करीना कपूर के आगामी प्रोजेक्ट 'दायरा' की चर्चाओं के बीच दर्शकों की निगाहें एक बार फिर उनके फिल्मी सफर और बेहतरीन किरदारों की ओर मुड़ गई हैं। अपने करियर में उन्होंने कमर्शियल सिनेमा के ग्लैमरस किरदारों से लेकर गंभीर और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं तक एक लंबा सफर तय किया है। जब भी पर्दे पर उनकी किसी नई पेशकश का इंतजार होता है, दर्शक उनके उन पुराने किरदारों को याद करना पसंद करते हैं जिन्होंने सिनेमाई स्तर पर अमिट छाप छोड़ी है। उनके करियर की ऐसी ही आठ चुनिंदा फिल्में हैं, जो उनकी अभिनय क्षमता और बहुमुखी प्रतिभा को खूबसूरती से दर्शाती हैं।
थ्रिलर सिनेमा में गंभीर अभिनय का परिचय
साल 2023 में रिलीज हुई 'जाने जान' एक गहरे रहस्य और तनाव से भरी थ्रिलर फिल्म है। इस फिल्म में करीना कपूर ने एक ऐसी सिंगल मदर की भूमिका निभाई जो हर हाल में अपने बच्चे की सुरक्षा करना चाहती है और साथ ही एक बहुत बड़ा राज अपने भीतर छिपाए रखती है। उनका यह अभिनय बेहद नपा-तुला, शांत और सोच-समझकर गढ़ा गया था, जिसने सस्पेंस को अंत तक बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाई। इसी क्रम में साल 2012 की साइकोलॉजिकल थ्रिलर 'तलाश: द आंसर लाइज विदिन' भी खास स्थान रखती है। इसमें उन्होंने रोजी का रहस्यमयी और मोहक किरदार निभाया था, जो दर्शकों को अंत तक अपनी सीट से बांधे रखता है और सीधे उनके दिलों में जगह बना लेता है।
रोमांस और कॉमेडी के अमर किरदार
साल 2007 में आई फिल्म 'जब वी मेट' ने करीना कपूर के करियर को एक नई दिशा दी और उनके स्टारडम को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। इस फिल्म में उन्होंने बेफिक्र और जिंदादिल गीत ढिल्लों का किरदार निभाया था। पर्दे पर शाहिद कपूर के साथ उनकी स्वाभाविक केमिस्ट्री को दर्शकों ने बेहद पसंद किया और यह किरदार भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय रोमांटिक किरदारों में शामिल हो गया। वहीं साल 2009 की सुपरहिट फिल्म '3 इडियट्स' में उन्होंने पिया सहस्रबुद्धे की भूमिका निभाई। अपनी सटीक कॉमिक टाइमिंग और संवेदनशील अभिव्यक्ति से उन्होंने फिल्म के हास्य और भावनात्मक ड्रामा को एक खास संतुलन दिया।
पॉप कल्चर और लीक से हटकर की गई भूमिकाएं
साल 2001 में रिलीज हुई 'कभी खुशी कभी गम' में पूजा उर्फ पू का किरदार शायद ही कोई दर्शक भूल सके। यह किरदार मानो विशेष रूप से उनके लिए ही तैयार किया गया था। इस भूमिका ने उन्हें एक पॉप-कल्चर आइकॉन में तब्दील कर दिया। उनकी जबरदस्त कॉमिक टाइमिंग, बेबाक ग्लैमर और यादगार संवाद आज भी दोहराए जाते हैं। ग्लैमर के इस शिखर के बाद साल 2004 में आई 'चमेली' में उन्होंने एक बड़ा जोखिम उठाया। इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसी महिला का रोल निभाया जो पैसों की खातिर अपना शरीर बेचती है। अपनी भावुकता और सशक्त अभिव्यक्ति से उन्होंने हर आलोचक और दर्शक को प्रभावित किया।
संवेदनशील ड्रामा और साहित्यिक रूपांतरण
साल 2006 में विशाल भारद्वाज के निर्देशन में बनी फिल्म 'ओमकारा' शेक्सपियर के मशहूर नाटक पर आधारित थी। इस ग्रामीण और राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले गंभीर ड्रामा में करीना कपूर ने डॉली मिश्रा का नाजुक किरदार निभाया। गांव की जटिल राजनीति और ईर्ष्या के बीच उनका यह किरदार अपनी मासूमियत, गरिमा और शांति से हर किसी का दिल छू लेता है। इसके बाद साल 2016 में रिलीज हुई 'उड़ता पंजाब' में उन्होंने डॉ. प्रीत साहनी की भूमिका निभाई। इस कहानी में वह नशे के दलदल में धंसी युवा पीढ़ी को बचाने और सुधारने की पुरजोर कोशिश करती हैं। फिल्म में उनका अभिनय अत्यंत संयमित, यथार्थवादी और जमीन से जुड़ा हुआ नजर आया।


















