वैश्विक मुद्रा बाजारों में यूरो पर लगातार दबाव देखने को मिल रहा है, क्योंकि जर्मनी और व्यापक यूरोज़ोन के हालिया क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) आंकड़े केवल अनुमानों के अनुरूप ही रहे और वे निवेशकों को कोई नई तेजी की वजह नहीं दे सके। आर्थिक संकेतकों में किसी बड़े उछाल के अभाव के बीच यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) के मुख्य अर्थशास्त्री फिलिप लेन ने क्षेत्रीय आर्थिक विस्तार को लेकर सतर्क रुख जाहिर किया है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर आगाह किया कि लंबे समय से बनी ऊंची ब्याज दरें पूरे क्षेत्र की विकास गति को सीमित कर रही हैं, जिससे कारोबारी गतिविधियों और निवेश पर प्रतिकूल असर जारी है।
जर्मनी और यूरोज़ोन के आर्थिक आंकड़े केवल अनुमान के अनुरूप
क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख संकेतकों पर नजर डालें तो जर्मनी में सितंबर महीने का अंतिम कंपोजिट पीएमआई 53.8 पर स्थिर रहा, जो बाजार की उम्मीदों के बिल्कुल बराबर था। वहीं, जर्मनी का सर्विसेज पीएमआई भी 53.0 पर दर्ज किया गया और इसने भी विश्लेषकों के पूर्वानुमानों का हूबहू मिलान किया। यदि पूरे यूरोज़ोन के समग्र परिदृश्य की बात करें तो वहां भी स्थिति अलग नहीं रही। यूरोज़ोन स्तर पर कंपोजिट पीएमआई 53.1 और सर्विसेज पीएमआई 53.0 दर्ज हुआ, जो पहले से लगाए गए आकलनों के पूरी तरह अनुकूल था। आंकड़ों में किसी सकारात्मक आश्चर्य की कमी के कारण मुद्रा में कोई उत्साहजनक खरीदारी देखने को नहीं मिली। इस बीच, बाजार सहभागियों की नजरें कारोबारी सत्र के दौरान सामने आने वाली यूरोज़ोन सेंटिक्स निवेशक विश्वास रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिससे भविष्य की कारोबारी धारणा की नई दिशा तय होने की उम्मीद है।
कच्चे तेल में गिरावट ने सीमित किया कैनेडियन डॉलर का उछाल
हालांकि यूरो में कमजोरी के बावजूद यूरो बनाम कैनेडियन डॉलर (EUR/CAD) मुद्रा जोड़ी में गिरावट की रफ्तार काफी हद तक संभली हुई है। इसकी मुख्य वजह यह है कि जिंसों पर निर्भर कैनेडियन डॉलर (CAD) स्वयं अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी नरमी से जूझ रहा है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा और यह लुढ़ककर 88.90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के आसपास कारोबार करता दिखा। ऊर्जा बाजार में यह तेज गिरावट तब शुरू हुई जब जी7 देशों ने अपने आपातकालीन भंडार से 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने पर सहमति जताई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े दबाव के बाद इन देशों ने ऊर्जा निर्यात पर किसी भी तरह के प्रतिबंध से बचने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
आपूर्ति में सुधार और क्षेत्रीय निर्यात के ताज़ा आंकड़े
चल रहे भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद क्षेत्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति में सुधार के ठोस संकेत दर्ज किए गए हैं। ऊर्जा ट्रैकिंग फर्म केपलर के आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि सितंबर के अंत में क्षेत्रीय तेल निर्यात कुछ समय के लिए संघर्ष-पूर्व स्तरों से भी ऊपर निकल गया था। यह निर्यात बढ़कर 2.25 करोड़ बैरल प्रतिदिन के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जबकि मार्च 2025 से फरवरी के बीच दर्ज किया गया बेसलाइन औसत केवल 1.80 करोड़ बैरल प्रतिदिन रहा था। तेल आपूर्ति में इस तेज बहाव ने कीमतों पर लगातार नीचे की ओर दबाव बनाए रखा है, जिससे तेल उत्पादक अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर सीधा असर पड़ रहा है।
प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के बीच उतार-चढ़ाव का व्यापक रुझान
मुद्रा बाजार के व्यापक पटल पर यूरो अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले मिलाजुला रुख दिखा रहा है, जिसमें जापानी येन के सामने यूरो सबसे कमजोर स्थिति में दर्ज किया गया है। अमेरिकी डॉलर की नई मजबूती और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच अन्य करेंसी जोड़ियों में भी भारी हलचल देखी जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) पर बिकवाली का नया दौर शुरू हुआ और सोमवार को एशियाई कारोबार के अंतिम घंटों में यह गिरकर 0.6900 के स्तर की तरफ आ गया। मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन के बीच जारी तनावों से निवेशकों का ध्यान सुरक्षित निवेश के तौर पर अमेरिकी मुद्रा, तेल की कीमतों, ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक (आरबीए) की आगामी नीतियों पर बना हुआ है।
अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) ने शुरुआती नुकसान की भरपाई करते हुए सोमवार के एशियाई सत्र में फिर से 158.00 का स्तर छू लिया और पिछले एक सप्ताह के सीमित दायरे में कारोबार करता रहा। फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें कमजोर पड़ने के बावजूद भू-राजनीतिक संकटों ने अमेरिकी डॉलर को आधार दिया है। दूसरी तरफ, बैंक ऑफ जापान (बीओजे) द्वारा दरों को सख्त करने के अनुमान और मुद्रा बाजार में संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम इस जोड़ी की बढ़त को सीमित कर सकते हैं। वहीं सोने की कीमतों में भी सीमित दायरे का उतार-चढ़ाव जारी है। यूरोपीय सत्र में प्रवेश करते समय सोना 4,150 डॉलर प्रति औंस से नीचे कारोबार कर रहा था। शुक्रवार के निराशाजनक अमेरिकी रोजगार आंकड़ों को पीछे छोड़ते हुए डॉलर ने अप्रैल 2025 के बाद का नया उच्चतम स्तर छुआ है, जिसने सोने की तेजी पर लगाम लगाई है, हालांकि फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दर वृद्धि की घटती संभावनाओं ने सोने की गिरावट को सहारा दिया है।
क्रिप्टो बाजार की स्थिति और यूरो-डॉलर का ताजा स्तर
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में, बीएनबी (जिसे पहले बिनांस कॉइन के नाम से जाना जाता था) लगातार तीन हफ्तों की साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने के बाद सोमवार को मामूली गिरावट के साथ 790 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था। हालांकि डेरिवेटिव्स बाजार में ओपन इंटरेस्ट में बढ़ोतरी और सकारात्मक फंडिंग दरें यह संकेत दे रही हैं कि निवेशकों का रुझान तेजी की ओर बना हुआ है। दूसरी ओर, यूरो बनाम अमेरिकी डॉलर (EUR/USD) गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार को यह जोड़ी 1.1312 के स्तर तक लुढ़क गई थी और यह अपने जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे बनी हुई है। इस तेज गिरावट के पीछे अमेरिकी डॉलर की आक्रामक मजबूती, वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और महंगे ऊर्जा दामों के कारण यूरोपीय अर्थव्यवस्था के सामने खड़े जोखिमों का बड़ा हाथ है।















