दीपावली के मौके पर आतिशबाजी और पर्यावरण संरक्षण को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है, जिसमें अब मनोरंजन और राजनीति जगत के कई बड़े चेहरे आमने-सामने आ गए हैं। अभिनेत्री कोएना मित्रा ने उत्सव के दौरान पटाखे फोड़ने का खुलकर बचाव किया है और इसे त्योहार के पारंपरिक उल्लास का अभिन्न अंग करार दिया है। उनका स्पष्ट मानना है कि हिंदू रीति-रिवाजों और त्योहारों को मनाने के तौर-तरीकों पर किसी बाहरी व्यक्ति या उपदेशकों से सीख लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। हालांकि अपनी नई टिप्पणी में उन्होंने किसी का नाम सीधे तौर पर दर्ज नहीं किया, लेकिन इस बयान की पृष्ठभूमि को नगर निगम के अभियान से जुड़े ताजा विवाद से ही जोड़कर देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर तीखा संदेश और त्योहार का उल्लास
सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक विस्तृत टिप्पणी साझा करते हुए कोएना मित्रा ने उत्सव के तौर-तरीकों पर सवाल उठाने वालों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह पर्व रोशनी, आतिशबाजी, संगीत, ढोल और पकवानों की मिठास के साथ मनाया जाता है। उन्होंने ऐसे तत्वों को दिखावटी समाज-सेवी करार देते हुए अनदेखा करने की सलाह दी और बिना नाम लिए बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि हिंदू त्योहार कैसे मनाए जाएं, इस पर किसी अन्य से सीख लेने की जरूरत नहीं है। इस तरह उन्होंने त्योहार से पहले ही सभी को अपनी शुभकामनाएं भी प्रेषित कीं।
कोएना मित्रा का यह रुख उन हलकों के खिलाफ सीधा विरोध माना जा रहा है, जो हर साल दीपावली आते ही प्रदूषण और पर्यावरण सुरक्षा की दुहाई देकर आतिशबाजी रोकने या प्रतिबंध लगाने की मांग उठाने लगते हैं। आलोचकों और सांस्कृतिक समर्थकों के बीच यह चर्चा अक्सर उठती रही है कि केवल विशिष्ट त्योहारों के अवसर पर ही इस तरह के संदेश क्यों केंद्रित किए जाते हैं।
बीएमसी के प्रदूषण नियंत्रण अभियान से भड़का विवाद
इस पूरे विवाद की शुरुआत बृहन्मुंबई नगर निगम यानी बीएमसी की एक हालिया पहल के बाद हुई। नागरिक निकाय ने दीपावली के दौरान वायु और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के मकसद से एक जन-जागरूकता अभियान शुरू किया था। इसी अभियान के अंतर्गत अभिनेत्री दीया मिर्जा का एक विशेष वीडियो संदेश जारी किया गया, जिसमें उन्होंने मुंबई के नागरिकों से अपील की थी कि वे पटाखे न जलाएं और पर्यावरण के अनुकूल, स्वच्छ त्योहार मनाएं ताकि शहर की आबोहवा को खराब होने से बचाया जा सके।
दीया मिर्जा का यह वीडियो संदेश सार्वजनिक होते ही चर्चाओं और असहमति का दौर शुरू हो गया। सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के एक वर्ग ने इस अभियान पर सवाल उठाए, जबकि मनोरंजन और राजनीतिक गलियारों से भी तरह-तरह की राय सामने आने लगीं।
वायु गुणवत्ता पर शिवसेना नेता मनीषा कायंदे का रुख
बढ़ते वायु प्रदूषण और त्योहारों के संतुलन को लेकर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी राय रखी है। शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने बिगड़ती हवा के स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए स्वीकार किया कि मुंबई का एयर क्वालिटी इंडेक्स खराब हो रहा है और इसमें कोई संशय नहीं है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के महीनों में इस तरह की पर्यावरणीय चुनौतियां अक्सर सामने आती हैं, जो पूरे देश में महसूस की जाती हैं।
मनीषा कायंदे के अनुसार मुंबई और दिल्ली जैसे प्रमुख महानगरों में प्रदूषण की प्रकृति और परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन इन पर नियंत्रण के प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों को त्योहारों का उल्लास मनाने के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए ताकि जनजीवन प्रभावित न हो।
पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग पर अबू आजमी का बयान
दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू आजमी ने मनमानी आतिशबाजी पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने इस बात को पूरी तरह अनुचित बताया कि लोग अपनी मर्जी से कहीं भी और कभी भी पटाखे जलाने की जिद कर रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के विधायक नितेश राणे के बयानों का संदर्भ देते हुए आरोप लगाया कि कुछ नेता अपनी सुविधा के अनुसार बयानबाजी करते हैं और प्रशासन इस पर केवल मूकदर्शक बना रहता है।
अबू आजमी ने नागरिकों से अपील की कि वे ऐसे छोटे राजनेताओं की भड़काऊ बातों पर ध्यान न दें और सोशल मीडिया पोस्ट्स को जस का तस रहने दें ताकि सच्चाई सामने रहे। उन्होंने मुंबई की हवा को स्वच्छ रखने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया और स्पष्ट रूप से कहा कि पटाखों के उपयोग पर पूरी तरह से रोक लगाई जानी चाहिए ताकि पर्यावरण और आम जनता के स्वास्थ्य की रक्षा हो सके।



















