को 7 फीसदी या उससे अधिक के स्तर पर स्थिर बनाए रखने की है।
मौजूदा एलटीसीजी टैक्स के नियम और सीमाएं
भारत में वर्तमान नियमों के तहत इक्विटी बाजार में घरेलू और विदेशी दोनों तरह के निवेशकों पर लिस्टेड शेयरों की बिक्री से होने वाले लाभ पर 12.5 फीसदी की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स वसूला जाता है। इस टैक्स स्लैब में निवेशकों को इंडेक्सेशन की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती है। यह 12.5 फीसदी का टैक्स किसी एक वित्तीय वर्ष के दौरान लिस्टेड शेयरों से कमाए गए 1.25 लाख रुपये से अधिक के शुद्ध मुनाफे पर लागू होता है, जिस पर निवेशक लंबे समय से राहत की उम्मीद जता रहे हैं।

















