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बेटे का स्विमिंग करियर बचाने के लिए दुबई पहुंचा माधवन परिवार, खुद को 'अधूरा पिता' मानते हैं R Madhavanबॉलीवुड
13 जून 2026, 9:54 am (46 दिन पहले)· 0

बेटे का स्विमिंग करियर बचाने के लिए दुबई पहुंचा माधवन परिवार, खुद को 'अधूरा पिता' मानते हैं R Madhavan

अभिनेता R Madhavan ने बताया कि कोविड के दौर में बेटे वेदांत की ट्रेनिंग न रुके, इसके लिए पत्नी सरिता बिरजे ने पूरा परिवार दुबई शिफ्ट करने का फैसला लिया—और एक पिता के तौर पर माधवन ने खुद को 10 में से सिर्फ 6 अंक दिए।

बॉलीवुड हो या साउथ सिनेमा, ज्यादातर सितारों के बच्चे अपने माता-पिता की राह पकड़कर एक्टिंग की दुनिया में उतरते हैं। लेकिन अभिनेता R Madhavan के बेटे वेदांत माधवन ने इससे बिल्कुल हटकर रास्ता चुना। 20 साल के वेदांत आज एक पेशेवर कॉम्पिटिटिव फ्रीस्टाइल स्विमर हैं और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कई पदक अपने नाम कर चुके हैं।

एक फैसला, जिसने करियर की दिशा बदल दी

हाल में हुई एक बातचीत में माधवन ने अपने पारिवारिक जीवन, बेटे की परवरिश और महामारी के दौर में लिए गए एक अहम फैसले पर खुलकर बात की। उनके मुताबिक बेटे का तैराकी करियर बचाने के लिए जो सबसे जरूरी और कड़ा कदम उठाया गया, वह उनकी पत्नी सरिता बिरजे ने सही वक्त पर लिया।

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‘द हिंदू’ को दिए एक पुराने इंटरव्यू में अभिनेता ने बताया था कि कोविड-19 के दौरान बेटे का भविष्य बचाने के लिए उन्हें पूरे परिवार के साथ दुबई जाना पड़ा। उन्होंने माना कि यह फैसला सरिता का था और वही उनके परिवार के लिए ठीक समय पर लिया गया सबसे बड़ा फैसला साबित हुआ।

जब भारत में ताले लगे और चिंता बढ़ी

माधवन ने बताया कि महामारी के दौरान देशभर में, खास तौर पर मुंबई में, स्विमिंग पूल पूरी तरह बंद कर दिए गए थे। यही वह दौर था जब वेदांत अपने टीनएज के ‘ग्रोथ स्पर्ट’ यानी शारीरिक विकास के सबसे अहम पड़ाव से गुजर रहे थे, और इसी वजह से माधवन और सरिता बेहद परेशान थे।

अभिनेता ने कहा, ‘यह फैसला बिल्कुल सही समय पर लिया गया था। अगर उस दौरान वेदांत को ट्रेनिंग के लिए पूल नहीं मिलता तो उनका अंतरराष्ट्रीय स्विमिंग करियर वहीं खत्म हो सकता था।’

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उस समय जर्मनी, फ्रांस और चीन जैसे देशों ने अपने खिलाड़ियों के लिए पूल्स को क्वारंटाइन जोन में बदलकर खोल रखा था, जिसके चलते वहां के एथलीटों ने कोविड काल में भी वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ दिए। ऐसे माहौल में वेदांत के लिए यह ट्रेनिंग छोड़ देना मुमकिन नहीं था।

रातों-रात दुबई का रुख

जैसे ही उन्हें खबर मिली कि दुबई में सख्त नियमों के साथ स्विमिंग पूल खोल दिए गए हैं, सरिता ने देर नहीं की—सामान बांधा और वेदांत को लेकर दुबई पहुंच गईं। माधवन भी कुछ समय बाद उनके पीछे वहां चले गए। उस वक्त भारतीय स्विमिंग टीम भी वहीं अभ्यास कर रही थी, और इस कदम के बाद वेदांत के प्रदर्शन में जबरदस्त सुधार देखने को मिला।

‘मैं खुद को सिर्फ 6 नंबर दूंगा’

एक पिता के रूप में दुनियाभर से सराहना पाने के बावजूद माधवन खुद को परफेक्ट पेरेंट नहीं मानते। अपनी ही परख करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं खुद को 10 में से केवल 6 नंबर दूंगा। एक पिता के तौर पर ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो मैं अपने प्रोफेशन की व्यस्तताओं के कारण नहीं कर पाता। मेरी पत्नी सरिता मुझसे कहीं ज्यादा रोजमर्रा के कामों में सीधे शामिल रही।’

स्टार किड होने का दबाव और जमीन से जुड़ाव

माधवन यह भी स्वीकार करते हैं कि स्टार किड होने की वजह से वेदांत को आम खिलाड़ियों के मुकाबले कहीं ज्यादा पहचान मिल जाती है। यही कारण है कि वह और सरिता लगातार इस बात पर ध्यान देते हैं कि बेटा जमीन से जुड़ा रहे और शुरुआती कामयाबी को ही आखिरी मंजिल न मान बैठे।

रणवीर अल्लाहबादिया के पॉडकास्ट पर भी उन्होंने इसी मुद्दे को छुआ था। उन्होंने कहा था—‘मैं उसकी मेहनत और मेडल को कम नहीं आंक रहा, उसने इसके लिए बहुत पसीना बहाया है। लेकिन सेलिब्रिटी किड होना आसान नहीं है। उसे अपने उन दोस्तों की तुलना में बहुत अधिक अटेंशन मिलता है, जिन्होंने शायद इसी उम्र में उससे भी बड़ी सफलता हासिल की होगी। इसलिए हम कोशिश करते हैं कि वेदांत के साथ-साथ अन्य प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भी बढ़ावा मिले।’

रिश्ते की लंबी कहानी

बता दें कि माधवन और सरिता बिरजे ने 1999 में शादी की थी, और इससे पहले दोनों करीब आठ साल तक रिश्ते में रहे थे। साल 2005 में उनके बेटे वेदांत का जन्म हुआ। आज वेदांत देश के उभरते तैराकों में गिने जाते हैं और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं।

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