क्रिकेट की दुनिया में बल्लेबाजों को पवेलियन भेजने के 10 अलग-अलग नियम निर्धारित हैं, जिनमें कैच आउट, बोल्ड और एलबीडब्ल्यू जैसे तरीके सबसे आम हैं। इन पारंपरिक तरीकों में बल्लेबाज का क्रीज पर मौजूद होना और गेंदबाज की गेंद का सामना करना अनिवार्य रहता है। रन आउट जैसे मामलों में भी नॉन-स्ट्राइकर एंड पर मौजूद खिलाड़ी अपनी क्रीज से बाहर होने पर शिकार बन सकता है। इसके विपरीत, क्रिकेट की नियम पुस्तिका में 'टाइम आउट' एक ऐसा बेहद दुर्लभ और कड़ा प्रावधान है, जिसके तहत कोई खिलाड़ी बिना एक भी गेंद का सामना किए और कई बार क्रीज पर पूरी तरह तैयार होने से पहले ही आउट करार दिया जा सकता है।
क्या है टाइम आउट का नियम और यह कब लागू होता है
टाइम आउट का नियम उस समय प्रभावी होता है जब किसी टीम का विकेट गिरता है या कोई बल्लेबाज रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान से बाहर जाता है। ऐसी स्थिति में नए आने वाले बल्लेबाज के लिए मैदान पर कदम रखने और अगली गेंद का सामना करने के लिए तैयार होने की एक निश्चित समय सीमा तय की गई है। यदि आने वाला खिलाड़ी इस निर्धारित अवधि के भीतर अपनी क्रीज पर पहुंचकर गेंद का सामना करने की मुद्रा में तैयार नहीं होता है, तो विपक्षी टीम की अपील पर मैदानी अंपायर उसे आउट घोषित कर सकते हैं।
एमसीसी के बुनियादी नियम और आईसीसी की प्लेइंग कंडीशंस में फर्क
क्रिकेट के आधिकारिक नियम तैयार करने वाली ऐतिहासिक संस्था मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) के कानून के मुताबिक, विकेट गिरने अथवा किसी बल्लेबाज के रिटायर होने के बाद आने वाले नए खिलाड़ी को 3 मिनट के भीतर गेंद खेलने के लिए मुस्तैद होना चाहिए। यदि आने वाला खिलाड़ी खुद नॉन-स्ट्राइकर छोर पर जा रहा है, तो उसे यह तय करना होता है कि उसका साथी बल्लेबाज 3 मिनट की इसी अवधि के भीतर अगली गेंद का सामना करने के लिए तैयार खड़ा हो। यदि यह शर्त पूरी नहीं होती, तो बल्लेबाज को टाइम आउट दे दिया जाता है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में स्थिति थोड़ी अलग होती है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) अपनी विशिष्ट प्लेइंग कंडीशंस लागू करती है, जिसमें खेल की गति बनाए रखने और अनावश्यक देरी रोकने के लिए इस समय सीमा को घटा दिया गया है। आईसीसी के दिशानिर्देशों के तहत यह अवधि 3 मिनट के बजाय केवल 2 मिनट तय की गई है। इसका अर्थ यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब भी कोई विकेट गिरता है, तो नए बल्लेबाज के पास अगली गेंद खेलने की स्थिति में आने के लिए ठीक 120 सेकंड यानी 2 मिनट का वक्त रहता है।
प्रारूपों के आधार पर समय सीमा और डायमंड डक का रिकॉर्ड
खेल के अलग-अलग प्रारूपों में समय की पाबंदी को लेकर नियम भिन्न हैं। सबसे छोटे और तेजतर्रार प्रारूप यानी टी20 अंतरराष्ट्रीय में गति बनाए रखने के लिए नियम सबसे ज्यादा सख्त हैं। टी20 मैचों में नए बल्लेबाज को मैदान पर आकर गेंद का सामना करने के लिए सिर्फ 90 सेकंड की मोहलत मिलती है। वहीं टेस्ट और एकदिवसीय मुकाबलों में आईसीसी द्वारा निर्धारित 2 मिनट की समय सीमा ही मान्य रहती है।
सांख्यिकी और रिकॉर्ड बुक के लिहाज से इस तरह आउट होने वाले बल्लेबाज के खाते में 'डायमंड डक' जुड़ जाता है। क्रिकेट शब्दावली में जब कोई खिलाड़ी बिना किसी वैध गेंद का सामना किए शून्य के निजी स्कोर पर अपना विकेट गंवा देता है, तो उसे डायमंड डक कहा जाता है। टाइम आउट होने पर खिलाड़ी को कोई गेंद खेलने का अवसर नहीं मिलता, इसलिए वह इस अनचाहे रिकॉर्ड का भागीदार बनता है।
एंजेलो मैथ्यूज: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहला चर्चित वाकया
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे पहली बार टाइम आउट की घटना 6 नवंबर 2023 को घटी। श्रीलंका और बांग्लादेश के बीच खेले गए वनडे विश्व कप के ग्रुप स्टेज मुकाबले में यह विवाद सामने आया था। मैच के दौरान जब श्रीलंका की पारी के 25वें ओवर में सदीरा समरविक्रमा पवेलियन लौटे, तब अनुभवी ऑलराउंडर एंजेलो मैथ्यूज बल्लेबाजी के लिए मैदान में उतरे।
मैथ्यूज निर्धारित समय के भीतर क्रीज तक पहुंच भी गए थे, लेकिन स्ट्राइक लेने से ठीक पहले उन्हें महसूस हुआ कि उनके हेलमेट का चिन स्ट्रैप यानी ठुड्डी वाली पट्टी टूटी हुई है। इसके बाद उन्होंने ड्रेसिंग रूम से नया हेलमेट मंगवाने के लिए इशारा किया और खेल रुक गया। गेंदबाज का सामना करने में हुई इस अतिरिक्त देरी को देखते हुए बांग्लादेश के तत्कालीन कप्तान शाकिब अल हसन ने नियमों का हवाला देते हुए अंपायर से टाइम आउट की औपचारिक अपील कर दी।
मैथ्यूज और श्रीलंकाई टीम के सदस्यों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए काफी बहस और विरोध किया, परंतु अंपायरों ने कानून के कड़े दायरे में रहते हुए अपील को स्वीकार कर लिया। इसके चलते बांग्लादेश को बिना कोई गेंद फेंके ही मैथ्यूज का बड़ा विकेट हासिल हो गया, जिसकी क्रिकेट जगत में काफी समय तक चर्चा रही।
टी20 अंतरराष्ट्रीय में गॉडफ्रेड बाकिवेयेम का मामला
एकदिवसीय विश्व कप की उस घटना के करीब एक महीने बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय में भी इस नियम का पहला इस्तेमाल देखने को मिला। 17 दिसंबर 2023 को अफ्रीका क्रिकेट एसोसिएशन कप के तहत घाना और सिएरा लियोन के बीच ग्रुप बी का मुकाबला खेला जा रहा था। इस मैच में घाना की टीम सिएरा लियोन द्वारा दिए गए 112 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही थी।
पारी के दौरान जब घाना का छठा विकेट गिरा, तब गॉडफ्रेड बाकिवेयेम तय समय में अगली गेंद का सामना करने के लिए तैयार नहीं हो सके और उन्हें टाइम आउट दे दिया गया। इस तरह गॉडफ्रेड बाकिवेयेम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में टाइम आउट होने वाले दूसरे खिलाड़ी और टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूप के पहले बल्लेबाज बने। इस झटके के बाद भी घाना की टीम ने शानदार खेल दिखाया और 2 विकेट से मुकाबला जीतने में सफल रही।
महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रित्शी चोडेन का आउट होना
पुरुष क्रिकेट के अलावा महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी यह कठोर नियम लागू हो चुका है। भूटान की खिलाड़ी रित्शी चोडेन महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में टाइम आउट होने वाली पहली बल्लेबाज बनीं। 4 जून 2026 को मलेशिया में खेले गए एसीसी महिला प्रीमियर कप के एक टी20 मुकाबले में नेपाल के खिलाफ मैच के दौरान उन्हें तय समय सीमा के उल्लंघन पर टाइम आउट करार दिया गया था।
पारंपरिक टेस्ट क्रिकेट में अब तक अछूता रहा यह नियम
एकदिवसीय और टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में टाइम आउट की घटनाएं दर्ज होने के बावजूद, क्रिकेट के सबसे पुराने और पारंपरिक प्रारूप यानी टेस्ट क्रिकेट में अब तक कोई भी खिलाड़ी इस नियम के तहत आउट नहीं हुआ है। टेस्ट क्रिकेट में खेल की गति और माहौल भिन्न होता है, इसलिए यह देखना दिलचस्प रहेगा कि क्या कभी पांच दिवसीय प्रारूप में भी किसी अंपायर को इस नियम का इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ेगी।



















