दुनियाभर के श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था का केंद्र बने खाटूश्याम जी मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए एक बहुत बड़ी अपडेट सामने आई है। श्री श्याम मंदिर कमेटी की तरफ से यह घोषणा की गई है कि बाबा श्याम की दैनिक आरतियों के समय में बदलाव कर दिया गया है। यदि आप भी निकट भविष्य में इस पावन धाम की यात्रा करने और बाबा के चरणों में माथा टेकने का मन बना रहे हैं, तो मंदिर प्रशासन द्वारा तय किए गए इस नए शेड्यूल के बारे में पूरी जानकारी होना बेहद जरूरी है ताकि किसी प्रकार की दुविधा न हो।
मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने इस संबंध में विस्तार से बताते हुए स्पष्ट किया है कि मंदिर की प्राचीन परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार ऋतुओं के बदलने तथा पंचांग की तिथियों के आधार पर समय-समय पर आरतियों के वक्त में फेरबदल किया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत श्रावण शुक्ल पक्ष के समापन और भाद्रपद कृष्ण पक्ष के आगमन के साथ ही 29 अगस्त से यह संशोधित व्यवस्था संपूर्ण मंदिर परिसर में प्रभावी कर दी गई है। आमतौर पर खाटूश्याम जी के दरबार में प्रतिदिन पांच प्रमुख आरतियों का आयोजन किया जाता है, जिनमें से प्रत्येक का अपना अलग आध्यात्मिक महत्व होता है। इन पांचों में से दो आरतियों को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि उन अवसरों पर बाबा श्याम का भव्य और अलौकिक श्रृंगार किया जाता है, जिसके दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। मंदिर प्रशासन ने मुख्य रूप से इन्हीं दो आरतियों के समय में फेरबदल किया है।
श्रृंगार और संध्या आरती के समय में किया गया संशोधन
सामने आई नई समय-सारणी के मुताबिक, बाबा श्याम की लोकप्रिय श्रृंगार आरती के वक्त में बदलाव किया गया है। पहले यह विशेष आरती सुबह 07:00 बजे की जाती थी, जिसे अब बदलकर सुबह 07:15 बजे कर दिया गया है। इसी तरह से शाम के वक्त संपन्न होने वाली संध्या आरती के समय में भी संशोधन किया गया है। पूर्व व्यवस्था के अनुसार संध्या आरती शाम 07:30 बजे होती थी, जिसे अब ठीक 15 मिनट पहले यानी शाम 07:15 बजे आयोजित किया जाएगा। श्री श्याम मंदिर कमेटी ने तमाम श्रद्धालुओं से यह अनुरोध किया है कि वे इसी नए समय को ध्यान में रखते हुए ही मंदिर मार्ग पर आगे बढ़ें ताकि दर्शन के दौरान किसी भी असुविधा से बचा जा सके।
बाबा श्याम की सभी पांचों आरतियों का पूरा शेड्यूल
खाटूश्याम जी के पावन दरबार में रोज होने वाली पांचों आरतियों का अद्यतन और विस्तृत समय-चक्र इस प्रकार तय किया गया है
मंगला आरती सुबह 04:30 बजे होती है, जो दिन की सबसे पहली आरती है और ग्रीष्मकाल में कपाट खुलते ही संपन्न होती है।
श्रृंगार आरती सुबह 07:15 बजे होती है, जिसमें बाबा को ताजे फूलों, आभूषणों और वस्त्रों से सजाया जाता है।
भोग आरती दोपहर 12:30 बजे अपने तय वक्त पर होती है, जिसमें विभिन्न पकवानों और खीर-चूरमे का भोग लगता है।
संध्या आरती शाम 07:15 बजे होती है, जिसमें हजारों भक्त मिलकर धूप-दीप के साथ जयकारे लगाते हैं।
शयन आरती रात 10:00 बजे दिन की अंतिम आरती के रूप में होती है, जिसके बाद कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
क्यों हारे का सहारा कहलाते हैं बाबा श्याम?
सनातन परंपरा में खाटूश्याम जी को हारे का सहारा कहकर पुकारा जाता है और भक्त इन्हें भगवान श्रीकृष्ण का कलयुग का अवतार मानते हैं। इस मान्यता के पीछे महाभारत काल से जुड़ी एक बेहद पवित्र पौराणिक कथा है। महासंग्राम के दौरान पांडव पुत्र भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक कौरवों की ओर से मैदान में उतरने जा रहे थे। बर्बरीक के पास ऐसे तीन अचूक बाण थे जिनसे पलक झपकते ही ब्रह्मांड का अंत किया जा सकता था। जब श्रीकृष्ण को उनकी इस असीम शक्ति और हारे हुए पक्ष का साथ देने के संकल्प का पता चला, तो वे एक ब्राह्मण का रूप धारण कर उनके पास पहुंचे और दान में उनका शीश मांग लिया। वीर बर्बरीक ने बिना किसी संकोच के अपना सिर काटकर अर्पित कर दिया।
इस अतुलनीय त्याग से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में वे उनके अपने नाम श्याम से पूजे जाएंगे और जो भी निराश व्यक्ति सच्ची श्रद्धा से उनकी शरण में आएगा, वे उसका सबसे बड़ा संबल बनेंगे। इसी वरदान के कारण आज भी करोड़ों लोग उनके दरबार में आते हैं।



















