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जब 'जय' बना 'गब्बर': शोले की रीमेक ने लिखी बॉलीवुड के सबसे बड़े डिजास्टर की कहानीबॉलीवुड
1 जुल॰ 2026, 8:08 pm (29 दिन पहले)· 2

जब 'जय' बना 'गब्बर': शोले की रीमेक ने लिखी बॉलीवुड के सबसे बड़े डिजास्टर की कहानी

1975 में 'शोले' ने बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे, लेकिन 2007 में उसी कहानी पर बनी 'रामगोपाल वर्मा की आग' रिलीज़ के पहले दिन ही धराशाई हो गई। दोनों फिल्मों में अमिताभ बच्चन लीड रोल में थे, पर दोनों का अंजाम ज़मीन-आसमान जितना अलग रहा।

बॉलीवुड में रीमेक कोई नई बात नहीं है, लेकिन 'शोले' और 'रामगोपाल वर्मा की आग' का किस्सा अपने आप में बिल्कुल अनोखा है। 1975 में एक कहानी ने सिनेमाघरों को गुलज़ार कर दिया था, जबकि 2007 में उसी कहानी ने सिनेमाघरों को सुनसान छोड़ दिया। दोनों बार पर्दे पर लीड में अमिताभ बच्चन जैसा दिग्गज नाम था, फिर भी दोनों फिल्मों का नतीजा एकदम उलटा रहा।

शोले: जब पर्दे पर उतरा बॉलीवुड का सबसे बड़ा धमाका

15 अगस्त 1975 को निर्देशक रमेश सिप्पी ने 'शोले' रिलीज़ की और हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक नया युग शुरू हो गया। फिल्म दो बदमाश दोस्तों जय और वीरू की कहानी थी, जो एक रिटायर्ड ठाकुर की खातिर खूंखार डाकू गब्बर सिंह से भिड़ते हैं। अमिताभ बच्चन ने 'जय' का रोल इस कमाल से निभाया कि उनका माउथ-ऑर्गन वाला सीन आज भी दर्शकों के ज़ेहन में ताज़ा है। जय की खामोशी में एक गहराई थी, और आखिरकार दोस्त के लिए जान दे देने का उनका फैसला उन्हें अमर बना गया। इसी किरदार ने अमिताभ बच्चन को बॉलीवुड के 'एंग्री यंग मैन' की कुर्सी पर और मज़बूती से बिठा दिया।

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करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस फिल्म ने उस ज़माने में इंडियन बॉक्स ऑफिस पर लगभग 15 करोड़ रुपये कमाए और इसका कुल ग्रॉस कलेक्शन 35 करोड़ से भी आगे निकल गया। अनेक सिनेमाघरों में यह फिल्म पाँच-पाँच साल तक बिना रुके चलती रही। 'शोले' को आज भी बॉलीवुड की ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शुमार किया जाता है।

रामगोपाल वर्मा की आग: 32 साल बाद वही कहानी, बिल्कुल अलग नतीजा

2007 में निर्देशक रामगोपाल वर्मा ने 'शोले' की मूल कहानी को पूरी तरह उठाकर 'रामगोपाल वर्मा की आग' बनाई। उन्होंने रामगढ़ के गांव की जगह मुंबई के अंडरवर्ल्ड और घने जंगलों को बैकड्रॉप बनाया। दो शातिर चोरों का किरदार अजय देवगन और प्रशांत राज ने निभाया, जबकि एक हाथ कटे पुलिस अफसर की भूमिका में मोहनलाल नज़र आए। कहानी का ढांचा पुराना ही था: दोनों चोर मिलकर एक सनकी गैंगस्टर को पकड़ने का ठेका लेते हैं।

लेकिन इस फिल्म का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह था कि जो अमिताभ बच्चन कभी 'जय' बने थे, वे इस रीमेक में 'बब्बन सिंह' के रूप में साइको विलेन की भूमिका में थे। 'बब्बन सिंह' असल में गब्बर सिंह का ही नया और आधुनिक अवतार था।

अमिताभ की एक्टिंग और फिल्म की बड़ी खामियां

अमिताभ बच्चन का यह रूप दर्शकों को रास नहीं आया। उनका अजीबोगरीब तरीके से आंखें घुमाना, बार-बार जीभ बाहर निकालना और बेहद लाउड अभिनय दर्शकों के गले नहीं उतरा। जिस कलाकार को लोगों ने 'जय' के शांत और संजीदा रूप में दिल में बसाया था, उसे 'गब्बर' के मनोरोगी किरदार में देखना उनके लिए हज़म ही नहीं हुआ।

फिल्म का निर्देशन और स्क्रीनप्ले भी बेहद कमज़ोर साबित हुआ। समीक्षकों ने इसे बॉलीवुड इतिहास की सबसे घटिया रीमेक करार दिया। भारी बजट और दमदार स्टारकास्ट के बावजूद फिल्म अपनी रिलीज़ के पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिर गई। सिनेमाघरों में गहरा सन्नाटा पसरा रहा, डिस्ट्रीब्यूटर्स कंगाल हो गए और ट्रेड ने बिना किसी हिचकिचाहट के इसे 'डिजास्टर' का वर्डिक्ट दे दिया।

सवाल-जवाब

शोले कब रिलीज़ हुई और इसे किसने बनाया?
शोले 15 अगस्त 1975 को रिलीज़ हुई थी और इसे निर्देशक रमेश सिप्पी ने बनाया था।
शोले का बजट कितना था और उसने कुल कितनी कमाई की?
शोले करीब 3 करोड़ रुपये के बजट में बनी थी, इसने इंडियन बॉक्स ऑफिस पर लगभग 15 करोड़ कमाए और कुल ग्रॉस कलेक्शन 35 करोड़ से भी ऊपर रहा।
शोले में अमिताभ बच्चन ने कौन सा किरदार निभाया था?
उन्होंने 'जय' का किरदार निभाया था जो एक शांत और संजीदा शख्स है, माउथ-ऑर्गन बजाता है और दोस्त के लिए अपनी जान दे देता है।
रामगोपाल वर्मा की आग में कौन-कौन मुख्य भूमिका में थे?
अजय देवगन और प्रशांत राज ने दो चोरों का किरदार निभाया, मोहनलाल एक हाथ कटे पुलिस अफसर की भूमिका में थे और अमिताभ बच्चन 'बब्बन सिंह' के रोल में थे।
रामगोपाल वर्मा की आग में अमिताभ बच्चन ने कौन सा रोल किया?
उन्होंने 'बब्बन सिंह' का किरदार निभाया जो शोले के गब्बर सिंह का नया अवतार था।
रामगोपाल वर्मा की आग क्यों फ्लॉप हुई?
फिल्म का कमज़ोर निर्देशन, खराब स्क्रीनप्ले और अमिताभ बच्चन की ओवर-द-टॉप एक्टिंग दर्शकों को बिल्कुल पसंद नहीं आई, जिसके चलते ट्रेड ने इसे 'डिजास्टर' करार दिया।
शोले कितने सालों तक सिनेमाघरों में चली?
कई सिनेमाघरों में शोले लगातार 5 साल तक चलती रही।
शोले और रामगोपाल वर्मा की आग के बीच कितने साल का फासला था?
दोनों फिल्मों के बीच ठीक 32 साल का फासला था, शोले 1975 में और आग 2007 में आई।
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