सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन यानी सिंटा के भीतर छिड़ा अंदरूनी कलह अब खुलकर सार्वजनिक मंच पर आ चुका है। संगठन के तौर-तरीकों, लीडरशिप शैली और कामकाज को लेकर सदस्यों के बीच गहरा मतभेद पैदा हो गया है। हाल ही में चुनी गई नई एग्जीक्यूटिव कमेटी की सदस्य नगमा और संगठन की पूर्व पदाधिकारी उपासना सिंह ने वरिष्ठ कलाकारों के साथ हुए बर्ताव को लेकर बेहद तीखे सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि संगठन की बैठकों के दौरान कई जाने-माने कलाकारों को असहज और अपमानजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है।
वरिष्ठ कलाकारों की उपेक्षा और वोटिंग पर विवाद
सिंटा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उपासना सिंह ने कुछ बेहद हैरान करने वाले वाकयों का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि बैठकों के दौरान मुकेश ऋषि, दीपक पाराशर और विकास वर्मा जैसे कलाकारों को खासा असहज महसूस कराया गया। एक घटना का ब्यौरा देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अभिनेता मुकेश ऋषि मुंबई के भारी ट्रैफिक में फंसने के कारण बैठक में करीब आधे घंटे देरी से पहुंचे थे। वहां पहुंचने पर उन्हें सूचित किया गया कि देरी की वजह से अब वे मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकते।
इस अनुचित फैसले से मुकेश ऋषि बुरी तरह क्षुब्ध हो गए और उन्होंने वार्षिक आम सभा के दौरान माइक हाथ में लेकर अपनी नाराजगी सार्वजनिक तौर पर व्यक्त की। मुकेश ऋषि ने उस वक्त बेहद आहत होकर सवाल किया था कि उनके साथ इस स्तर की बदसलूकी कैसे की जा सकती है। उपासना सिंह के मुताबिक इतने वरिष्ठ और सम्मानित कलाकार के साथ ऐसा कठोर रवैया अपनाना पूरी तरह से गैर-वाजिब था।
दीपक पाराशर का योगदान और प्रेस कॉन्फ्रेंस की घटना
उपासना सिंह ने अभिनेता दीपक पाराशर से जुड़े एक अन्य कटु अनुभव का खुलासा भी किया। उन्होंने बताया कि हेमा मालिनी से संबंधित सिंटा की एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। उस दौरान दीपक पाराशर एसोसिएशन में ट्रेजरर पद की अहम जिम्मेदारी संभाल रहे थे। आरोप है कि उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में दीपक पाराशर दरवाजा खटखटाते रह गए, मगर उन्हें अंदर दाखिल होने की अनुमति नहीं दी गई। इस घटना से वे अंदर तक आहत हुए और उन्होंने व्यक्तिगत रूप से यह बात साझा की कि ऐसा माहौल बेहद अपमानजनक और दुखदायी है।
उपासना ने दीपक पाराशर के संगठन के प्रति समर्पण की जमकर सराहना की। उन्होंने याद दिलाया कि दीपक पाराशर सिंटा की बैठकों में शामिल होने वाले तमाम साथियों के लिए खुद अपने हाथों से भोजन तैयार करते थे। लगभग ढाई साल के लंबे अरसे तक वे सुबह पांच बजे उठते थे ताकि एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक के लिए खाना बनाकर सभी को प्रेमपूर्वक खिला सकें। उपासना का कहना है कि किसी भी मसले पर वैचारिक असहमति हो सकती है, लेकिन एक वरिष्ठ साथी के लंबे योगदान और उम्र का सम्मान हर हाल में किया जाना चाहिए था।
पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे के रवैये पर गंभीर सवाल
संगठन के माहौल पर चर्चा करते हुए उपासना सिंह ने पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे के व्यवहार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों अभिनेत्रियां खुद को बड़ा स्टार मानकर बाकी सदस्यों से दूरी बनाए रखती थीं। हालात इस हद तक पहुंच गए थे कि वे सामान्य सदस्यों के साथ एक ही लिफ्ट साझा करने से भी कतराती थीं।
इसके अलावा उन्होंने सिंटा के कर्मचारी विकास वर्मा के साथ हुए बर्ताव का ब्योरा दिया। आरोप के मुताबिक विकास वर्मा को महज इस वजह से उपेक्षित और नीचा दिखाया गया क्योंकि उन्हें अंग्रेजी भाषा नहीं आती थी। उपासना ने बताया कि विकास हमेशा दूसरे कलाकारों की सहायता के लिए तत्पर रहते हैं और जरूरतमंद लोगों के कल्याण के लिए काम करते हैं। इसके बावजूद बार-बार होने वाले अपमान के चलते उन्हें कई दफा रोते हुए बाहर निकलना पड़ा।
कठपुतली कहे जाने पर अभिनेत्री नगमा का पलटवार
दूसरी तरफ नई एग्जीक्यूटिव कमेटी की सदस्य नगमा ने पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे की तरफ से कथित तौर पर दिए गए कठपुतली वाले बयान पर करारा जवाब दिया है। नगमा ने दो टूक शब्दों में कहा कि कमेटी का कोई भी सदस्य किसी अन्य व्यक्ति के इशारों पर काम नहीं कर रहा है और हर किसी की अपनी स्वतंत्र सोच और निर्णय क्षमता है।
अपने लंबे करियर का हवाला देते हुए नगमा ने कहा कि उन्होंने इंडस्ट्री में सलमान खान, शाहरुख खान, संजय दत्त, अक्षय कुमार और जैकी श्रॉफ जैसे दिग्गज अभिनेताओं के साथ काम किया है और वे इस फिल्म जगत की बारीकियों को बेहद करीब से समझती हैं। उन्होंने कहा कि किसी को कठपुतली बताना या यह कहना कि कोई किसी के इशारे पर नाच रहा है, बेहद ओछी और अपमानजनक बात है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कमेटी के लोगों के पास अपना विवेक है और किसी को भी दूसरों को नीचा दिखाने का अधिकार नहीं है। नगमा ने स्पष्ट किया कि वे किसी की निजी लड़ाई का हिस्सा बनने नहीं आईं, बल्कि जरूरतमंद कलाकारों के हित में संस्था को पारदर्शी ढंग से चलाने के उद्देश्य से जुड़ी हैं।
इस्तीफों की झड़ी और नेतृत्व की सफाई
सिंटा में टकराव का यह दौर उस वक्त चरम पर पहुंच गया जब एग्जीक्यूटिव कमेटी के आठ सदस्यों ने सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इन त्यागपत्र देने वालों में मुकेश ऋषि, दीपक पाराशर और विकास वर्मा जैसे प्रमुख नाम शामिल थे। इन सभी सदस्यों ने फैसले लेने की मनमानी प्रक्रिया और महत्वपूर्ण मामलों में सलाह-मशविरा न किए जाने को अपने इस्तीफे का मुख्य आधार बताया था।
हालांकि दूसरी तरफ पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे ने अपने ऊपर लगाए जा रहे इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज किया है। दोनों पदाधिकारियों ने संस्था के प्रशासनिक कामकाज, संगठनात्मक फैसलों और वित्तीय मामलों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए अपना पक्ष मजबूती से सामने रखा है।



















