फिल्म अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह ने आयकर विभाग की कथित छापेमारी और जांच से जुड़ी चर्चाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है। हाल के दिनों में उनके नाम, उनके ससुर वासु भगनानी और पैनोरमा स्टूडियो समेत 12 ठिकानों पर कर विभाग की तलाशी से संबंधित कई दावे सामने आए थे। इन सभी अटकलों और चर्चाओं के बीच अभिनेत्री ने सार्वजनिक बयान साझा किया है, जिसमें उन्होंने गैर-सत्यापित खबरों पर गंभीर सवाल खड़े किए और स्थिति की सच्चाई सामने रखने की अपील की।
बिना पुष्टि के चलाई जा रही खबरों पर अभिनेत्री का कड़ा रुख
सोशल मीडिया और विभिन्न सूचना माध्यमों पर चल रही बातों का जवाब देते हुए अभिनेत्री ने अपनी साख की रक्षा के लिए विस्तृत बात रखी। सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवार में पली-बढ़ी रकुल प्रीत सिंह ने कहा कि बिना किसी ठोस प्रमाण के बातों को सनसनीखेज बनाना बेहद निराशाजनक है। उनका कहना था कि डिजिटल मंचों और मुख्यधारा के माध्यमों में बिना आवश्यक पड़ताल के कई गलत जानकारियां प्रसारित की गईं, जिससे भ्रम का माहौल बना।
कर अनुपालन और वित्तीय ईमानदारी पर दिया स्पष्टीकरण
अभिनेत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह तलाशी अभियान उनके संदर्भ में नहीं था। अपनी पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि मनोरंजन जगत में उनका कोई गॉडफादर नहीं रहा है और उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने बताया कि वह कानून का सम्मान करने वाली नागरिक हैं और 20 वर्ष की आयु से ही अपने सभी आवश्यक करों का नियमित भुगतान करती आ रही हैं।
बेनामी संपत्ति और विदेशी लेनदेन के आरोपों का खंडन
वित्तीय अनियमितताओं और संपत्तियों से जुड़े दावों को सिरे से खारिज करते हुए अभिनेत्री ने कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर या किसी प्रोडक्शन हाउस के माध्यम से किसी भी तरह के अवैध विदेशी प्रेषण में शामिल नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अथवा विदेश में कहीं भी उनके नाम पर किसी अन्य व्यक्ति की कोई बेनामी संपत्ति मौजूद नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी ने उन्हें कोई संपत्ति उपहार में नहीं दी है और सिद्धांतों के आधार पर वह इस प्रकार के महंगे उपहार कभी स्वीकार नहीं करती हैं।
गलत जानकारियों को वापस लेने और तथ्यों के सम्मान की मांग
रकुल प्रीत सिंह ने अपने वक्तव्य में आग्रह किया कि इस तरह की भ्रामक और मानहानि करने वाली खबरें तैयार करने वाले लोग अपनी रिपोर्ट्स को वापस लें और सच को सामने लाएं। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि व्यावसायिक दबावों के कारण तथ्यों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए, विशेष रूप से तब जब किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और आजीविका सीधे तौर पर प्रभावित हो रही हो।



















