राजस्थान के बारां जिले में भगत सिंह सेना के प्रमुख और नेता नरेश मीणा से जुड़े कानूनी विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है। पहले 6 नवंबर को नाहरगढ़ थाने पहुंचकर स्वेच्छा से पुलिस हिरासत स्वीकार करने का इरादा जताने वाले नेता ने अपने इस फैसले को फिलहाल टाल दिया है। इस बदले हुए रुख के बाद क्षेत्र में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है और पुलिस अमला पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। नरेश मीणा के गांव और उससे सटे इलाकों में एहतियातन काफी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है, ताकि कानून और व्यवस्था की स्थिति सामान्य बनी रहे। इस बीच उन्होंने अपने समर्थकों से शांति व्यवस्था कायम रखने और किसी भी प्रकार की उत्तेजना से बचने का आग्रह किया है।
समर्थकों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने का आग्रह
नरेश मीणा ने अपने समर्थकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी तरह के अनैतिक या गैर-कानूनी आचरण से पूरी तरह दूर रहें, जिससे क्षेत्र के माहौल पर कोई आंच न आए। फिलहाल उनके इस बदले कदम से कानूनी प्रक्रिया को लेकर असमंजस की स्थिति दिखाई दे रही है। पूरा विवाद नाहरगढ़ वन रेंज कार्यालय में हुई मारपीट और हंगामे की एक घटना से जुड़ा है, जिसमें नरेश मीणा पर गंभीर आरोप दर्ज हैं। इसी प्रकरण के सिलसिले में उन्होंने 6 नवंबर को स्थानीय नाहरगढ़ थाने में स्वयं जाकर आत्मसमर्पण करने की घोषणा सार्वजनिक रूप से की थी। उस घोषणा के सामने आते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन तुरंत सतर्क हो गया था और सुरक्षा इंतजामों को पुख्ता करने की कवायद शुरू कर दी गई थी।
गांव में पुलिस का कड़ा पहरा और नई कानूनी रणनीति
प्रशासन को यह आशंका सता रही थी कि यदि नेता थाने में पेश होते हैं, तो भारी संख्या में उनके समर्थक मौके पर जमा हो सकते हैं, जिससे शांति और कानून व्यवस्था के लिए चुनौती खड़ी हो सकती है। इसी वजह से गांव और संबंधित क्षेत्रों की सुरक्षा चाक-चौबंद कर दी गई थी। सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा करते हुए नरेश मीणा ने स्थिति स्पष्ट की कि गांव के चारों ओर पुलिस ने भारी घेराबंदी कर रखी है। उन्होंने समर्थकों से कानून को हाथ में न लेने और पुलिस को अपनी सामान्य ड्यूटी करने देने की बात कही। साथ ही यह जानकारी भी साझा की कि वह सुरक्षित स्थान पर हैं और अब पुलिस के समक्ष सीधे आत्मसमर्पण करने के बजाय न्यायालय का सहारा लेंगे।
नाहरगढ़ वन रेंज विवाद और आगामी कानूनी कदम
नाहरगढ़ वन रेंज दफ्तर में हुए उपद्रव और मारपीट के मामले में नरेश मीणा पर मामला दर्ज होने के बाद से ही पुलिस उनकी तलाश में सक्रिय रही है। एक अवसर पर नरेश मीणा की तलाश में तीन थानों की पुलिस सुबह-सवेरे उनके आवास पर पहुंची थी, जहां भारी पुलिस जाब्ता देखकर परिजनों ने तीखी नाराजगी भी जताई थी। अब जब उन्होंने थाने में आत्मसमर्पण करने का विचार त्याग दिया है, तो सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वे न्यायालय के समक्ष अग्रिम राहत या अन्य कानूनी विकल्पों के तहत क्या कदम उठाते हैं। पुलिस की टीमें इलाके में सतर्कता बरत रही हैं और न्यायालय में उनके संभावित कानूनी कदम पर नजर रखी जा रही है।
















