पौराणिक पृष्ठभूमि पर तैयार की गई फिल्म ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने के बाद टिकट खिड़की पर अपेक्षित दर्शक जुटाने में संघर्ष करती नजर आई। इस परियोजना के व्यावसायिक प्रदर्शन को लेकर चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन अब इसके पीछे के कारणों पर एक अलग दृष्टिकोण सामने आया है। परियोजना से जुड़े कर्ताधर्ताओं का कहना है कि थिएटर्स में दर्शकों की कम संख्या केवल विषयवस्तु की स्वीकार्यता से जुड़ी बात नहीं थी, बल्कि प्रदर्शन के दौरान बने माहौल ने फिल्म के प्रदर्शन को सीधे तौर पर प्रभावित किया। अब इस पूरे प्रकरण के बाद निर्माण टीम इसे नए सिरे से बड़े पर्दे पर पेश करने की रूपरेखा बना रही है।
थिएटर्स में दर्शकों की कमी और सुनियोजित प्रचार के दावे
फिल्म के निर्माता प्रकाश महोबिया ने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि इस सिनेमाई प्रयास को आम दर्शकों के सामने अपनी जगह बनाने का अनुकूल अवसर ही नहीं मिल सका। उनके मुताबिक परियोजना के सार्वजनिक प्रदर्शन के दौर में एक सोची-समझी नकारात्मक प्रचार मुहिम चलाई गई, जिसका सीधा असर सिनेमाघरों में आने वाले लोगों पर पड़ा। निर्माता का कहना रहा कि जिन दर्शकों ने थिएटर्स का रुख किया और पूरे दृश्य पटल को देखा, उनकी ओर से संतोषजनक प्रतिक्रिया आई, लेकिन बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचने से पहले ही प्रतिकूल माहौल तैयार कर दिया गया।
प्रकाश महोबिया के अनुसार डिजिटल मंचों पर सक्रिय इन्फ्लुएंसर्स और वीडियो बनाने वालों के बीच भ्रामक बातें पहुंचाई गईं ताकि लोग थिएटर्स का रुख करने से कतराएं। उनका कहना है कि योजनाबद्ध तरीके से गलत सूचनाएं प्रसारित की गईं, जिससे सामान्य दर्शकों का रुझान प्रभावित हुआ। हालांकि, जब इस दुष्प्रचार की अगुवाई करने वाले विशिष्ट पक्षों के बारे में बात की गई, तो उन्होंने किसी खास व्यक्ति या टीम का सीधा नाम लेने से परहेज किया।
बड़ी बजट फिल्मों के संदर्भ में उठते सवाल
एक तरफ दर्शक नितेश तिवारी के निर्देशन और नमित मल्होत्रा के निर्माण में बन रही बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ को लेकर उत्सुक हैं, वहीं दूसरी तरफ इस अपेक्षाकृत छोटे पौराणिक प्रोजेक्ट के निर्माताओं के बयानों ने उद्योग में नई चर्चा छेड़ दी है। जब प्रकाश महोबिया से स्पष्ट पूछा गया कि क्या उनका इशारा आगामी बड़े बजट वाली ‘रामायण’ से जुड़ी निर्माण टीम की तरफ है, तो उन्होंने इस बात की सीधी पुष्टि करने से इनकार कर दिया।
निर्माता ने केवल इतना साझा किया कि उन्हें ऐसी जानकारी मिली थी कि आने वाली बड़ी फिल्मों के संदर्भ को देखते हुए इस प्रकार के नकारात्मक अभियानों को बढ़ावा दिया गया हो सकता है। किसी औपचारिक नाम का उल्लेख किए बिना उन्होंने यह रेखांकित किया कि बाजार की प्रतिस्पर्धा और धारणा निर्माण ने उनकी रिलीज के समय को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया।
कास्टिंग, सोशल मीडिया विवाद और पोस्टर पर मचे हंगामे की हकीकत
अभिषेक सिंह द्वारा निर्देशित यह फिल्म 25 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में उतारी गई थी। इस प्रस्तुति में अंजलि अरोड़ा, देव शर्मा और राजनेश दुग्गल ने मुख्य चरित्रों को पर्दे पर जीवंत किया है। सार्वजनिक प्रदर्शन से पहले ही सोशल मीडिया पर विभिन्न पहलुओं को लेकर बहस छिड़ी हुई थी। विशेष रूप से अंजलि अरोड़ा को सीता के रूप में चुने जाने के निर्णय पर इंटरनेट पर तीखी टिप्पणियां आई थीं, जबकि दृश्य प्रभावों यानी वीएफएक्स की गुणवत्ता भी चर्चा का केंद्र बनी रही।
रिलीज के बाद एक प्रचार सामग्री को लेकर भी व्यापक स्तर पर व्यंग्यात्मक टिप्पणियां और मीम्स बने, जिसमें वानर सेना के एक पात्र को चश्मा पहने दर्शाया गया था। इस पर निर्माताओं ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया था कि वह दृश्य फिल्म के मूल फुटेज का हिस्सा नहीं था, बल्कि प्रचार के लिए तैयार की गई स्वतंत्र कलाकृति थी। बावजूद इसके, इंटरनेट पर इस तस्वीर ने फिल्म के आसपास एक असहज धारणा को हवा दे दी थी।
बॉक्स ऑफिस आंकड़े और दोबारा रिलीज का फैसला
सैकनिल्क के दर्ज आंकड़ों के अनुसार, 25 सितंबर को लगभग 1,060 शोज के साथ बड़े पर्दे पर आई ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ का भारत में कुल नेट कलेक्शन लगभग 40 लाख रुपये तक ही सीमित रहा। वहीं दुनिया भर के स्तर पर इसका कुल ग्रॉस कारोबार करीब 46 लाख रुपये आंका गया। इतने सीमित आंकड़ों के बावजूद फिल्म से जुड़े लोग अपनी कहानी को लेकर पूरी तरह निराश नहीं हैं।
निर्माता प्रकाश महोबिया ने स्पष्ट किया है कि उत्तर भारत के कई क्षेत्रों से दर्शकों का उत्साहजनक फीडबैक मिला है। विशेष रूप से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के सिनेमाघरों से आए अनुभवों के आधार पर टीम ने इस फिल्म को फिर से रिलीज करने का मन बनाया है। निर्माताओं का कहना है कि किसी भी प्रकार की री-शूटिंग किए बिना, मूल स्वरूप में ही इस फिल्म को पुनः थिएटर्स में लाया जाएगा ताकि बिना किसी पूर्वग्रह के दर्शक इसे स्वयं देख और परख सकें।

















