सिनेमा के इतिहास में कुछ गीत ऐसे होते हैं जो समय की सीमाओं को पार कर दशकों बाद भी दर्शकों के दिलों में वही पुराना दर्द जगा देते हैं। 23 साल पहले रिलीज हुई पारिवारिक ड्रामा फिल्म बागबान का एक खास गीत आज भी जब बजता है, तो अपनों से दूर रह रहे लोगों की आंखें नम हो जाती हैं। बड़े पर्दे पर जब यह गाना पहली बार रिलीज हुआ था, तब सिनेमाघरों में बैठे अनगिनत दर्शक किरदारों के अलगाव और दर्द को देखकर फूट-फूटकर रो पड़े थे। इस गीत की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि इसमें खुद मुख्य अभिनेता अमिताभ बच्चन ने अपनी आवाज देकर किरदारों के दर्द को सीधे दर्शकों के दिलों तक पहुंचाया था।
टेलीफोन बूथ से बयां हुआ दो दिलों की जुदाई का दर्द
फिल्म में इस गीत को बेहद भावुक और मार्मिक तरीके से फिल्माया गया था। एक साधारण से टेलीफोन बूथ के भीतर खड़े होकर अमिताभ बच्चन का किरदार अपनी पत्नी से बात करते हुए अपने जज्बात व्यक्त करता है। फोन के दूसरी तरफ हेमा मालिनी का किरदार भी अपने आंसू नहीं रोक पाता और दोनों की सिसकियों के बीच यह गीत आगे बढ़ता है। चार दशक साथ बिताने के बाद अचानक आई यह दूरी दोनों किरदारों के लिए असहनीय हो जाती है, जिसे पर्दे पर देखते हुए दर्शक खुद को उनके दर्द से अलग नहीं रख पाते। आज भी जो लोग कामकाज या मजबूरियों के चलते अपने जीवनसाथी से दूर रहते हैं, उनके लिए इस गाने के बोल दिल को छू लेने वाले साबित होते हैं।
अमिताभ बच्चन और अलका याग्निक की जुगलबंदी ने बनाया अमर
इस यादगार गीत के बोल हैं 'मैं यहां तू वहां', जिसे संगीतकार आदेश श्रीवास्तव ने एक बेहद धीमी और दिल को छू लेने वाली धुन में पिरोया था। गीत के बोल समीर अनजान और बीआर चोपड़ा ने मिलकर तैयार किए थे, जिनमें शुरुआती दो मुखड़े बीआर चोपड़ा की कलम से निकले थे। अमिताभ बच्चन ने जहां इस गीत में अपनी भारी और गंभीर आवाज में खुद गायकी की, वहीं हेमा मालिनी के हिस्से के सुर मशहूर गायिका अलका याग्निक ने साधे थे। दोनों कलाकारों की गायकी और अदाकारी के संगम ने इस गाने को एक अमर रचना बना दिया, जिसने उस दौर में हर संवेदनशील दर्शक को झकझोर कर रख दिया था।
चार बेटों के बीच बंट गए थे 40 साल पुराने रिश्ते
साल 2003 में रिलीज हुई फिल्म बागबान का निर्देशन रवि चोपड़ा ने किया था, जो इसके सह-लेखक और निर्माता भी थे। फिल्म की मूल कहानी राज और पूजा नाम के एक बुजुर्ग दंपति के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी शादी को 40 साल बीत चुके होते हैं। राज की नौकरी से सेवानिवृत्ति के बाद उनके चार बेटे, जिनके किरदार अमन वर्मा, समीर सोनी, साहिल चड्ढा और नासिर खान ने निभाए थे, अपने माता-पिता की जिम्मेदारी उठाने से कतराने लगते हैं। अपने आराम और खर्चों के चलते वे योजना बनाते हैं कि मां और पिता को अलग-अलग बेटों के घरों में रहना होगा। इसी जबरन अलगाव की त्रासदी से वह दर्द पैदा होता है, जो पूरी फिल्म और खासकर इस गीत की आत्मा बनकर दर्शकों के सामने आया था।


















