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आईसीएमआर-एनआईएन के नियमों के बीच जानें काला चना या काबुली चना में से किसमें है अधिक पोषणजीवनशैली
13 सित॰ 2026, 6:27 am (53 मिनट पहले)· 0

आईसीएमआर-एनआईएन के नियमों के बीच जानें काला चना या काबुली चना में से किसमें है अधिक पोषण

काले और काबुली चने के पोषक तत्वों में अंतर होता है, जिसे समझकर आप अपनी सेहत और डाइट के हिसाब से सही विकल्प का चुनाव कर सकते हैं।

चने को हमारे दैनिक भोजन में एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जिसे सुबह के नाश्ते, स्वादिष्ट करी, चटपटी चाट और सलाद जैसे कई रूपों में बड़े चाव से खाया जाता है। बाजार में मुख्य रूप से दो प्रकार के चने देखने को मिलते हैं, जिनमें पहला छोटा और गहरे रंग का काला चना (जिसे देसी चना भी कहा जाता है) और दूसरा बड़े आकार वाला हल्के क्रीम रंग का काबुली चना शामिल है। ये दोनों ही चने प्रोटीन और फाइबर के उत्कृष्ट स्रोत माने जाते हैं, जो शाकाहारी भोजन करने वालों के लिए पोषण का एक बेहतरीन जरिया हैं। हालांकि, कौन सा चना सेहत के लिए अधिक फायदेमंद है, इसका फैसला केवल उनके रंग या बाहरी रूप को देखकर नहीं किया जा सकता क्योंकि इनके भीतर छिपे पोषक तत्वों में कुछ बुनियादी अंतर होते हैं।

पोषण के स्तर पर प्रसंस्करण और पकाने की विधि का प्रभाव

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय पोषण संस्थान (आईसीएमआर-एनआईएन) के आहार संबंधी दिशा-निर्देशों में साफ तौर पर कहा गया है कि दालें और बीन्स भारतीय भोजन में प्रोटीन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण जरिया हैं। इन दिशा-निर्देशों में यह भी सुझाव दिया गया है कि यदि अनाज और दालों को एक साथ मिलाकर खाया जाए, तो इससे शरीर को मिलने वाले प्रोटीन की गुणवत्ता में काफी सुधार होता है। जब हम काले और काबुली चने के बीच तुलना करते हैं, तो यह ध्यान रखना जरूरी है कि प्रोटीन की मात्रा चने की विशिष्ट किस्म, उसके प्रसंस्करण के तरीके और उसे कच्चा या पकाकर खाने की स्थिति के आधार पर बदल सकती है।

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अमेरिकी कृषि विभाग के यूएसडीए फूडडाटा सेंट्रल के आंकड़ों पर नजर डालें तो पोषक तत्वों के इस बदलाव को आसानी से समझा जा सकता है। इन आंकड़ों के मुताबिक, सूखे या कच्चे काबुली चने के प्रति 100 ग्राम में लगभग 20.5 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। लेकिन जब इसी चने को पानी में उबालकर पकाया जाता है, तो पानी सोखने के कारण प्रति 100 ग्राम में प्रोटीन की मात्रा घटकर करीब 8.9 ग्राम रह जाती है। दूसरी तरफ, देसी या काले चने में भी प्रचुर मात्रा में प्रोटीन के साथ-साथ फाइबर पाया जाता है। यही वजह है कि केवल प्रोटीन की कुल मात्रा को आधार मानकर किसी एक चने को दूसरे से बेहतर घोषित करना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।

अपनी सेहत की जरूरतों के हिसाब से सही चने का चुनाव करें

काले और काबुली चने में से किसी एक को चुनते समय आपको अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य प्राथमिकताओं और भोजन की पसंद पर ध्यान देना चाहिए। यदि आप अपने आहार में फाइबर की मात्रा बढ़ाना चाहते हैं और ऐसा भोजन तलाश रहे हैं जो लंबे समय तक आपके पेट को भरा रखे, तो काला चना आपके लिए सबसे उपयुक्त विकल्प साबित हो सकता है। इसकी सख्त बाहरी परत के कारण इसे पचाने में अधिक समय लगता है, जिससे बार-बार भूख लगने की समस्या से राहत मिलती है। आप इसे अंकुरित करके, उबालकर या फिर सलाद के रूप में आसानी से अपने दैनिक आहार का हिस्सा बना सकते हैं।

इसके विपरीत, काबुली चना भी पोषण से भरपूर एक बेहद शानदार विकल्प है, जो शरीर को जरूरी मात्रा में प्रोटीन और फाइबर प्रदान करता है। अपनी नरम बनावट और हल्के स्वाद के कारण यह हम्मस, छोले की सब्जी और कई प्रकार के पश्चिमी सलाद बनाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। यदि आपको इसका स्वाद और मुंह में घुल जाने वाली बनावट पसंद है, तो इसे अपनी डाइट में शामिल करना सेहत और स्वाद दोनों के लिहाज से एक बेहतरीन फैसला है।

सवाल-जवाब

वजन घटाने के लिए काला चना और काबुली चना में से कौन सा बेहतर है?
अधिक फाइबर और सख्त बाहरी छिलके के कारण वजन घटाने के लिए काला चना आम तौर पर बेहतर माना जाता है। इसे पचाने में अधिक समय लगता है जिससे लंबे समय तक पेट भरा रहता है और भूख नियंत्रित रहती है।
100 ग्राम कच्चे काबुली चने में कितना प्रोटीन होता है?
पोषण संबंधी आंकड़ों के अनुसार, 100 ग्राम कच्चे या सूखे काबुली चने में लगभग 20.5 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है।
चना पकाने के बाद उसमें प्रोटीन की मात्रा क्यों कम हो जाती है?
पकाने के दौरान चने पानी की भारी मात्रा को सोख लेते हैं, जिससे उनका वजन और आकार बढ़ जाता है। इस कारण प्रति 100 ग्राम चने में पोषक तत्वों की सघनता कम हो जाती है।
आईसीएमआर-एनआईएन अनाज और दालों को एक साथ मिलाकर खाने की सलाह क्यों देता है?
अनाज और दालों को एक साथ मिलाकर खाने से भोजन में प्रोटीन की गुणवत्ता में सुधार होता है। यह संयोजन शरीर को सभी आवश्यक एमीनो एसिड प्रदान करने में मदद करता है।
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